इस युवा ने इलेक्ट्रिक से चलने वाली बाइक बनाई, जो डेढ़ घंटे चार्ज करने पर 100 KM चलेगी

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Vikas Kumar made E-bike
Uttarakhand B Tech guy Vikas Kumar made E-bike and self motor controller. Innovator Vikas kumar from Khatima Electric bike run 100 Km.

Photo Credits: Twitter

Dehradun: आज हम प्राचीन समय को पार करते हुए एक मॉर्डन ज़माने में आ गए हैं और यहाँ दिनों दिन कुछ ना कुछ अविष्कार होते रहते है। जैसे जैसे इंसान को जरुरत पढ़ती हैं, कोई ना कोई अपनी सुविधानुसार कुछ अविष्कार या इनोवेशन कर लेता हैं। अभी भी बदलते ज़माने और जरुरत के हिसाब से लोग अपना अपना जुगाड़ लगा रहे हैं।

अभी के समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतें ज्यादा बढ़ रही हैं। इसलिए लोगों का ध्यान अब ऐसे वाहन बनाने में लगा है, जो कम खर्चे में चल सकें। ऐसे में उत्‍तराखंड (Uttrakhand) के ऊधमसिंहनगर जिले के खटीमा (Khatima) के रहने वाले युवा विकास कुमार (Vikas Kumar) ने एक कमाल की बाइक बनाई है।

मोटर कंट्रोलर खुद असेंबल किया

विकास ने चीन की मशीनों का भरोसा ना करते हुए मोटर कंट्रोलर (Motor Controller) खुद असेंबल किया है। खटीमा के एक सामान्य परिवार और दीप नारायण गुड्डू के 23 वर्षीय बेटे विकास ने देसी कलपुर्जों से ई-बाइक (Electric Bike) बना कर अपनी काबिलियत सिद्ध कर दी। इस बाइक को बनाने में ढाई महीने का समय लगा है।

विकास का दावा है कि देश में जितनी भी ई-बाइक (E-Bike) कंपनियां हैं, सभी में मोटर कंट्रोलर, बैटरी चीन आदि देशों की बनी हुई लगाईं जाती हैं। उन्होंने अपनी ई-बाइक में मोटर कंट्रोलकर खुद असेंबल किया है। ऐसा कारनामा कोई भारतीय कंपनी भी नहीं कर पाई है।

Startup शुरू करने का सपना

आपको बता दें की विकास ने पिथौरागढ़ से बीटेक किया है। पढ़ाई में होशियार रहे और कुछ नया करने की चाहत में स्टार्टअप (Startup) शुरू करने का सपना लिए विकास ने कुछ नया करना चाहा। कुछ नया करने की सोच के साथ विकास ने ढाई महीने पहले ई-बाइक तैयार करने की कसम खा ली। उन्होंने एक हिंदी अख़बार को बताया कि इस ई-बाइक को बनाने में लगभग 70 से 75 हजार रुपए का खर्च आ गया।

विकास का ऐसा दावा है कि 70-75 KG के वज़न वाले व्यक्ति और पीछे एक गैस सिलेंडर भी बांधकर इस बाइक को चलाऐंगे, तो एक बार में चार्ज के बाद यह बाइक 100 KM चल जाएगी। इसकी बैटरी फुल चार्ज होने में 1.30 से 2 घंटे का समय लेती है। इस बाइक को 60 KM प्रति घंटे की स्पीड तक चला सकते हैं।

ई-बाइक के पेटेंट के लिए मदत का भरोसा

विकास का कहना है की अभी उनकी ई-बाइक के पेटेंट पर काम चल रहा है। वे इसे पेटेंट करवाने के लिए नियम फॉलो कर रहे हैं। उसमे तीन से चार लाख खर्च होंगे और अभी इतना पैसा तो उनके पास नहीं है। अतः इस काम में टाइम लग रहा है। अब उन्हें एक व्यक्ति ने खुद मदत करने का प्रस्ताव रखा है।

विकास का कहना है की वे इलेक्ट्रिक-बाइक के बाद E Car पर भी काम करने वाले हैं। हाल ही में 7 जनवरी 2022 को उत्तराखंड स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज फिनाले में विकास कुमार ने विनर्स की टॉप 10 सूची में जगह पाकर अपने माता-पिता का नाम रोशन किया था। उद्योग निदेशालय देहरादून में आयोजित सम्मान समारोह में उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने विनर युवाओं को पुरुस्कार प्रदान किया था।

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