कश्मीर में यहाँ के किसान ने कीवी की खेती से किया कमाल, सेब की जगह कीवी को कमाई का ज़रियाँ बनाया

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Kiwi farming
Kiwi farming file presentation photo.

Sopore: जम्मू कश्मीर (Jammu-Kashmir) हमारे देश का एक ठंडा प्रदेश है। इसे एप्पल टावर के रूप मे जाना जाता है। इसका नाम एप्पल टावर इसलिए पड़ा है, क्योंकि जम्मू कश्मीर में एप्पल की खेती काफि ज्यादा की जाती है। एप्पल की खेती की वजह से ही जम्मू कश्मीर काफी मशहूर है।

अब खबर है कि एप्पल के अलावा भी दूसरे फल की खेती यहा बहुतायत में की जाएगी। अब खबर मिल रहीं है कि जम्मू कश्मीर के उत्तरी कश्मीर के सोपोर स्थान में अब कीवी उत्पादन किया जाएगा। मतलब अब से उत्तरी कश्मीर कीवी का गढ़ बनने वाला है।

कश्मीर अब बनेगा कीवी का गढ़

मिली जानकारी के अनुसार उत्तरी कश्मीर के सोपोर कस्बे पर ऐसे बहुत से किसान है, जिन्होंने कीवी की खेती (Kiwi Farming) करना प्रारंभ कर दिया है। जिससे इस जगह में नई परंपरा प्रारंभ हो चुकी हैं। यह परंपरा धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए अब पूरे जम्मू की परंपरा बनने वाली है।

कीवी की खेती की जो नई परम्परा शुरू की गई है, उसके रिजल्ट काफी अच्छे देखने को मिल रहे हैं। कीवी की फसल के इतिहास की बात करे, तो साल 1987 में सबसे पहले एक व्यक्ति ने प्रयोग के तौर पर कीवी के पौधे को लगाया था।

Kiwi Farming
Kiwi farming file photo.

अब इसको कश्मीर के कई इलाके में लगाया जा रहा है। वहां के राज्य सरकार भी बागवानी विभाग में नर्सरी की स्थापना को प्रोत्साहित कर रहीं है। ताकि और भी कीवी के पौधे तैयार हो सके। अभी की बात करे तो पाटन, बारामूला, नवपोरा तथा उरी में स्थित नर्सरी पर कीवी के नए पौधे तैयार हो रहे हैं।

100 पौधे से होते है 250 बक्से तैयार

किसान जो कि उत्तरी कश्मीर (North Kashmir) के है। उन्होंने ऐसे बहुत से इलाके है, जहा पर कीवी के बागान लगाए हैं। यहां पर होने वाली उपज की बात करे, तो यहां के एक किसान के छोटे से खेत में ही साल लगभग 300 बॉक्स तक कि कीवी की उपज होती हैं। अगर एक नर्सरी में कीवी के लगभग 100 पौधे हो तो उससे लगभग ढाई सौ से भी ज्यादा कीवी के बक्से तैयार होते हैं।

कीवी की फसल में नहीं लगती है कोई बीमारी

कीवी का फल एक तरह से ऑर्गेनिक फल होता है। उत्तरी कश्मीर में कीवी के फसल को उत्पादित करने के लिए किसी भी प्रकार के पेस्टिसाइड या फिर केमिकल को प्रयोग में नहीं लिया जाता है। उत्तरी कश्मीर में जहाँ इसे उगाया जा रहा है, वहां पर कीवी के पौधे में किसी भी प्रकार कि बीमारियां नहीं लगती है। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर राज्य के बहुत से किसानों को खेती के लिए कीवी की फसल रास आ गई है।

900 से 1800 समुद्री तल ऊचाई पर होती है कीवी की खेती

कीवी की फसल की बात करे, तो हमारे भारत में पहाड़ी तथा ठंडे क्षेत्र मे कीवी की उपज बहुत अच्छे से होती है। अगर कीवी की खेती करना हो तो उसके बाग के लिए ऊचाई समुद्र तल से 900 से लेकर 1800 मीटर तक का होना ही सबसे बेहतर माना जाता हैं।

वह इलाके जो कि सेब के उत्पादन करने के लिए गर्म माने जाते है और वह इलाके जो नींबू-आम इन सभी प्रजाति की फसलों के लिए ठंडे हैं। वह स्थान कीवी की खेती (Kiwi Ki Kheti) के लिए उपयुक्त माने जाते है।

कीवी होता है पौष्टिकता से भरपूर

कीवी का फल ऐसा फल है, जो कि पौष्टिकता से भरपूर होता है। इस फल को लोग काफी ज्यादा पसन्द करते हैं, पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण ही लोग इसको बहुत खाते हैं। कीवी में विभिन्न तरह के विटामिन भी काफि प्रचुर मात्रा मे पाए जाते है।

जब देश मे आपदा काल का संकट या फिर डेंगू जैसी बीमारी का दौर चलता है, तो कीवी की बिक्री राज्य में बहुत बढ़ जाती है। कीवी के फल में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है इसलिए इसे लोग विटामिन सी का बड़ा स्रोत मान कर खाते है। कीवी के खेती के लिए राज्य हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तराखण्ड यह नॉर्थ-ईस्ट के राज्य परफेक्ट होते हैं। इन प्रदेशों में कीवी को बड़े पैमाने में भी उगाया जाता है।

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