
Chakradharpur: भारत में हर वर्ष मार्च माह में 10 वी और 12वी कक्षाओं की बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाती है। जिसमे से जिले और राज्य में जो सबसे ज्यादा अंक लाता है उसे सरकार की तरफ से कुछ इनामी राशि प्रदान की जाती है, विद्यार्थियो के मनोबल को बढ़ाने के लिए। हर वर्ष देश में बेटियां ही अव्वल आती है।
देश में वर्षो से चली आ रही कुरीति बेटा और बेटियों में फर्क की आज भी कही कही देखने मिलती है। वैसे तो बेटियों ने मोका नही दिया किसी को बोलने का क्योंकि देश तो देश बेटियां तो देश से बाहर भी अपना नाम बना रही है। कुछ जगहों पर अभी भी नारियों को कमजोर समझते है और उन्हें सिर्फ घर तक ही सीमित रखते है, परंतु बेटियों को सिर्फ एक मौके की जरूरत है। बाकी उड़ान तो वे खुद भी भर सकती है।
आपको बता दूं कि इस वर्ष भी मार्च के महीने में बोर्ड की परीक्षा आयोजित की गई थी और उसके नतीजे हाल ही में घोषित हुए है। जिससे कई राज्य में कई जिलों में बेटियां अच्छे अंको के साथ पास हुई है और अपने राज्य और अपने माता पिता का नाम रोशन किया है।
खास बात यह है की कुछ बेटियों ने अपना जीवन अभाव में बीता कर पढ़ाई की गरीबी भोगी उसके बाद अव्वल आई। आज की इस पोस्ट में हम एक ऐसे पिता की बात करेंगे जिसने नाश्ता और चाय की दुकान से पैसे कमा कर अपनी बेटियो को पढ़ाया और वे बेटीया उनका नाम रोशन कर गई। तो आइए जानते है।
बेटियो की परिस्थितियां
हमारे देश आज भी अपनी सोच की वजह से पिछड़ा हुआ है। कुछ लोग आज भी बेटी को खुद पे बोझ समझते है। वे नही चाहते की उनके घर बेटी का जन्म हो, परंतु दुनिया की नजरो को ऊंचा देख कर वे शांत हो जाते है। परंतु बिटिया के बड़े होने से पहले ही उन्हे शादी करने की जल्दी होने लगती है।
देश के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां बेटी तो लोग चाहते नहीं हैं। परंतु समय बदल रहा है, देश की बेटीया खुद से अपनी पहचान बना रही है। इन सब में उन्हे अब सब का सहयोग भी मिल रहा है। बेटियो को आगे बढ़ता देख लोगो की मानसिकता में भी बदलाव आया है।
अब लड़कियों की भी एक अलग ही पहचान है और लोग उन्हे बोझ नहीं समझते बल्कि अब बेटी भी बेटो की तरह बुढ़ापे का सहारा बन गई है। आपको बता दें कि झारखंड राज्य की दो बेटियों के पिता कहते है। उनकी दोनो बेटीया उनका गुरुर है। उन बेटियो ने गरीबी से लड़ कर खुद अपनी कामयाबी की राह बनाई।
झारखंड राज्य में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के द्वारा परिणाम की घोषणा की गई
इन दिनों देश के हर राज्यों में बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट घोषित हो रहा है। जिसमे झारखंड राज्य में भी अपनी रिजल्ट मई और जून के महीने में घोषित किया। झारखंड बोर्ड के द्वारा 10वीं और 12वीं की परीक्षा के परिणाम घोषित किया। तो बहुत से विद्यार्थियो ने काफी अच्छे अंक हासिल किए।
इन छात्रों की सफलता से सब के माता पिता बेहद खुश है, झारखंड बोर्ड के रिजल्ट की सूची में सबसे अव्वल आने वाले विद्यार्थी में झारखंड राज्य की चक्रधरपुर (Chakradharpur) जिले के कारमेल स्कूल में अध्यनरत तानिया शाह और निशु कुमारी का नाम सबसे ऊपर है। इन बेटियो ने कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में कुल 500 अंक में से 490 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में टॉप पर आई है। दोनों एक ही विद्यालय की छात्रा है।
पिता का पेशा मजदूरी फिर भी बेटिया अव्वल आई
जब दोनों बेटियों के परीक्षा का रिजल्ट सामने आया तो दोनो के माता पिता की खुशि से फूल गए उनकी खुशी इतनी ज्यादा थी की वे जाहिर भी नहीं कर पा रहे थे। तानिया शाह (Taniya Shah) के पिता सतीश शाह की एक चौराहे पर चाय और समोसे दुकान हैं और उनकी मां दूसरो के घरों में काम करती हैं।
दूसरी तरफ निशू के पिता दिनेश कुमार यादव (Dinesh Kumar Yadav) का एक बहुत छोटी सी डेयरी हैं और वे घरो में जाकर दूध बेचते हैं। घर में गरीबी का आलम रहा पर पिता ने कभी भी अपनी बेटियो की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। तानिया कहती है की उनकी कामयाबी के पीछे उसके अभिभावक और स्कूल के टीचर्स है। अब तानिया आगे की पढ़ाई विज्ञान संकाय से करना चाहती है।
पिता कहते है बेटीया ही है बुढ़ापे का सहारा
निशु (Nishu) कहती है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए पहले से ही एक रणनीति तैयार की हुई थी। वे अपनी तरफ से अपना 100 प्रतिशत दे रही थी, परंतु उन्हे जरा सा भी इल्म नहीं था की वे टॉप भी कर सकती है।
निशु ने मैट्रिक की परीक्षा में 500 में से 490 अंक प्राप्त किए है। उनके प्राप्तांक कुछ इस प्रकार है, हिंदी 98, अंग्रेजी 97, गणित 100, विज्ञान 100, सामाजिक विज्ञान 95, आईटीएस 84. दोनों बेटियों के पिता का कहना है की उनके बुढ़ापे का सहारा उनकी बेटी बनेंगी और गरीबी भी वे ही दूर करेंगी।



