इस बेटी ने दिव्यांगता और गरीबी से आगे नहीं मानी हार, अपने पहले ही प्रयास में ही IAS अफसर बनी

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IAS Ummul Kher
Inspiring story of Ummul Kher who from the slums and achieved her dream of becoming an IAS officer. Photo Credits Twitter.

Delhi: आईएएस बनने का सफर इतना आसान नहीं होता। हर पग पर कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। तब जाकर इसमें सफलता हाथ लगती है। हौसले बुलंद हो तो क्‍या कुछ हासिल नहीं किया जा सकता अगर हौसलों में उड़ान हो तो हर समस्‍या छोटी नजर आती है। आईएएस का पद इतना ऊँचा है, कि इसे पाने के बाद जो सम्‍मान मिलता है, उसके आगे सब परेशानियॉं छोटी नजर आती है।

हमने बहुत से यूपीएससी क्रेक वाले उम्‍मीदवारों की स्‍टोरी सुनी है। लेकिन आज की हमारी कहानी उन सभी से हटकर है। आज की हमारी कहानी एक ऐसी लड़की की है, जिनका सारा बचपन गरीबी में बीता। मॉं छोटी उम्र में ही चल बसी, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने कड़े मेहनत से आईएएस बन गई।

उम्‍मुख खैर जिसने बचपन में सिर्फ गरीबी देखी

आज की हमारी कहानी उम्‍मुल खैर की है। उम्‍मुल खैर (IAS Ummul Khair) वह लड़की जिसने अपना बचपन झुग्गियों में रहकर काटा। गरीबी देखी बीमारी की वजह से वह इतनी कमजोर हो गई चलने फिरने के काबिल नही रही। लेकिन आज वह आईएएस अधिकारी (IAS Officer) है। किन परेशाानियों का किया उम्‍मुल ने सामना और किस तरह हासिल की सफलता आइये इस और नजर डालते है।

उम्‍मुल खैर और उनका परिवार दिल्‍ली के निजामुद्दीन में झुग्‍गी झोपडियो में रहा करता था। उनके पिताजी मूँगफली बेचने का कार्य किया करते थे। वह सडको पर ठेला लगाते थे। बचपने में बीमारी के चलते उम्‍मुल की हड्डियां कमजोर हो गई थी। उम्‍मुल को अजैले बोन डिसऑर्डर हो गया था। इतनी परेशानी होने के बाद भी दिक्‍कतों का सामना करते हुए वह अपने लक्ष्‍य को हासिल करने मे कामयाब हो गई।

यूपीएससी में हासिल की 420वी रैंक

2016 की यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) में उम्‍मुल खैर ने 420 वा स्‍थान हासिल किया। उनके परिवार मे प्रारंभ से ही तंगी थी। उनका परिवार झुग्गियों में रहकर वह जैसे तैसा अपना जीवन व्‍यतीत करते थे। 2001 में जब झग्गियों को हटाया गया तो उनका परिवार त्रिलोकपुरी में चला गया। इसी दौरान उम्‍मुख की मॉं का देहांत हो गया। मॉं के देहांत होने के बाद से उम्‍मुख की जिदंगी पूरी तरह बदल गई। उनके पिताजी ने दूसरी शादी कर ली।

सौतेली मॉं की वजह से छोड दिया घर

उम्‍मुख की सौतेली मॉं उम्‍मुख को ज्‍यादा पसंद नहीं करती थी। वह उन्‍हें हमेशा ताने दिया करती थी। चूँकि उम्‍मुख दिव्‍यांग थी। उनकी सौतेली मॉं उन्‍हे पढ़ने से भी मना करती थी। क्‍योंकि उनकी सोच थी कि यह पढ़ लिख कर कुछ नहीं कर पायेगी। सौतेली मॉं की वजह से उम्‍मुल का अपने घर में रहना बहुत ही मुश्‍किल हो गया था। इस वजह से उन्‍होंने अपना घर छोड़़ दिया ओर किराये का मकान लेकर वह बाहर रहने लगी।

कोचिंग पढ़ाकर गुजारा करती थी

किराये से मकान उम्‍मुख ने तो ले लिया। लेकिन यहॉं से उनका सफर बहुत ही कठिन रहा। क्‍योंकि जीवन का गुजारा करने के लिए उन्‍हें पैसों की जरूरत पड़ती थी और वह उनके पास उस समय नहीं थे। इसके लिए उम्‍मुख ने बच्‍चों को कोचिंग पढ़ाना शुरू कर दिया। लेकिन उससे उनकी ज्‍यादा कमाई नहीं हो पाती थी।

इसी बीच उन्‍हें यह जानकारी पता लगी की आईएएस की परीक्षा एक कठिन परीक्षा है। लेकिन इसे पास करने के बाद देश की सबसे बड़े पद की नौकरी मिलती है। उसके बाद उन्‍होंने अपना रूख इस परीक्षा की तैयारी की और कर लिया। उम्‍मुख ने यह सोच लिया था कि वह इस परीक्षा को निकालकर ही रहेंगी। इस परीक्षा को निकालने के बाद ही उनकी सारी समस्‍या का निराकरण होगा।

उम्‍मुख की शुरूआती शिक्षा

उम्‍मुख की शुरूआती पढ़ाई के बारे में बात की जाये तो उनकी प्राथमिक शिक्षा दिव्‍यांग स्‍कूल में हुई है। उसके बाद माध्‍यमिक शिक्षा उन्‍होंने एक ट्रस्‍ट की सहायता से की। आठवी की परीक्षा के दौरान उम्‍मुख ने स्‍कॉलरशिप प्राप्‍त करने के लिए फॉर्म भरा था। जिसमें वह पास हो गई थी और उन्‍हें स्‍कॉलरशिप के दम पर एक प्राइवेट स्‍कूल में दाखिला लिया।

यहां से उम्‍मुख ने 12वी की तक की पढ़ाई पूरी की। 12वी में उम्‍मुख ने 90 फीसदी अंक हासिल किए थे। इसके बाद उम्‍मुख ने स्‍नातक के लिए दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय को चुना। जेएनयू से उम्‍मुख ने ग्रेजुएशन किया। उसके बाद मास्‍टर और फिर एम फिल भी कंपलीट किया।

पहले ही प्रयास में हुई सफल

पढ़ाई के दौरान उम्‍मुख ने यूपीएससी की तैयारी की और तमाम परेशानी का सामना करते हुए वह पूरी ईमानदारी से मेहनत करके इस परीक्षा को निकालने में सफल भी रही। उम्‍मुख उन उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट में शामिल है, जो पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर लेते है।

उम्‍मुख ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। वह यूपीएससी 2016 में 420वा स्‍थान हासिल करने में सफल रही। इसके साथ ही वह आईएएस का पद पाने में भी कामयाब रही। उनकी सफलता बहुत बड़ी कामयाबी है। दिव्‍यांग होकर इस पद तक पहुँचना बहुत बड़ी बात है।

उनकी सफलता उन लोगो के गालों पर कड़ा तमाचा है, जो यह सोचते है कि दिव्‍यांग लोगों की जिंदगी कुछ नहीं होती। वह अपने जीवन में कुछ बड़ा नहीं कर सकते। उम्‍मुख करोडो युवाओं के लिए एक उदाहरण है। उनकी सफलता युवाओं को मॉटीवेट करने के लिए पर्याप्‍त है।

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