
अमेरिकी संसद में प्रथम हिंदू सांसद चयनित हुई तुलसी गबार्ड इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाउडी मोदी इवेंट में अपनी उपस्थिति न दे पाने को लेकर अमेरिकी सांसद तुलसी गबार्ड ने अपनी सफाई दी है। तुलसी ने बताया कि उनके द्वारा प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करने से इंकार कर देने की न्यूज़ गलत है।
वे 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी में लगी हुई हैं, आजकल उसी के प्रचार में Busy हैं। सांसद तुलसी गबार्ड ने वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 37 वर्ष की तुलसी गबार्ड डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति Post की दूसरी महिला दावेदार हैं। अमेरिकियों के बीच भारतीय मूल की बेहद प्रसिद्ध तुलसी हिंदू आवश्य हैं, लेकिन वो भारतीय नहीं है।
सांसद तुलसी अमेरिका के समोआ के कैथोलिक परिवार में जन्मी थीं। उनकी मां कॉकेशियन समुदाय से हैं, जिन्होंने हिंदू धर्म को अपना लिया था। उस समय तुलसी सिर्फ दो वर्ष की थीं, जब वो इधर आकर वश गई थीं। बाद में सांसद तुलसी ने भी हिंदू धर्म को अपना मान लिया। वो अपनी शिक्षा पूरी करके राजनीति में आ गईं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के मध्य सांसद बनी तुलसी गबार्ड को बहुत पसंद किया जाता है। सांसद तुलसी पहली अमेरिकी सांसद हैं, जिन्होंने गीता को हाथ में लेकर अपनी शपथ ली थी। कहा जाता है कि तुलसी भारतीय नहीं हैं, लेकिन उनका पूरा भरोसा हिंदू धर्म को लेकर है।
अमेरिका के 50वें राज्य हवाई से लगातार जीत सुनिश्चित करती आ रही तुलसी गबार्ड वर्ष 2013 से अमेरिका के हवाई राज्य से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट सांसद हैं। वो हवाई से हर बार रिकॉर्ड तोड़ मतो से विजयी होती हैं। राजनीति में कदम रखने से पहले सांसद तुलसी अमेरिकी सेना की तरफ से 12 महीने के लिए इराक में Posting रह चुकी हैं।
तुलसी गबार्ड पहली सांसद हैं। वो भारत के प्रधानमंत्री मोदी की भी बड़ी प्रशंसक रही हैं। वर्ष 2014 में उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ कई फ़ोटो Viral हुई थीं। वो कई मंचों से बिना कोई झिझक उनकी प्रशंसा कर चुकी हैं।
शुद्ध शाकाहारी सांसद तुलसी गबार्ड का परिवार चैतन्य महाप्रभु के आध्यात्मिक अंदोलन गौडिया वैष्णव संप्रदाय को बहुत मानता है। उनके परिवार में उनके भाई-बहन भक्ति, नारायण, वृन्दावन और जय भी हिंदू धर्म का पालन करते हैं। गीता के कर्मयोग पर भरोसा करने वाली सांसद तुलसी गबार्ड भारत के वृंदावन में आना चाहती हैं।



