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Gaya: चाय किसे पसंद नहीं है। भारत में ये सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं है बल्कि एक शौक है। आप अपने मेहमान को भले ही काजू किशमिश खिला दें, लेकिन यदि उसे चाय नहीं पिलाई तो कहीं ना कहीं उसको यह बात खटकेगी की स्वागत में चाय नहीं मिली।
साधारण सी दिखने वाली चाय (Tea) कितना बड़ा कमाल कर सकती है, इसका उदाहरण आप आज मार्केट में देख सकते हैं। पिछले एक दशक से सिर्फ चाय के आउटलेट्स की बाढ़ सी आ गई। आज ढेरों स्टार्टअप आपको सिर्फ चाय के नाम से मिलेंगे जिनमें कुछ प्रसिद्ध नाम है एमबीए चायवाला, चाय शाय बार, ग्रेजुएट चाय, और इंजीनियरिंग चाय वाला।
यह स्टार्टअप ना केवल पैसा कमा रहे हैं बल्कि, इन्होंने समाज में एक अलग ही ट्रेंड चालू कर दिया की छोटी सी दिखने वाली चाय भी कितना प्रॉफिटेबल स्केलिंग बिजनेस हो सकता है। लेकिन इन बड़े प्रोफेशनल चाय वालों के बीच में एक बहुत ही साधारण चाय वाला भी है, जो अपने किसी स्टार्टअप के लिए नहीं बल्कि लोगों को दान करने के लिए फेमस हुआ है।
उसे “दानवीर चाय वाला” (Danveer Chaiwala) के नाम से बुलाते हैं लोग। आज की हमारी स्टोरी डेडीकेटेड है, इस शख्स के लिए जिसने लोगों की सेवा के लिए अपना स्वयं का मकान भी बेच (Sold His House) दिया बिना किसी की परवाह किए।
हर तरफ चर्चा है इस दानवीर चाय वाले की
बिहार की भूमि सदियों से बड़े-बड़े व्यक्तित्व की देन रही है, ये धर्म संस्कृति एवं शिक्षा के क्षेत्र में कई महापुरषों की जन्म भूमि रही है, जो पूरी दुनिया में मिसाल बन गई। ऐसी ही एक मिसाल सामने आई है, जिसमें गया जिले में रहने वाले एक शख्स जिनका नाम संजय चंद्रवंशी (Sanjay Chandravanshi) है।
आज प्रसिद्ध हो गए हैं दानवीर चाय वाले के नाम से, क्योंकि पिछले 35 वर्षों से यह न केवल लोगों को मुफ्त चाय पिला रहे हैं। बल्कि अपनी पत्नी के संग मिलकर गरीबों के लिए भोजन, सुबह के नाश्ते एवं जानवरों के लिए भी खाने की व्यवस्था करते हैं। यही वजह है कि आज छोटा हो या बड़ा हर कोई संजय चंद्रवंशी जी की इस दान शीलता की तारीफ करते नहीं थकते।
250 वर्षों से भी अधिक पुरानी है इसके परिवार की यह परंपरा
आपको बताना चाहेंगे दोस्तों की दान शीलता की यह परंपरा इनके परिवार में पिछले 5 पीढ़ियों से भी ज्यादा पुरानी है। बातचीत के दौरान संजय चंद्रवंशी जी ने बताया कि उन्हें अपने पिता बनवारी राम से विरासत की तौर में यह सेवा भाव प्राप्त हुआ था और उनके पिताजी को दादाजी की तरफ से यह विरासत मिली।
इस तरह से यदि हम पुरानी पीढ़ियों तक जाएं तो 250 सालों का इतिहास है, हमारे चंद्रवंशी परिवार का जहां हमने लोगों और समाज की सेवा के लिए अपना सब कुछ निछावर किया है। आज के समय में विरले ही देखने मिलते हैं ऐसे उदाहरण।
मकान बेच के मिलने वाली रकम भी लगा दी सेवा में
संजय चंद्रवंशी जी एवं उनका परिवार का लोगों की सेवा का जुनून कुछ इस कदर छाया है कि, एक समय जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपने स्वयं का मकान जिसमें वो परिवार के साथ रहते थे उसे भी बेच दिया।
मकान बेचने से 1100000 रुपए की रकम प्राप्त हुई और यह पूरा का पूरा पैसा उन्होंने अपनी दानवीरता के चलते समाज के जरूरतमंदों पर खर्च कर दिया। आज वह किराए के मकान में रहते हैं। परंतु उन्हें जरा भी इस बात का अफसोस नहीं और ना ही उन्होंने कभी समाज के लोगों की परवाह की, बस उनका एक ही लक्ष्य कि उनकी सेवा में कोई बाधा ना आए।
पत्नी भी देती है साथ गरीबों का खाना बनाकर
संजय जी ने अपनी दिनचर्या बताते हुए बताया कि सुबह होती है, तो सबसे पहले वह चींटियों को शक्कर का भोजन परोसते हैं। उसके बाद सुबह से ही उनके पास आसपास के जरूरतमंद भिखारी, असहाय लोग पहुंचने लगते हैं चाय की आस में, यह नाश्ते में चाय बिस्किट लोगों को मुफ्त में ही खिलाते हैं।
इसके पश्चात इनकी पत्नी भी पूर्ण रूप से इनका हाथ बटाती है। वह क्षमता अनुसार भोजन पकाती है, जिन्हें रोज गरीब और असहाय लोगों को खिलाया जाता है। इसके बाद दिनभर संजय जी जो भी आमदनी करते हैं। अपने परिवार का खर्चा चलाने के बाद पूरा का पूरा पैसा ऐसे ही निशक्त जनों की सेवा में दान कर देते हैं। हम उनके और उनके परिवार की इस सेवा के जुनून को सैल्यूट करते हैं।



