दो बहनों ने सुकून की तलाश में नौकरी छोड़ लिया गाँव का रुख, जैविक खेती से बदल दी किसानों की जिंदगी

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Kanika and Kushika Sharma
Uttrakhand Sister duo behind this Organic Farmstay. Two sisters Kanika and Kushika Sharma set up an organic resort to help the local community.

Photo Credits: Social Media

Mukteshwar, Uttarakhand: आज के नौजवान जहाँ एक ओर महानगरों माहौल से आकर्षित हो रहे हैं और शहरों में निवास करने की इच्छा में अपनी जन्मभूमि अपने गाँवों से अलग हो रहे हैं। अक्सर हम पढ़ते हैं कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से निरंतर पलायन हो रहा है, गाँवों में सिर्फ वृद्धि ही बचे रह गए हैं।

ऎसे में अगर हम आपको कहे कि आज के समय में भी कुछ नौजवान हैं, जो शहरों की रौनक, शानदार नौकरी और सारी सुख सुविधाओं को छोड़कर अपने ग्राम की ओर चल रहे हैं, अपने गाँवों को तरक्की के रास्ते पर अग्रसर करने के लिए कार्य कर रहे हैं, तो आपको विश्वास नहीं होगा।

यह सत्य है कि उत्तराखंड (Uttrakhand) की दो बेटियाँ कुशिका शर्मा और कनिका शर्मा (Sisters Kanika and Kushika Sharma) ने अपनी शानदार, मोटे वेतन की नौकरी को नज़रअंदाज़ कर के अपने गाँव का रुख कर लिया। दिल्ली जैसे महानगर की आराम दायक सुख सुविधाएं से भरपुर सिर्फ इसलिए त्याग दी, ताकि पहाड़ों को फिर से जीवन दे सकें।

जी हाँ, कुशिका और कनिका शहर में निवास कर के अपना जीवन बड़े सरलता से गुजार रही थीं, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि रोज की भागदौड़ में वो खुशी नहीं थी, जो पहाड़ की वादियों में थी। दोनों बहनों ने निर्णय लिया कि वो सब कुछ छोड़कर उत्तराखंड में बसे अपने गाँव मुक्तेश्वर में जाकर गाँव की तरक्की में अपना सहयोग देंगी।

परिवार का समर्थन मिला और उन्होंने गाँव (Village) जाकर निर्णय लिया जैविक खेती के प्रति जागरूकता लाने का। कुशिका और कनिका ने अपनी विद्यालय की शिक्षा उत्तराखंड के नैनीताल और रानीखेत से पूर्ण की। स्कूली शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात कुशिका ने MBA करने का फैसला लिया।

एम.बी.ए. (MBA) करने के बाद कुशिका ने तकरीबन चार वर्षों तक गुड़गांव की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में बतौर सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के तौर में कार्य किया। तो वहीं दूसरी ओर उनकी बहन कनिका ने दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से अच्छे अंको के साथ मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की जिसके बाद कनिका को हैदराबाद में उद्यमिता में छात्रवृत्ति मिल गई।

अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में दोनों बहनों को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ कार्य करने का मोका मिला। लेकिन शिक्षा और नौकरी के सिलसिले में दोनों बहनों को नैनीताल में निवास कर रहे अपने परिवार से दूर रहना पड़ता था, परंतु जब भी उन्हें अवसर मिलता, तो वे दोनों अपने परिवार से मिलने के लिये नैनीताल पहुंच जाती।

केनफ़ोलिओज़ से खास बातचीत में कुशिका (Kushika Sharma) ने बताया कि हमारे पास तकरीबन सब कुछ था, परंतु जीवन में सुकून की कमी थी, वो सुकून हमें पहाड़ों में मिलता था। तब मैंने और मेरी बहन ने यह तय किया और अपनी नौकरी छोड़कर कुदरत की गोद में ही कुछ करने का सोचा। इसके लिए हमने फैसला लिया कि हम स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर जैविक खेती (Organic Farming) करेंगे।

इस प्रकार दोनों बहनों ने अपने ग्राम के शांतिपूर्ण और स्वच्छ माहौल में रहते हुए जैविक खेती करने का फैसला किया और अपनी नौकरी को छोड़कर अपने परिवार के साथ अपने गांव मुक्तेश्वर आ गयी। प्रारंभ में उन्हें कई प्रकार की समस्या का भी सामना करना, क्योंकि वहाँ के स्थानीय निवासियों के लिए उनका विचार बिलकुल नया था।

जिस पर उन्हें विश्वास करने में कुछ वक़्त लगना स्वभाविक था इस दौरान इन दोनों ने देखा कि गाँव की अर्थव्यवस्था मुख्य तौर से खेती पर निर्भर है, लेकिन स्थानीय लोगों में कृषि उत्पादन बढ़ाने को लेकर जानकारी का अभाव है और ना वहाँ के किसानों को जैविक खेती के विषय में कुछ ज्ञान है और साथ ही उनका मार्गदर्शन करने वाला भी कोई नहीं है।

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