बिहार की नालंदा युनिवर्सिटी में 800 साल बाद फिर पढाई प्राम्भ हुई, विदेशी छात्रों भी हिस्सा होंगे

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Nalanda University
Bihar's Nalanda University reopens after 800 years. Academic activities begin in Nalanda University after 800 years.

Nalanda: दोस्तों हम जानते है कि जीवन में शिक्षा क्या अहमियत रखती है और अच्छे कैरियर के लिये हमें ऊंची पढ़ाई भी करनी पड़ती है, जिसके लिये दुनिया भर में बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटीज हैं, जिसमे कुछ तो 200 से 300 साल पुरानी हैं और इसी वजह से उनके महत्व भी बहुत है, लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया को सबसे पहली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी भारत ने ही दी थी।

हम बात कर रहे हैं भारत के बिहार में स्थित नालंदा यूनिवर्सिटी (Nalanda University) की, ये हमारे लिये गर्व की बात है कि पूरी दुनिया को हमने शिक्षा दी, लेकिन मुग़ल आक्रमणों की वजह से इसे नष्ट कर दिया गया था, पर सरकार ने इसे पुनः स्थापित कर सुचारू रूप से चलाने की तैयारी कर ली है।

नालंदा यूनिवर्सिटी का इतिहास और गौरव

इतिहासकार बताते हैं कि दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी के नाम से जाने जानी वाली नालंदा विश्विद्यालय की स्थापना गुप्त काल मे की गई थी 450 ईसवीं में अर्थात आज से करीब 1500 साल पहले राजा कुमार गुप्त (Kumar Gupta) के द्वारा की गई थी। जिसमे 100 से ज्यादा सब्जेक्ट्स में रिसर्च एवं उच्च शिक्षा की व्यवस्था थी।

नालंदा की लाइब्रेरी में अनगिनत किताबें भी हुआ करती थी, परंतु मुग़ल आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी (Bakhtiyar Khalji) जो अत्याचारी एवं क्रूर राजा माना जाता था, उसने भारत को बर्बाद करने सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था को ही नष्ट किया और नालंदा यूनिवर्सिटी को 1193 ईसवीं में इसे तोड़ के इसमें आग लगा दी।

कहते हैं इतनी सारी किताबें थी कि लगातार 6 महीने तक आग जलती रही। 800 सालों से वीरान पड़े नालंदा को पूरे गौरव के साथ अब एक बार फिर उसी जोश से शुरू किया जा रहा।

नालंदा यूनिवर्सिटी की पुनः स्थापना एवं नवीनीकरण

1 सितंबर वर्ष 2014 को भारत सरकार ने देश के पुराने गौरव को पुनः जीवित करने और विश्व गुरु बनने की राह में नालंदा यूनिवर्सिटी को दोबारा से स्तापित करने का बीड़ा उठाया। आज इसकी सुदंरता देखते ही बनती है, नालंदा को इसके पुराने पैटर्न पे ही री डेवेलोप किया गया है, जिसमे पढ़ाई के साथ स्टूडेंट्स के रहने हेतु होस्टल, घूमने, एवं 12 से अधिक सरोवरों का भी निर्वाण किया जा चुका है, अभी इसमें और भी डेवलपमेंट समय के अनुसार होते रहेंगे।

विश्व के अनेक देशों के विद्यार्थी आते थे पढ़ाई एवं रिसर्च हेतु

मिली जानकारी के अनुसार नालंदा विश्वविद्यालय इतना बड़ा था कि भारतीय विद्यार्थी एवं दुनिया भर से आये विदेशी स्टूडेंट्स को मिला के करीब 10000 विद्यार्थी एक साथ नालंदा यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त किया करते थे और अलग अलग विषयों के सैकड़ों शिक्षक भी इसी यूनिवर्सिटी के कैंपस में रहते हुए मार्गदर्शन करते थे।

वर्तमान समय की बात करें, तो वर्ष 2019 से नालंदा यूनिवर्सिटी को रीस्टार्ट करने के बाद से अभी तक करीब 31 देशों के सैकड़ों छात्रों ने एडमिशन लिया है। वहीं 600 से ज्यादा भारतीय छात्र भी पढ़ रहे, जिससे नालंदा का ऐतिहासिक गौरव पुनः उदित होता दिख रहा, जो हमारे देश के लिए बेहद गौरब की बात है।

पढ़ाई उपरांत कैरियर और प्लेसमेंट्स

आज नालंदा यूनिवर्सिटी में हायर स्टडीज में अंतरराष्ट्रीय स्तर पे एमबीए जैसे कोर्सेज चल रहे, जिसमे ऑनलाइन स्टडीज के माध्यम से इंटरनॅशनल फैकल्टीज भी पढ़ा रहे हैं और नालंदा के ऐतिहासिक महत्व और पढ़ाई के चलते स्टूडेंट्स का 100 प्रतिशत प्लेसमेंट का रिकॉर्ड बन रहा है।

वो समय अब दूर नहीं होगा, जब नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर पहले जैसा हो जाएगा और उससे भी ज्यादा कही बेहतर होगा। हमारे लिए बहुत ख़ुशी की बात है कि एक बार फिर देश का गौरब वापस लौटने वाला है। हम सब पुनः विश्वविद्यालय शुरू होने की ख़ुशी में सभी को ढेर सारी बधाई देते है।