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Dhar: हमारे बड़े बुजुर्ग शुरू से ही हमें नीम के फायदे बताते आये हैं। नीम (Neem) में कई औषधीय गुण (Medicinal properties) पाए जाते हैं। कुछ देशी भारतीय लोग नीम के गर्म पानी से नहाते भी हैं और नीम के पत्ते पीसकर उसे फेसवास के रूप में इस्तेमाल करते हैं। कभी आपने सोचा है की नीम आपको करोड़पति भी बना सकता है।
भारत में नीम से हर साल लगभग 35 लाख टन मींगी (निबौली) होती है, जिससे करीब 7 लाख टन तेल उत्पादित किया जा सकता है। अब भारतीय कंपनियां भी इसके प्रोडक्ट्स पर विचार कर रही हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया है की चीन 14 करोड़ हैक्टेयर में नीम की बागवानी करके नीम के उत्पादों को बनाकर बाजार उतार रहा है।
भारत में अभी ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है। फिर भी कुछ युवा अपने लेवल पर यह काम कर रहे हैं और मोटी रकम भी बना रहे (Smart Earning) हैं। गांवों में मेलियासिए के नीम के पेड़ (Azadirachta indica Tree) अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। लोग इस कीमती प्राकृतिक चीज़ की अहमियत को समझ नहीं पा रहे हैं।

आपको बता दें की नीम के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल मलेरिया, ज्वर, दर्द, सौन्दर्य-प्रसाधन, लुब्रीकेन्ट्स, उर्वरक, साबुन बनाने में किया जा रहा है। इसी सिलसिले में मध्य प्रदेश के युवा (Youth in Madhya Pradesh) ने नीम के प्रोडक्ट के बिजनेस पर ध्यान देकर अच्छी कमाई का जरिया बना लिया है।
अभी के समय में पूरी दुनिया में नीम से बनी दवाइयां और सौंदर्य उत्पादों (Beauty Products) की क्रीम और लोशन बाजार में भारी तादाद में बिक रहे हैं। नीम के बीज (निम्बौली) की कीमत बाजार में हर दिन बढ़ती जा रही है। बड़े दुर्भाग्य की बात है की हमारे देश में नीम के पेड़ काटे जा रहे हैं। सरकारों की तरफ से भी इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नीम अकेला ऐसा वृक्ष है, जिसमें निर्यात की जा सकने वाली कई चीज़े और प्रोडक्ट बनाये जा सकते हैं।

How to Make Money from Neem Oil Extraction.
आपको बता दें की अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैण्ड जैसे देश नीम के लिए अनुसंधान और प्रयोगशालाएं बना कर रिसर्च कर रहे हैं। जबकि उनके पास पर्याप्त मात्रा में नीम और उसके पेड़ भी नहीं है।
भारत में नीम-संपदा काफी मात्रा में होने के बाद भी सही से इसकी रिसर्च और प्रयोग में काम नहीं किया जा रहा है। भारत में नीम से हर साल लगभग 35 लाख टन मींगी (निबौली) उत्पन्न्न होती है। इससे लगभग 7 लाख टन तेल उत्पादित किया जा सकता है।
नीम से कई प्रकार के कीटनाशक भी बनाये जाते हैं। नीम के तेल में जीवाणुरोधी और विषाणुरोधी गुण होते हैं। नीम के उत्पादों का इस्तेमाल सौन्दर्य-प्रसाधन, लुब्रीकेन्ट्स और साबुन बनाने में किया जा रहा है। जानकारी हो की नीम के पेड़ में फूल जनवरी-फरवरी माह में आते हैं और मई-जून माह में फल लगने शुरू हो जाते हैं। नीम के फल (निम्बोली) जुलाई से अगस्त माह में पककर तैयार होते हैं। निम्बोली (Nimboli) का गूदा चिपचिपा और हल्का मीठा होता है।
महाराष्ट्र के पुणे में गांव खलदकर में रहने वाले रमेश खलदकर फॉरेस्ट्री में BSC की बढ़ाई करने के बाद जॉब की खोज में लगे रहे। फिर उन्हें अहसास हुआ की कुछ खुदका ही काम शुरू करना होगा। तीन साल पहले उन्होंने नीम प्रोडक्ट का काम करने का विचार किया। एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर्स से 2 महीने का प्रशिक्षण लिया। नीम केक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का दौरा भी किया।
सब समझने के बाद 48 लाख रुपए की लागत से अपना खुदका व्यवसाय (Own Business) शुरू किया। नीम ऑयल, नीम सीड केक बनाने की यूनिट शुरू करने के बाद लोकल लेबल पर अपनी कंपनी की मार्केटिंग भी की और फिर उनको तीन ऑर्गेनिक कंपनियों से लोकल किसानों के लिए कुछ टन का ऑर्डर हासिल हुआ।
उन्होंने 300 एमटी नीम केक मैन्योर और 500 लीटर नीम ऑयल का उत्पादन किया। यह सब काम के खर्चे निकलकर उन्होंने 22 लाख रुपए का सीधा मुनाफा बनाया। इससे उनको और एनर्जी मिली और नीम से अन्य प्रोडक्ट भी बनाने लगे। आज के समय में उनके पास 21 ऑर्गेनिक प्रोडक्ट हैं।
उनकी कंपनी का साल का टर्नओवर आज 2 करोड़ रुपए हो गया है। अब उन्हें हर माह 1.5 लाख रुपए की कमाई हो रही हैं। अब वह वर्मी कम्पोस्ट और कीटनाशक भी बना रहे हैं। एग्री कंसल्टिंग को पॉइंट करते हुए एग्री सेक्टर की कंपनियों के कंसल्टेंट रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं। इसमें भी उन्हे अच्छी कमाई हो रही है। उन्होंने हाल ही में आरके एग्री बिजनेस कॉरपोरेशन की शुरुआत की है।
ऐसे ही मध्य प्रदेश के धार के गांव गुजरी के रहने वाले अभिषेक गर्ग भी नीम के प्रोडक्ट बनाने की फैक्ट्री लगाकर अच्छा काम कर रहे हैं। कई राज्यों को वह नीम का तेल और खली सप्लाई कर रहे हैं। नीम का तेल (Neem Oil) डेढ़ सौ रुपए लीटर में बिक रहा हैं।
उनकी फैक्ट्री में हर साल लगभग 50 टन नीम का तेल और 700 टन नीम पाउडर तैयार हो रहा है। अभिषेक के इस बिजनेस से कई लोगो को रोजगार भी प्राप्त हुआ है। मध्यप्रदेश के हजारों किसान उनकी फैक्ट्री की निबौलियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस काम से उन्हें लाखों की मोटी कमाई (Good Income) हो रही है।




