इस राज्य की खूबसूरत पहाड़ियों पर पर्यटकों को ‘मोरनी हिल्स’ बहुत भाती है, आने वाले बार बार आते हैं

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Morni Hills
Awesome tourist spot in Haryana is Morni hills. You should visit these beautiful places at Morni hills. People wants came again.

Gurugram: हरियाणा (Haryana) में वैसे तो बहुत से दार्शनिक स्‍थल है, पर उन सब में मोरनी हिल्‍स (Morni Hills) काफी फैमस है। यह हिल्‍स पुंचकुला से काफी पास में है। चूँकि यह हरियाणा का सिर्फ एक ही हिल स्‍टेशन है। इस कारण लोगो द्वारा इस स्‍थान को काफी पसंद किया जाता है। यह पूरे 1220 मीटर की हाइट पर है।

यहॉं पर जीवो की तथा वनस्‍पति की विविधता काफी ज्‍यादा पाई जाती है। यह स्‍थल पुरातात्विक रूप से भी काफी महत्‍वपूर्ण स्‍थल है। यह स्‍थल इतना अदभुत तथा आश्‍चर्य चकित कर देने वाली जगह है कि पर्यटक इस स्‍थान पर इसके बारे में जानने के बाद खुद को यहॉ जाने से रोक नहीं पाते है। यह हिल स्‍टेशन शिवालिक श्रृंखला में स्थित है। जो इसकी महत्‍वपूर्ण विशेषता है। इस जगह पर सुकुन के पल वीकेंड पर अच्‍छे से बिताया जा सकता है।

मोरनी हिल्‍स का इतिहास (Morni Hills History) जाने

इस जगह का एक इतिहास भी रहा है। कहा जाता है कि इस जगह पर एक रानी जिसका नाम मोरनी थी वह राज किया करती थी। रानी को सम्‍मान प्रदान करने के लिये इस जगह के पहाड़ का नाम मोरनी रखा गया। लगभग 15वी शताब्‍दी के आस पास ठाकुर लोग इस मोरनी हिल्‍स जगह पर रहा करते थे। इसके बाद मुगल भी इस स्‍थान पर राज किये है।

ब्रिटिश शासन काल जब शुरू हुआ तो इस जगह पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दिया गया। भारत की जैसे ही आजादी हुई इस स्‍थल को पर्यटक स्‍थल कि लिस्‍ट में जगह दे दी गई। आज हम इस जगह मोरनी हिल्‍स के बारे में ही विस्‍तार से जानेंगे। आपको बता दे कि मोरनी हिल्‍स जगह में काफी ऐसी जगह है, जहां आप घूम सकते है।

एडवेंचर पार्क

मोरनी हिल्‍स में घूकने के लिये एडवेंचर पार्क स्थित है। यहॉं पर बोट राइड तथा ट्रेकिंग आसानी से हो जाती है। यहॉं पर बर्मा पुल, रस्‍सी चढ़ाई, कमांडो नेट, रैपेलिंग तथा रॉक कलाइम्‍बिंग भी करने मिलती है। बच्‍चो के लिये इस जगह में सवारी तथा झूले भी मौजूद है।

करोह पीक

मोरनी हिल्‍स में करोह पीक है जोकि यहां का एक फैमस पर्यटक स्‍थल कहा जाता है। इसकी ऊॅचाई 4813 फीट की है। इसे हरियाणा की सबसें ऊँची चोटी होने का सम्‍मान भी प्राप्‍त है। इस स्‍थान से आसपास के बहुत ही सुंदर नजारे देखने को मिलते है।

टिक्‍कर ताल

यह जगह इतनी हरी भरी है कि इसे मोरनी हिल्‍स का सबसे सुन्‍दर आनंददायक पर्यटन स्‍थल कहा जा सकता है। इस जगह पर झील मोजूद है वही जगह इतनी शांत है कि किसी का भी मन इस जगह पर जाने के लिये आकर्षित हो जाये।

गुरूद्वारा नाडा साहिब

इस जगह को पंचकुला तथा मोरनी हिल्‍स का सबसे पवित्र स्‍थल बोला जाये तो गलत नही होगा। इसे सिख समुदाय के लोग काफी पवित्र और महत्‍वपूर्ण मानते है। इस स्‍थल के पास से घग्‍गर हाका नदी बहती है। यह स्‍‍थल काफी हरी भरी और शांत जगह पर है इस कारण ही सिख समुदाय के लोग काफी दूर दूर से इस स्‍थल पर आते है।

मोरनी हिल्‍स तथा वन्‍य जीव

मोरनी हिल्‍स का वन्‍य जीव से काफी गहरा नाता है। इस स्‍थल पर जैव विविधता बहुत ही ज्‍यादा है। यहॉं आपको आसानी से लंगूर, सियार, सांभर, नीलगाय, हाइना, जंगली सुअर, तथा भौंकने वाले हिरण देखने मिल जायेंगे। इस जगह पर बहुत से स्‍थानीय पक्षी आते है।

वन्‍य जीव प्रेमी के लिये यह जगह स्‍वर्ग के समान है। वही बनस्‍पति की बात करे तो इस जगह पर नीम, ओक, जामुन, अमलतास, पीपल तथा जेरकंडा के पौधे देखने मिल जाते है। अगर आप वन्‍य जीव तथा वनस्‍पति प्रेमी है यह स्‍थल आपके मन को जरूर भा जायेगा।

मोरनी किला (Morni Fort)

इस स्‍थल पर एक प्राचीन किला भी मौजूद है। जिसे मोरनी फोर्ट के नाम से लोगो के बीच जाना जाता है। यह ऊँचाई पर स्थित है इसलिए यहा से खूबसूरत नजारे आस पास के देखने मिल जाते है। इस किले को 17 वी शताब्‍दी के आस पास बनाया गया था। यही पर आप शिव भगवान को समर्पित एक मंदिर भी देख सकते है।

घूमने का सही समय

इस स्‍थल पर घूमने के सही समय की बात करे तो सबसे सही समय अक्‍टूबर से लेकर मार्च माह तक का होता है। क्‍योंकि गर्मी में तापमान ज्‍यादा होने से इस जगह में घूमने का मजा किरकिरा हो सकता है। वही बरसात में भी यह जगह घूमने के लिये सही नहीं है क्‍योंकि हरियाली ज्‍यादा होने पर जानवरो से खतरा काफी ज्‍यादा रहता है।

मोरनी हिल्‍स जाने के साधन (How To Go To Morni Hills)

इस स्‍थल पर आप हवाई मार्ग, सड़क मार्ग और रेल मार्ग किसी से भी जा सकते है। अगर आप हवाई मार्ग द्वारा इस स्‍थल पर जाना चाहते है तो चंडीगढ हवाई अडडे में आपको उतरना होगा। इस जगह पर आप मुंबई, दिल्‍ली, हैदराबाद, कोलकाता, पुणे किसी भी स्‍थान से आ सकते है। जब आप हवाई अडृडा आ जाये तो बस या टैक्‍सी ले ले।

वही सड़क मार्ग से इस स्‍थल पर आने के लिये अंतराज्‍यीय पर्यटक बस पर सीट बुक आसानी से आप कर सकते है। सड़क मार्ग द्वारा इस स्‍थल की दूरी मुंबई से 1600 किलोमीटर, कोलकाता से 1700 किलोमीटर, दिल्‍ली से 260 किलोमीटर तथा बैंगलुरू से 2400 किलोमीटर की पड़ती है। अगर आप खुद के निजी साधन से इस स्‍थल पर जाना चाहते है, तो उससे भी जा सकते है।

वही रेल मार्ग की बात करे तो इस स्‍थल पर रेल से पहुँचने के लिये आपको 30 किलोमीटर दूर चंडी मंदिर रेलवे स्‍टेशन पर उतरना होगा। यहॉ उतरने के बाद आप मोरनी हिल्‍स ऑटो, टेक्‍सी या फिर बस के सहारे आ सकते है। इस स्‍थल पर पहुँचने के लिये चंडीगढ एक्‍सप्रेस, पश्‍चिम एक्‍सप्रेस, कालका शताब्‍दी यह ट्रेन काफी लोकप्रिय है।

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