
Haldwani: उत्तराखंड (Uttarakhand) भारत में देव भूमि के नाम से जानी जाती है, इस प्रदेश का हर एक कोना प्रकृति की सुंदरता से सराबोर है। हर तरफ ऐतिहासिक मंदिर है, जिनका महत्व हजारों साल पुराना है। हर साल लाखों पर्यटक उत्तराखंड घूमने आते हैं। नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी जैसे ढेरों टूरिस्ट प्लेसिस है, जहां लोग परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आते हैं एवं धार्मिक दृष्टि से भी मंदिरों के दर्शन हेतु आते हैं।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के हल्द्वानी (Haldwani) में वन विभाग द्वारा एक रुद्राक्ष वाटिका तैयार की जा रही है। इस वाटिका में सैकड़ों रुद्राक्ष के पेड़ डिवेलप किए जाएंगे एवं एक वॉकिंग ट्रेक भी बनाया जाएगा। यहां कि नागरिक अब सुबह शाम रुद्राक्ष वाटिका (Rudraksh Vatika) में लगे रुद्राक्ष के पेड़ के मध्य मॉर्निंग और इवनिंग वॉक का आनंद ले सकेंगे। जहां उन्हें रुद्राक्ष के पेड़ का पवित्र वातावरण एवं शुद्ध हवा अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्रदान करेगी।
क्या होता है रुद्राक्ष का पौधा और कहां होता है
दोस्तों रुद्राक्ष के बारे में हम सभी ने सुना है। भारतीय सनातन संस्कृति में रुद्राक्ष का महत्त्व बहुत अधिक है। लगभग हर तरीके पूजा कार्यक्रम में रुद्राक्ष का इस्तेमाल किया जाता है। इसे साक्षात भगवान महादेव से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है की रुद्राक्ष का जन्म महादेव की इच्छा से हुआ था, इसलिए इसे धारण करने से जीवन में सुख शांति एवं समृद्धि बनी होती है।
कई प्रकार के मंत्र जप के लिए भी रुद्राक्ष माला का ही प्रयोग किया जाता है। आपको बता दें कि रुद्राक्ष की 35 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। रुद्राक्ष के पेड़ हिमालय की पहाड़ियों के अलावा मध्य प्रदेश, आसाम और दक्षिण भारत की नीलगिरी पर्वत श्रृंखला एवं जंगलों में भी पाए जाते हैं। रुद्राक्ष का पेड़ 10-12 फीट की ऊंचाई से लेकर 50 से 60 फीट तक लंबे हो सकते हैं।
@ANI_news brahmakamal flower and rudraksh tree at brahma vatika at kedarnath dham (10 august 2015) pic.twitter.com/JfWsvxcOVd
— कुलदीप रावत (@rawat123in) August 30, 2015
रुद्राक्ष का पेड़ 2 से 3 साल के अंदर फल देना शुरू कर देते हैं। एक असली रुद्राक्ष की कीमत 4 से 5000 तक होती है। बाजार में असली एवं बहुत अधिक संख्या में नकली रुद्राक्ष भी उपलब्ध है। इसीलिए जब भी आप रुद्राक्ष खरीदें, किसी सरकारी संस्था या सर्टिफाइड कंपनी द्वारा प्रमाणित रुद्राक्ष ही खरीदें।
कैंसर हॉस्पिटल सी लगी वन विभाग की जमीन पर डिवेलप होगी रुद्राक्ष वाटिका
जानकारी के अनुसार हल्द्वानी के रामपुर रोड में स्थित है, स्वामी राम कैंसर हॉस्पिटल। इसी हॉस्पिटल एवं क्रियाशाला के मध्य डेढ़ हेक्टर से अधिक की भूमि तराई वन विभाग के अंतर्गत आती है। इसलिए वन विभाग ने अब निर्णय लिया है की वेस्ट पढ़ी हुई इस भूमि का बेहतर इस्तेमाल करते हुए क्यों न इसे एक रुद्राक्ष वाटिका के रूप में डिवेलप किया जाए।
जिससे यहां के आम नागरिकों को सुरम्य में वातावरण में सैर का आनंद तो मिलेगा ही। वहीं ये अपनी तरह की भारत की पहली रुद्राक्ष वाटिका होगी, जिसे एक साधारण उद्यान की तरह तैयार किया जा रहा है जिसका इस्तेमाल आम लोग कर सकेंगे।
वाटिका में होंगे सैकड़ों रुद्राक्ष के पेड़ जो बनाएंगे इस वाटिका को निराली
अपनी तरह की पहली रुद्राक्ष वाटिका में वन विभाग 400 से अधिक रुद्राक्ष के पेड़ लगाएंगे, जिनके बीच से करीब 3.5 मीटर चौड़ी वाकिंग ट्रेक बनाई जाएगी। जिससे लोग इस रुद्राक्ष पेड़ों के मध्य वॉक का आनंद ले सके।
वन विभाग करेगा देख रेख, लगाएंगे कई किस्म के पौधे वाटिका को बेहतर बनाने
रुद्राक्ष वाटिका बनाने के बाद वाटिका के कर्मचारी एवं स्वयं वन विभाग के कर्मचारी मिलकर इस वाटिका की संरक्षण एवं देखरेख करेंगे। हल्द्वानी जंगल के रेंजर उमेश चंद्र आर्य का कहना है कि, ये देश की प्रथम रुद्राक्ष वाटिका है और हम इसे सुंदर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इसे सुरक्षित करने के लिए एक ऊंची और मजबूत बाउंड्री वॉल भी तैयार की जा चुकी है।



