खुद किया चपरासी का काम और अपने बेटों को बनाया IAS, डॉक्टर और इंजिनियर

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sumitra devi story
Her sons became IAS, doctor and engineer, proud mother now retires as peon. Here's An Inspiring Story Of A Cleaner Sumitra Devi Who Made Her Sons Top Officers. Peon Celebrated her Retirement Day in the Presence of her IAS, Doctor and Engineer Sons.

File Image

Delhi: वैसे तो देश में लोग अपने रिटायरमेंट के दिन को बहुत शान से मनाते है और इंजॉय करते है। परन्तु झारखंड में रजरप्पा के सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड टाउनशिप में चपरासी के पद पर काम करने वाली 60 वर्षीय सुमित्रा देवी का रिटायरमेंट समारोह कुछ अलग ही बन गया था।

सुमित्रा की विदाई में उनके सहकर्मी और टाउनशिप के सभी निवासियों के साथ ही साथ, उनके तीनों बेटे भी मौजूद थे। उनके बेटे आज बड़े पदों पर कार्यरत हैं। जिसमे से एक बेटा जिला कलेक्टर है, तो दूसरा बेटा डॉक्टर और तीसरा बेटा रेलवे में इंजिनियर है।

आपको बता दे की रामगढ़ जिले के रजरप्पा टाउनशिप में बीते 30 सालों से झाड़ू लगाने वाली सुमित्रा देवी की आज सभी तारीफ करते है। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें बधाई देते हैं। कारण है, उनका रिटायरमेंट और उस दिन विदाई समारोह में उनके बेटों का मौजूद होना।

ज़रा आप सोचिये की जब रिटायरमेंट का कार्यक्रम शुरू हुआ, वहां तीन बड़े अफसर पहुंचे। एक अफसर नीली बत्ती लगी गाड़ी में पहुंचे, तो दो अफसर अलग-अलग बड़ी-बड़ी गाड़ियों में आ गए। जिनमे एक बिहार के सिवान जिले के कलक्टर महेन्द्र कुमार, दूसरे रेलवे के चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र कुमार और तीसरे मेडिकल अफसर धीरेन्द्र कुमार रहे।

सभी को हैरानी हुई की ये तीनों अफसर सुमित्रा देवी के बेटे (Sumitra Devi Sons) है। जिन्हें उन्होंने बड़ी मेहनत से पाला और उन्हें बड़ा अधिकारी बनाया। जब तीनों बेटे वहां पहुंचे, तो सुमित्रा देवी की आंखें भी नम हो गई। उन्होंने अपने तीनों बेटों का वहां मौजूद अपने अधिकारियों से परिचय कराया, तो सबके सब दंग रह गए। सुमित्रा देवी के दूसरे सहयोगी सफाईकर्मियों को उन पर गर्व हुआ।

सुमित्रा देवी के बड़े बेटे वीरेंद्र कुमार रेलवे में इंजीनियर, धीरेंद्र कुमार डॉक्टर, और सबसे छोटे बेटे महेंद्र कुमार सीवान के जिलाधिकारी पद पर नियुक्त है। यह सुमित्रा देवी के कड़े परिश्रम का ही फल है कि आज उनके बेटे इस मुकाम पर हैं। सभी बेटे आज आला पद पर हैं, लेकिन उनकी मां सुमित्रा ने अपनी नौकरी नहीं छोड़ी।

उनके लिए यह नौकरी बहुत अहम् रही थी, क्योंकि इसकी बदौलत ही उनका घर चला और वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने में सफल रहीं। यह इस माँ के लिए गर्व का क्षण था, जिसने जीवन की हर एक विपत्ति और कठिनाई का सामना करते हुए अपने बच्चों पालन-पोषण किया। वीरेन्द्र कुमार एक रेलवे इंजिनियर है, धीरेन्द्र कुमार एक डॉक्टर हैं और महेंद्र कुमार बिहार में सिवान के जिला कलेक्टर हैं।

अपने बेटों को अच्छी नौकरी मिलने के बाद भी सुमित्रा देवी ने सीसीएल में ग्रुप चार की यह नौकरी नहीं छोड़ी। इस स्वावलंबी महिला ने 30 साल पहले सीसीएल टाउनशिप की सड़कों की साफ़-सफाई से शुरुआत की थी और वे अंत तक इस काम को करते हुए गर्व के साथ रिटायर होना चाहती थीं। एक रिपोर्ट के अनुसार गर्व से भरी इस माँ ने अपने बेटों को वरिष्ठ अधिकारियों से मिलवाते हुए कहा, साहब, 30 साल तक मैंने इस कॉलोनी की सड़कों की सफाई की है, पर आज मेरे बच्चे आपकी तरह साहब है।

बता दे की सुमित्रा के बच्चों ने इस समय पर अपनी माँ के बारे में बातें की और वहां मौजूद लोगों के साथ बहुत चर्चा की। सुमित्रा देवी के बेटों के लोगो से कहा की जीवन में कोई भी काम मुश्किल नहीं है। इमानदारी से की हुई कड़ी मेहनत से सब संभव हो जाता है। मेरी माँ और हमने अपने जीवन में मुश्किल समय देखा है पर फिर भी उन्होंने हमें कभी टूटने या निराश नहीं होने दिया। मुझे गर्व है कि हम सब उनकी कड़ी मेहनत और उम्मीदों पर खरे उतर पाए हैं।

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