
Bilaspur: कभी नरम तो कभी सक्त अंदाज में बच्चों को अनुशासन व सलीके का पाठ पढ़ाने वाले पिता ही नई पीढ़ी के ख्वाहिशों को पंख फैलाने का आसमान देते हैं। इसी खुले आसमान में आज बेटे हो या बेटियां निःसंकोच उड़ान भर रहे हैं। इस बदलाव के समय में पिता एक मजबूत ढाल बन रहे हैं।
जी हां, पिता हम सभी को योग्य बनाते हैं। जीवन का सही राह दिखाते हैं। हमें सुखी रखने के लिए पिता हरेक प्रयत्न करते हैं। बचपन में अनुशासनप्रियता व सख्ती के कारण पिता की कई बात हमें अच्छी नहीं लगती, लेकिन वक़्त के साथ हमें पिता की डांट की अहमियत का पता चलता है।
जीवन के मुश्किल रास्तो पर चलने की तैयारी में पिता की बातें काफी अहमियत रखती है। एक शोध के अनुसार मां बच्चों की पहली पाठशाला है, तो पिता पहला आदर्श। मतलब साफ है एक पिता हजारों अध्यापकों से ज्यादा प्रभावशाली होता है।
मां तो हर बच्चे के जिंदगी की एकमात्र धुरी है, उसका दिल अपने बच्चे के लिए ही धड़कता है। परन्तु दिल भी तो बिना रक्त के प्रवाह के कार्य नहीं कर सकता, तो उसी दिल को रक्त पहुचाने का काम करती है पिता रुपी रक्त धमनी।
पिता हमारे जीवन का वो महान व्यक्ति है, जो ख्वाहिश पूरे करने की कोशिश और फिक्र में अपने खुद के ख्वाहिशों की जमीन बंजर ही छोड़ देता है। पिता के कारण ही बच्चों के सभी ख्वाब और ख्वाहिशें पूर्ण होती हैं।
सरकार विकास के लिये ग़रीबों के घर तो तोड़ देती है, परंतु उन्हें फिरसे बसाने के बारे में भूल जाती है। कुछ लोगों को मुआवज़े राशि का कुछ हिस्सा मिल जाता है, परंतु क्या घर बनाना इतना सरल होता है, देश के लगभग हर शहर में बेघर व्यक्ती घूमते दिख जाते हैं। कुछ के पास कार्य तो है, परंतु सिर पर छत नहीं तो वो दिनभर कमाने-खाने के पश्चात ही फुटपाथ को ही अपना निवास स्थान बना लेते हैं।
हिंदी समाचार अखबार दैनिक भास्कर ने दिल को उदास करने वाली एक तस्वीर साँझ की है। ये एक तस्वीर ही देशभर के कई लोगों की कहानी बता रही है। असल मे 38 वर्षीय गणेश साहू (Ganesh Ram Sahu) एक पिता है, और रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालता है।
गणेश (Rickshaw Driver Ganesh Sahu) के दो बच्चे हैं, 9 वर्श की बेटी गंगा और 7 वर्श का बेटा अरुण। गंगा और अरुण की मां उन्हें गणेश के पास अकेला छोड़ कर चली गई। अतिक्रमण में गणेश की झोपड़ी नष्ट हो गई। विवशता में उसे रिक्शे को ही अपना निवास स्थान बनाना पड़ा।
बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने हेतु गणेश सड़के किनारे चादर बिछाकर ही उन्हें शिक्षित करता है। गणेश अगर एक बार भी रिक्शा न चलाए, तो बच्चों को 1 वक़्त का भोजन तक नसीब ना होगा और गणेश उन्हें शिक्षित भी करना चाहता है। माता और पिता दोनों की ही ज़िम्मेदारी उठा रहा है, गणेश।
.@BilaspurDist के झोपड़ापारा में रहने वाले गणेश साहू की झोपड़ी टूट चुकी थी और वो रिक्शा के नीचे अपने दो बच्चों के साथ रहने को मजबूर था। सुबह यह खबर अखबार में छपी।
इसकी जानकारी जब मुख्यमंत्री को हुई तो उन्होंने तुरंत कलेक्टर को बच्चों की शिक्षा और घर दिलाने निर्देशित किया। pic.twitter.com/7ZeujdVzvV
— Bhupesh_28 Kashyap (@Bhupesh28Vicky) September 23, 2021
CG के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दया द्रष्टि की वजह से इन बच्चों को भविष्य सुरक्षित हो गया है। इसके अलावा इन्हें स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी विद्यालय में दाखिला भी मिल गया है। परिवार को रहने के लिए छत भी मुहैया करवाई गई है। सीएम को खबरों के माध्यम से 8 वर्ष की बालिका कुमारी गंगा साहू और 6 वर्ष के बालक अरूण साहू के बारे में पता चला था।
इसके बाद सीएम बघेल ने फ़ौरन बिलासपुर (Chhattisgarh’s Bilaspur) कलेक्टर डॉ सारांश मित्तर को निर्देश दिए कि इन बच्चों के लिए तत्काल शिक्षा और इनके परिवार के लिए आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। सीएम के निर्देश के बाद कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को इस संबंध में निर्देश दिया।
प्रिय,
सम्माननीय श्री @SonuSood जी कृपया छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के गणेश साहू जी का मदद करें ताकि उनके बच्चों को शिक्षा मिल सकें।…. मानवता
प्रतीक्षारत…. यशवंत निर्मलकर ( रायपुर ) pic.twitter.com/NjEy1K9hKT— Yashwant Nirmalkar (@YNirmalkar96) September 23, 2021
फिर स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल लिंगियाडीह में बालिका गंगा को कक्षा दूसरी में और बालक अरूण साहू को कक्षा पहली में गुरुवार को ही प्रवेश दिला दिया गया है। दोनों बच्चों को स्कूल ड्रेस भी प्रशासन की तरफ से मुहैया करवाए गए हैं। बिलासपुर कलेक्टर ने उनको कार्यालय बुलाकर गणवेश, पाठ्य पुस्तक और अध्ययन के लिए अन्य जरूरी सामान दिया।



