
Rajgir: दोस्तों पर्यटन किसी भी देश एवं स्थान के आर्थिक गतिविधि को तेज करने का सबसे आसान तरीका है। हर जगह की सरकार अब यह बात समझ चुकी है कि यदि उन्हें अपने प्रांत का डेवलपमेंट करना है और अपने लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करनी है तो, लोकल टूरिज्म को बढ़ावा देना ही पड़ेगा।
इसके लिए जहां कुछ स्टेट्स में ऐतिहासिक धरोहर है जैसे मंदिर, किले इत्यादि वहां पर टूरिस्ट को आकर्षित करना बहुत ही आसान है। परंतु कई ऐसी जगह भी है, जहां कोई भी ऐतिहासिक मीनारें नहीं तो वहां पर आर्टिफिशियल कुछ ऐसे स्पोर्ट्स तैयार किए जा सकते हैं, जिसके जरिए हम टूरिज्म को बढ़ावा दे सके।
इसी सिलसिले में बिहार सरकार ने अपने इस शहर में ग्लास ब्रिज (Glass Bridge) तैयार किया है। दुनिया भर में चाइना (China) इस मामले में सबसे आगे है। जिसके ग्लास ब्रिज की तस्वीरें और वीडियोस लोग देखते ही हैरान हो जाते हैं। परंतु अब हमें चाइना जाने की जरूरत नहीं उसके ग्लास ब्रिज के जैसे ब्रिज हमें बिहार में ही देखे मिल रहा है।
बिहार के नालंदा डिस्ट्रिक्ट में बनाया गया है यह ग्लास ब्रिज
दोस्तों हम जिस क्लास ब्रिज की बात कर रहे हैं, इसे पटना से कुछ घंटे की दूरी पर स्थित नालंदा मैं बनाया गया है। जिसको राजगीर ग्लास ब्रिज (Rajgir Glass Bridge) के नाम से जाना चाहता है। यह चाइना के सुप्रसिद्ध “हांगझोऊ” ग्लास ब्रिज (Hangzhou Glass Bridge) के तर्ज पर ही डिवेलप किया गया है।
ये इतनी ऊंचाई पर बनाया गया है कि, जब आप इस पर चलते हैं, तो धरती आसमान के बीच में आपके पैरों तले कांच का होना या ना होना महसूस ही नहीं होता। ऐसे में अपने आपको इतनी ऊंचाई से नीचे देखना बहुत ही डरावना फील होता है। ऐसा लगता है हम ऊंचाई से नीचे की ओर गिरते जा रहे हैं।
वही ग्रेविटी फोर्स की वजह से हम इस आकर्षण में कुछ इस तरीके से उलझते हैं कि हमारे अंदर की रूह भी कांप जाती है। लोग अक्सर इस पर चलने की कोशिश तो करते हैं पर डर के मारे किसी का हाथ पकड़ लेते हैं या ब्रिज की रैलिंग्स को पकड़कर चलते हैं। कई लोग तो घबरा के अपनी जगह पर बैठ भी जाते हैं और कोशिश करते हैं कि नीचे ना देख पाए।
चाइना के हांगझोऊ ब्रिज की तर्ज पर तैयार किया गया इससे
दुनिया का पहला ग्लास ब्रिज चाइना ने तैयार किया था, जिसे हांगझोऊ नाम से जानते हैं। इसका उद्घाटन 2016 में किया गया था तब यह दुनिया का पहला, सबसे ऊंचा, सबसे लंबा क्लास ब्रिज हुआ करता था। इसकी ऊंचाई जमीन से करीब 300 मीटर है एवं इसकी लंबाई 430 मीटर है। ऊंचे पहाड़ों और खाई के बीच बनाए गए इस ग्लास ब्रिज को स्काईवॉक के नाम से भी जाना जाता है।
आप चाइना में नही बिहार में हैं। बिहार बढ़ रहा है
बिहार का पहला ग्लास ब्रिज#राजगीर pic.twitter.com/r72pcR2pCD— Himmat Kanani (@kananihimmat) December 19, 2020
निश्चय ही इतनी ऊंचाई पर किसी कांच पर चलना आसान बात नहीं है। इसकी वीडियोस आप यूट्यूब पर देख सकते हैं, जिस पर लोग बैठ बैठ कर चलते हुए नजर आते हैं डर की वजह से, इस ब्रिज का पर्यटकों में भारी क्रेज के चलते दुनिया भर में ग्लास ब्रिज बनाने का चलन शुरू हो गया।
ये है ब्रिज की जमीन से ऊंचाई और इसकी कैपेसिटी
दोस्तों आपको बताना चाहेंगे हमारा राजगीर ग्लास ब्रिज जमीन से करीब 200 फीट ऊंचाई पर बनाया गया है। चौड़ाई की बात करें तो यह 6 फीट के करीब रखी गई है। यह कांच का फ्लोर वाला ब्रिज है।
राजगीर के नेचर सफारी में निर्माणाधीन ग्लास फ्लोर ब्रिज एवं जू सफारी का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया। https://t.co/8tma99H2kr pic.twitter.com/Nd3B3hmrQF
— Nitish Kumar (@NitishKumar) December 20, 2020
इस पर चलना आपको स्काईवॉक की तरह महसूस करवाता है। देखने में कांच है, परंतु इसकी मजबूती आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि, इसमें एक बार में अधिकतम 40 लोग खड़े हो सकते हैं, चल सकते हैं एवं एक्टिविटीज कर सकते हैं।
राजगीर ग्लास ब्रिज पर सैर करने के लिए चुकानी होगी यह कीमत
दोस्तों राजगीर ग्लास ब्रिज भारत का दूसरा ग्लास ब्रिज है। अगर हम पहले ग्लास ब्रिज की बात करें तो, कुछ साल पहले इसे आसाम में एक ऊंचे पहाड़ को जोड़ कर बनाया गया था। जिसके बढ़ते हुए टूरिस्ट के चलते बिहार सरकार ने भी अब यह ब्रिज तैयार कर लिया है।
बिहार का पहला ग्लास ब्रिज राजगीर में बन कर तैयार #patna #rajgir #nalanda #bihar #patnanews #बिहार #पटना pic.twitter.com/kK7pepigKW
— Patna News (@patnanewslive) December 15, 2020
अगर आप इस पर घूमना चाहते हैं, तो एंट्री फीस 50 RS देनी होगी। जिससे आप ब्रिज को निहार सकते हैं। लेकिन यदि आप इस पर वॉक करना चाहते हैं, तो 150 RS अलग से पे करना पड़ेगा। कुल मिलाकर 200 RS की टिकट पर हम स्काईवॉक का आनंद ले सकते हैं।



