सचिन पायलट मामले पर अदिति सिंह आई सामने और कह दी बड़े पते की बात, कांग्रेस में दरार

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Image Credits: Social Media

Delhi: कांग्रेस नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने राजस्थान की राजनैतिक में भूचाल ला रखा है और अभी भी भाजपा में नहीं आये है। कल अपनी चुप्‍पी तोड़ते हुए उन्होंने ट्वीट किया था की “सच को परेशान किया जा सकता, लेकिन पराजित नहीं”। यह साफ़ सन्देश है की वे कुछ बड़ा करने का इरादा रखे बैठे है। राहुल गांधी के करीबी रहे और कांग्रेस पार्टी की युवा ब्रिगेड के सबसे प्रभावी नेता में से एक सचिन पायलट को राजस्थान के उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया है।

राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पद से भी उनकी छुट्टी करते हुए कांग्रेस ने उन्हें बैठाते हुए, उन्हें दरकिनार करने को तैयार है। आखिरी वक्त तक पायलट को मनाने की कोशिश में जुटी कांग्रेस पार्टी ने अपना सख्त फैसला ले लिया था। असल में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सचिन पायलट ने कांग्रेस पार्टी नेताओं के सामने अपनी तीन मांगें रखी थीं, जिन्हें माना नहीं जा सकता था। इसमें से पहली मांग यह थी कि चुनाव से एक साल पहले, 2022 में उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाए। परन्तु पार्टी नहीं मानी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दूसरी मांग यह थी कि पायलट के साथ बगावत करने वाले मंत्रियों और विधायकों को उचित स्थान दिया जाए। इसका मतलब यह नहीं कि सभी को मंत्री बनाया जाए, लेकिन उन्हें अन्न पद और स्थान दिए जाये। तीसरी मांग रखी गई थी कि कांग्रेस महासचिव अविनाश पांडे के राजस्थान का प्रभार वापस ले लिया जाए। पायलट मानते हैं कि पांडे का झुकाव मुख्ममंत्री अशोक गहलोत की तरफ था और स्थिति तभी सामान्य होगी जब किसी अन्य व्यक्ति को लाया जाए।

राजस्थान में डिप्टी सीएम पद से सचिन पायलट को खिसकाएँ जाने के बाद रायबरेली से विधायक अदिति सिंह ने भी अपनी बात राखी है। मीडिया से बातचीत में अदिति सिंह ने बताया कि उनका एक्सामपल सभी के सामने है। उन्हें उनकी शादी के अगले दिन ही नोटिस दे दिया गया था। अदिति सिंह ने कहा की ‘मेरा जुर्म केवल इतना था कि मैंने सदन में अपनी बात रखी थी।’ इतने में ही उन पर पार्टी ने कार्यवाही कर दी।

अदिति सिंह ने मीडिया चैनल को बताया की वे दूसरों के मामलों में तो कुछ नहीं बोल सकती है, परन्तु उनके स्वयं के मामले में जो कुछ हुआ है, वो सभी जानते है। उनके मुताबिक़, उनकी एक ही गलती थी कि 2 अक्टूबर को हाउस में जाकर वो अपनी बात रख दी। उसके बाद कांग्रेस ने अदिति को नोटिस थमा दिया था।

अदिति सिंह ने बताया की वे उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य है और उनकी ड्यूटी है कि वे अपनी बात रखे। उन्होंने कई मामलों को लेकर शिकायत की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आपको बता दे की कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह और राकेश सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की याचिका को विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने तथ्यों के अभाव में उस याचिका खारिज कर दिया। पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते अदिति सिंह की सदस्यता रद्द करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने याचिका दाखिल की थी।

इससे पहले अदिति ने कांग्रेस पार्टी को भी आड़े हांथो लिया था। आपको बता दे की कांग्रेस MLA अदिति सिंह ने कुछ वक़्त पहले अपने ऑफिसियल ट्विटर अकाउंट से कांग्रेस का नाम अलग कर दिया था। उन्होंने अपनी ट्विटर ID से कांग्रेस पार्टी हटाते ही ब्लूटिक भी हटा दिया था। अदिति ने अब अपना ट्विटर हैंडल AditiSinghRBL रख लिया।

अदिति सिंह ने अपनी ID से कांग्रेस के अलावा राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी की फोटो भी निकाल दी। अदिति के इस कदम के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि अब कांग्रेस पार्टी से जल्द ही चलती बनेंगी। उनके भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर चलने की पूरी संभावना बनी थी।

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