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Ranchi: 8 साल की बच्ची के लिए एक शख्स किसी भगवान से कम नहीं हैं। जमशेदपुर की 8 साल की तुलसी ने यह साबित कर दिया मन में अगर किसी चीज को लेकर शिद्दत हो तो वो देर से ही सही लेकिन पूरी जरूर होती है। लॉकडाउन के दौरान जमशेदपुर में आम बेच रही एक बच्ची की सहयता करने के लिए एक शख्स ने उससे 12 आम 1 लाख बीस हजार रुपये के खरीदे हैं।
इन पैसों के ना होने कारण तुलसी को बहुत मुसीबत उठाना पड़ रही थी। उसको पढ़ने का जुनून था। लेकिन पैसे ने उसे लाचार कर दिया था। तुलसी को पढ़ाई करने के लिए एक फोन चाहिए था। जिससे वह ऑनलाइन पढ़ाई कर सके। बच्ची ने बताया था कि आपदा के दौरान उसका स्कूल बंद हो गया था और अब केवल ऑलाइन ही पढ़ाई चल रही है, लेकिन उसके पास फोन न होने के कारण वह पढ़ाई नहीं कर पा रही है।
तुलसी रविवार को लॉकडाउन के दौरान किननं स्टेडियम के पास आम बेच रही थी। तभी तुलसी से मीडिया के संवाददाता ने सवाल किया कि शहर में लॉकडाउन है ऐसे में वो बाहर सड़क पर ऐसे आम क्यों बेच रही है। इस पर तुलसी ने जबाव दिया कि उसे आगे की पढ़ाई करनी है और पेसे नहीं है, पढ़ाई करने के लिए मोबाइल खरीदना है जिससे पढ़ सकें।
मन में अगर किसी चीज को लेकर जुनून हो तो वो देर से ही सही लेकिन पूरी जरूर होती है। इसी बात को लेकर तुलसी निकल पड़ी। ऐसा ही कुछ जमशेदपुर Jamshedpur Jharkhand की 8 साल की तुलसी के साथ भी हुआ है। तुलसी ने कहा कि पहले मोबाइल की जरूरत नहीं होती थी कि क्योंकि स्कूल जाते थे।
टीचर पढ़ा देते थे, लेकिन आपदा के चलते स्कूल भी बंद है। सारी पढ़ाई मोबाइल पर ही हो रही है। इसलिए मोबाइल की बहुत आवश्यकता है। तुलसी के लिए भगवान के रूप में आए अमेया हेटे और उनके पिता नरेंद्र हेटे ने मासूमियत से 10 हजार रुपए का एक आम खरीद लिया।
उन्होंने बच्ची से 12 आम खरीदे। बदले में उन्हें 1.20 लाख रुपये दिए गए। इतना ही नहीं तुलसी को एक मोबाइल फोन और दो साल का इंटरनेट भी फ्री मिला। ताकि वह अपनी ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर सकें और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। नरेंद्र हेटे और उनके बेटे अमेया हेटे तुलसी की हेल्प करके बहुत किस्मत वाले समझ रहे हैं।
अमेया हेटे और नरेंद्र हेटे द्वारा बेटी तुलसी की हेल्प करने से उसके पिता बेहद प्रश्न हैं। तुलसी के पिता श्रीमल कुमार का कहना है कि इस बुरे समय में नरेंद्र उनके लिए किसी भगवान से कम नही। अब उनकी बच्ची आगे की पढ़ाई जारी कर सकेगी। इस खुशी के पल पर तुलसी की मां पद्मिनी देवी ने नरेंद्र हेटे का धन्यवाद अदा किया। वहीं अब इससे तुलसी बेहद उत्साहित है।
उसका कहना है कि अब उन्हें आम नहीं बेचने पड़ेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके आम इतने मीठे होंगे कि उन्हें नहीं पता था कि उनकी किस्मत ही पलट जाएगी। तुलसी कहती कि वो बंगले के बगीचे से रोजाना पके आम तोड़कर लाती और फिर उसे सड़क पर रखकर बेचने का प्रयास करती।
पढ़ाई के लिए यह जुनून देखकर किसी ने तुलसी का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। देखते ही देखते बच्ची की यह कहानी सुर्खियों में छा गई। पढ़ाई के लिए आम बेचने मजबूरी थी। जब तुलसी की कहानी मुंबई के रहने वाले वैल्युएबल एडुटेंमेंट कंपनी के वाइस चेयरमैन अमेया हेते तक भी पहुंची। जिसके बाद वे हेल्प के लिए आगे आए और बेटी के 12 आम एक लाख 20 हजार रुपये में खरीदे।
तुलसी के लिए फरिश्ता बनकर आए अमेया हेटे ने मासूम से एक आम की कीमत 10 हजार रुपए अदा की। उन्होंने बच्ची से 12 आम खरीदे। जिसके बदले उसे 1.20 लाख रुपये देकर उसकी किस्मत ही पलट दी। इतना ही नहीं तुलसी को एक मोबाइल फोन और दो साल का इंटरनेट भी फ्री करवा कर दिया। जिससे उसकी पढ़ाई में कोई रुकावट ना आये।



