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Jhunjhunu: ताँबा एक महत्वपूर्ण धातु मानी जाती है। सबसे पहले तांबे धातु का ही उपयोग मानव जाति ने किया था। राजस्थान का खेतड़ी, मध्यप्रदेश का मलाजखण्ड तांबा उत्पादन में अग्रणी माने जाते है।
राजस्थान (Rajasthan) के झुंझनु (Jhunjhunu) जिले की अगर बात करे तो यह तांबा उत्पादन में सबसे पहले स्थान पर है। इस स्थान से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में तांबा (Copper) को खोदा जाता है। एक समय ऐसा था जब राजस्थान के खेतड़ी (Khetri) ने भारत को तांबे से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया था।
भूमिगत रेल की पटरियो में मिला विशाल तांबा भंडार
अभी वर्तमान समय की बात करे तो लगभग 370 मीटर के नीचे गहराई में तांबे का खनन कार्य इस जगह पर चल रहा है। जिस जगह झुंझनू मे तांबे का खनन का कार्य चल रहा है वहा पर पूरे जगह में भूमिगत रेल की पटरिया है।
केसीसी की बात करे तो अब इसने माइनिंग तथा कंस्ट्रक्शन के प्लांट इन सब को छोड़कर अन्य जगहो में प्लांट को स्थानान्तरित कर दिया है। अब इस जगह केवल कच्चा माल निकाला जाता है। कच्चा माल निकालने के बाद में इसे ट्रको में भरकर विभिन्न स्थानो में स्नान्तरित करते है।
जाने तांबे के इतिहास के बारे में
अगर तांबे की माइनिंग के इतिहास की बात करे तो सन् 1975 के पहले अन्य देश जैसे की चीन, रूस से भारत तांबे को मंगाया करता था। उस समय खेतड़ीनगर पर तांबे का स्मेल्सर पलांट स्थापित किया गया था। इस स्थान पर हर महीने औसतन 3.5 हजार टन का शु्द्ध सिल्लियां तांबे की तैयार कि जाती थी और यही सिलसिला 2008 तक चला।
फिर धीरे धीरे तांबे के क्षेत्र मे भारत आत्मनिर्भर होने लगा। 1960 के पहले से खेतड़ी में तांबे की खोज की जा रही थी। खेतड़ी की यह खान जूलॉजिकल सर्वे के अंतर्गत था। जब भारत में एचसीएल यानि की हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड की स्थापना हुई तो यह एचसीएल के अंडर में आ गई।
खेतड़ी कॉपर कॉम्पलेक्स (Khetri Copper Complex) के नाम से एचसीएल की उस समय एक यूनिट स्थापित हुई। इस यूनिट में 1975 से तांबे का प्रॉडक्शन शुरू हुआ। उस समय भारत की प्रधानमंत्री मिस इंदिरा गॉंधी जी थी।
खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स नए सिरे से शुरू करें…।#SaveKhetriCopperComplex pic.twitter.com/fPWh0RJLE5
— Sunil Bishnoi (@SunilBishnoi729) June 21, 2020
इस प्लांट (Copper Plant) को भारत देश को इंदिरा जी ने समर्पित किया। उसी समय में 3.5 हजार टन का शुद्ध तांबा उत्पादित इस यूनिट से किया जाने लगा। उस समय लगभग 11000 कर्मचारी यहा पर कार्यरत थे।
भारत मे बहुत सी जगह है तांबे के भंडार
भारत मे तांबे के भंडार की बात की जाये तो सिर्फ खेतड़ी ही नहीं अन्य क्षेत्रो मे भी तांबे के भंडार मोजूद है। जेसे कालिहान, बनवास, चांदमारी, अकवाली, पचेरी, सिंघाना, बासरी, खेतड़ीनगर, खरखड़ा, श्यामपुर, जसराजपुर, भादन इश्कपूरा, भिटेरा, अकवाली, खेतड़ी, मुदरापुर यह सभी क्षेत्र भी तांबे के भंडार वाले क्षेत्र है।
इन जगहो को लेकर एक्सपर्ट का मानना है कि अगले 100 साल तक इस जगह में तांबे के भंडार मौजूद रहेंगे। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर इन जगहो पर नई तकनीक से प्लांट लगाए तथा खुदाई करे, तो यह पृथ्वी दोबारा से तांबे के भंडार के रूप में भर सकती है। अभी की बात करे तो केवल बनवास, कोलिहान इन जगहो पर तांबे का खनन किया जा रहा है।
जाने तांबे की प्रतिशतता किस जगह पर कितनी
तांबे के मौजूदा प्रतिशतता की बात करे, तो सबसे जयादा तांबा अभी बनवास में जोकि 1.69 फीसदी है। वही दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा तांबा कोलिहान क्षेत्र में मौजूद है, जोकि 1.35 फीसदी है।
वही चांदमारी मं 1.03 फीसदी तथा खेतड़ी में 1.13 फीसदी तांबा मौजूद है। तांबे की खोज की बात करे तो इसकी लगभग 3000 वर्ष पहले ही खोज हो चुकी थी। लेकिन इसकी आधिकारिक खोज 1960 में हुई। वही तांबे का प्रोडक्शन 1975 से स्टार्ट हुआ है।



