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Darbhanga/Bihar: बिहार की बेटी ज्योति पासवान का नाम तो आप ने सुन ही किया होगा। अपने साहस से पूरे विश्व में मिसाल पेश करने वाली दरभंगा की ज्योति कुमारी की मदद के लिए अब अनेक हाथ आगे आने लगे हैं। अब देश विदेश के लोगो के बीच इस बेटी का जादू चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इंवाका ट्रंप की ओर से ज्योति की सराहना के बाद कई लोग उसकी मदद के लिए सामने आये है।
ज्योति की मदद के लिए लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी अपने हाँथ आगे बढ़ाये हैं। उन्होंने इस साहसी बेटी को 51000 रुपये मदद के रूप में प्रदान किये है। बिहार में अधिकतर राजनीतिक पार्टियों के नेता एक-एक कर ज्योति की मदद के लिए सामने आये है। सभी ज्योति की हिम्मत की सराहना कर रहे है। ज्योति की मदद के लिए अब लोगो की लाइन लग रही है।
खबर के अनुसार लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा है कि उनकी तरफ से 51 हजार रुपये की राशि इस कोरोना संकट में आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की गई है। चिराग पासवान ने कहा कि उन्होंने ज्योति की पढाई का पूरा खर्च वहां करने का ज़िम्मा लिया है। ज्योति की ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई का सारा खर्च चिराग पासवान ने देने का ऐलान किया है।
बिहार की बेटी ज्योती पासवान के लिए लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के जमुई से लोजपा के युवा सांसद बड़े भाई आदरणीय चिराग पासवान जी के द्वारा 51000/= रुपए की आर्थिक मदद और अब उसे ग्रेजुएशन तक पढ़ाई करने की घोषणा।
बहुत ही सराहनीय कार्य @ichiragpaswan 🙏🙏 pic.twitter.com/rk2L9t6JEp— युवा बिहारी निखिल प्रशांत (@Inikhilprashant) May 24, 2020
आपको बता दे की अनेक लोगो एयर नेताओ ने कॉल करके मोहन पासवान और उनकी बेटी ज्योति पासवान से बात की है। उन्होंने ज्योति को उसके साहस के लिए बधाई दी। उन्होंने ज्योति को पढ़ाई करने की राये दी और उसे कहा कि खर्चे की चिंता नहीं करना। आपको ज्ञात हो कि दो दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रंप ने ट्वीट कर 15 साल की ज्योति की सराहना की थी।
इवांका ने ट्वीट किया था की ‘केवल 15 साल की ज्योति अपनी साइकिल के पीछे अपने घायल पिता को बैठाकर 7 दिनों में 1200 किलोमीटर की दूरी तय करके अपने गांव वापस ले आई। धैर्य और प्रेम का यह खूबसूरत साहसिक कार्य भारतीय लोगों और साइकलिंग फेडरेशन की कल्पनाओं को उत्साहित कर गया है।’ उन्होंने ज्योति की तारीफ की थी। बहुत की गरीब परिवार की ज्योति 3 बहन और 2 भाइयों के बीच दूसरे नंबर की बच्ची है। गरीबी के कारण उसे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी।
15 yr old Jyoti Kumari, carried her wounded father to their home village on the back of her bicycle covering +1,200 km over 7 days.
This beautiful feat of endurance & love has captured the imagination of the Indian people and the cycling federation!🇮🇳 https://t.co/uOgXkHzBPz
— Ivanka Trump (@IvankaTrump) May 22, 2020
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी ज्योति की सहायता के लिए केंद्र सरकार के लेवेल पर बात की है। रविशंकर प्रसाद ने केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू से बात कर ज्योति पासवान को ट्रेनिंग और अन्न सुविधायें देने की बात की है। रामविलास पासवान ने भी ज्योति की सहायता की मांग की थी। इसके बाद केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि वे ज्योति कुमारी की मदद के लिए हर मुमकिन कार्य करेंगे।
During these difficult times we all are doing the best to help citizens. Was moved to see the courage of a young girl from Bihar who paddled for over 1000 Kms on cycle from Gurugram to Darbhanga with her father as pillion.
Spoke to @KirenRijiju for identifying her talent (1/2) pic.twitter.com/BBBxSOV6K0— Ravi Shankar Prasad (@rsprasad) May 23, 2020
आपको बता दे की दरभंगा की ज्योति कुमारी कोरोना लॉकडाउन के वक़्त अपने पिता के लिए असंभव कार्य कर गई थी। गरीब परिवार की ज्योति पासवान के पिता गुरूग्राम में रिक्शा चलाते थे। परन्तु लॉकडाउन के पहले वे एक दुर्घटना में घायल हुए थे। अपने पिता के घायल होने की खबर लगने के बाद ज्योति साइकिल से गुरूग्राम चली गयी, फिर आपात की स्थिति में लॉकडाउन हो गया था। ऐसे में ज्योति अपने पिता के साथ गुरूग्राम में ही अटक गई थी।
कोरोना महामारी के इस संकट से पूरा देश लड़ रहा है। ऐसे कठिन समय में आधुनिक श्रवण कुमार, बिहार की बेटी #ज्योति_पासवान ने अपने पिता को साइकिल पर बिठाकर गुरुग्राम से दरभंगा तक 1000 किमी से ज्यादा की यात्रा कर जिस हिम्मत और साहस का परिचय दिया है, उससे अभिभूत हूं। 1/2 @narendramodi pic.twitter.com/p6TGz9PXsa
— Ram Vilas Paswan (@irvpaswan) May 24, 2020
ज्योति के पिता का काम भी बंद था और गुरूग्राम में रहने और खाने के लाले थे। ऐसे में ज्योति ने पिता को लेकर अपने गांव वापस लौटने का फैसला किया। गांव वापस जाने के लिए बस या ट्रेन नहीं थी। बहादुर बेटी ने साइकिल से गुरूग्राम से दरभंगा तक जाने का फैसला किया। ज्योति ने साइकिल पर अपने पिता को बिठाया और गुरूग्राम से चल निकली। गुरूग्राम से दरभंगा तक 1200 किलोमीट का सफर ज्योति ने 7 दिनों मे पूरा कर लिया।



