शख्स ने 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता, आराम करते समय आया दिल का दौरा पड़ा, आगे जानें

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Heart Attack During Running
Aware About Running and Your Heart. Heart Attack While Running in India. A case of Heart Attack after running game.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रयोग की गई है

भारत मे युवा से लेकर बुजुर्गो में भी स्वर्ण पदक को लेकर होड़ मची रहती है। सभी अपनी प्रतिभा को सामने लाना चाहते है अब चाहे युवा हो या बुजुर्ग।
टेलेंट तो सभी मे होता है, टेलेंट की की उम्र नही होती है। अपनी प्रतिभा को दिखाने के लिए लोग क्या कुछ नही कर जाते है। बात हो स्वर्ण पदक की तब तो युवा से लेकर बुजुर्ग सभी आगे आ जाते है।

ऐसा ही कुछ पंजाब में देखने को मिला जंहा 78 उम्र के एथलीट बख्शीश सिंह ने दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। दौड़ 1500 मीटर की थी। पंजाब मास्टर एथलेटिक एसोसिएशन द्वारा बुजुर्गों के लिए करवाई गई एथलेटिक मीट, जिसमे उन्होंने भाग लिया।

बख्शीश सिंह ने 1500 मीटर में प्रथम स्थान पा लिया

दौड़ के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा। होशियारपुर के जलोवाल के निवासी बख्शीश सिंह ने 1500 मीटर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके साथ एक और दौड़ में हिस्सा लेकर जीत हासिल की यह दौड़ 800 मीटर की थी, इसमे उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया था।

1500 मीटर की दौड़ तो उन्होंने जीत ली इस खुशी में वो थोड़ी देर रेस्ट किये उसी दौरान उनको दिल का दौरा पड़ गया। ये देख वहा पर उपस्थित लोग में हलचल मच गई। वहा मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल सिविल हॉस्पिटल संगरूर पहुंचाया, जब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत बता दिया था।

कुछ दिन पहले ही इस प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया था। लोगो से मिली जानकारी के मुताबिक महिंदर सिंह विर्क ने बताया कि 1500 मीटर दौड़ में बख्शीश ने गोल्ड मेडल अपने दर्ज किया था। दौड़ खत्म होने के बाद वे बहुत उत्साहित थे। उन्होंने बख्शीश सिंह को बधाई दी और रेस्ट करने को कहा। रेस्ट होने के लिए जब वह अपने कपड़े पहनने गए तो वह अपने कपड़े भी नहीं पहन पाय और वहीं पर नीचे गिर गए।

जानकारी के मुताबिक मृत्यु से पहले उन्होंने बताया कि दौड़ना मुझे बहुत पसंद है। साथियों से कहते थे कि जब भी मृत्यु आए, तो मैदान में ही खिलाड़ी की तरह वीरगति को प्राप्त हूँ। बख्शीश के साथी एसपी शर्मा ने कहा कि बख्शीश होशियारपुर टीम का नेतृत्व करते थे। फौज से रिटायर होने के बाद वह शिक्षक भी रहे। दौड़न बहुत पसंद था। 1982 में उन्होंने खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने Start कर दिया था। कई क्षेत्र में खेले।

वह 200 से भी अधिक पदक अपने नाम कर चुके थे। बख्शीश अधिकतर 800 मीटर, 1500 मीटर और 5 हजार मीटर रेस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते थे। हमेशा अपने साथियों से कहा करते थे कि हॉस्पिटल में इंजेक्शन लगवाकर अंत होने से बेहतर है कि मेहनत करते हुए मैदान में वीरगति को प्राप्त हो जाये ये मेरी सबसे बड़ी खुशनसीबी होगी।

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