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हर माता पिता का सपना होता है कि उसका बेटा बड़ा होकर अफसर बने। उसके लिए माँ बाप अपनी जीवन की पूजी भी लगा देते है। लेकिन हार नही मानते। हर परिस्थिति का मुकबला करते है। कितनी भी कठिन परिस्थिति हो अपने बच्चों के लिए हर परिस्थिति से लड़ जाते है। ऐसी ही एक Story है सैयद अहमद की।
जिन्होंने हर परिस्थिति का सामना किया लेकिन कभी अपने सपने से पीछे नही हाटे। उनके पिता ने एक दोस्त बनकर हर कठिन परिस्थितियों में भी उसको हारने नही दिया। एक पिता दोस्त बनकर अपने बेटे का हौसला बढ़ते रहे। इसी हौसले के दम पर बेटे ने सफलता हासिल की।
सैयद ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने आपको असफल नही होने दिया। अपने सपनो को को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम किया। सैयद रियाज अहमद ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा Exam क्लियर करके अपने हौसलों में जान भर दी है। सैयद को पहली बार एग्जाम में सफलता नही मिली, उन्होंने हार नही मानी अपने सपनो से पीछे नही हटे।
सैयद में दूसरी बार भी सफलता हासिल नही की, लेखों फिर भी वो आगे बढ़ते चले गए, उनको पांचवें अटेंप्ट में 2018 की परीक्षा में 261वीं रैंक प्राप्त हुई थी। नागपुर में रहते है रियाज। रियाज के माता पिता ज्यादा पढ़े नही है, फिर भी रियाज का उन्होंने हर परिस्थिति में साथ दिया। माता पिता ने दोस्त बनकर उसका हौसला बढ़ाया था।
रियाज की माता ने 7वीं तक ही पढ़ाई की है, पिता ने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की। घर मे पढ़ाई का माहौल ना होने के कारण रियाज को कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। रियाज 12वीं में एक विषय असफल हो गए थे। लेकिन एक बार गिरने के बाद रियाज ने अपनी पढ़ाई पर जोर देना Start कर दिया।
रियाज ने कॉलेज में पॉलिटिक्स में प्रवेश किया फिर 2013 में छात्र रहे लेकिन लीडरशिप Join करने में घरवालों का समर्थन नहीं मिला था। तब रियाज ने विचार किया कि लीडरशिप को एजुकेशन में कैसे परिवर्तित कर सकते। फिर सिविल सर्वेंट का Option सामने दिखाई दिया। रियाज सिविल सेवा एग्जाम में मेहनत करने लगा। Exam की तैयारियों शुरू कर दी। 2013 में पढ़ाई के लिए पूना गए थे।
उस टाइम रियाज को कुछ भी जानकारी नही थी, की कैसा एग्जाम पैर्टन होता है। कैसे टेस्ट होते है, तैयारियों के लिए क्या होना चाहिए इन सबसे दूर थे इनकी कुछ भी इन्फॉर्मेशन नही थी। 2014 में पहला अटेंप्ट दिया था, जिसमे वे प्रीलिम्स से ही असफल हो गए। 2015 में जामिया की IAS एकादमी में प्रवेश लिया। उसी साल प्रीलिम्स Exam में 93 प्रश्न हल किए। इसमे निगेटिव मार्किंग थी, तो एक नंबर से असफलता हाथ लगी। फेल होने का कारण था कहि ना कहि तैयारी सही से ना होना।
तब सोचा कि खराब स्ट्रेटजी सबसे बड़ा कारण है। फिर प्रीलिम्स के लिए खुद से स्ट्रेटजी तैयार की। उसका 1-2-3 स्ट्रेटजी नाम रखा। जिसके लिए वे पूरी तरह से वो कान्फीडेंट थे। 2016 में तीसरे अटेंप्ट में अपनी स्ट्रेटजी तैयार करके प्री-मेन्स क्वालीफाई किया, लेकिन इंटरव्यू में सफल नही हो पाए।घरवालों ने फिर भी उनका हौसला नही छूटने दिया।
इस दौरान उनके पिता का रिटायर हो गया था। अब उन्हें पैसा खर्च खुद से ही उठाना था। घर की परिस्थितियों को देखकर पैसा खुद ही तलाशने लगे थे। तीसरे अटेंप्ट में असफ़ल होने के बाद पिता ने कहा, तुम तैयारी मत छोड़ना। हमको पैसे के लिए चाहे घर गिरवी रखना पड़े हम रख देंगे। फिर स्टेट सर्विसेज का Exam दिया जिसमे बहुत अच्छे नंबर से पास क्लियर किया और फिर सफलता खुद उनके पास आ गई रेंज फारेस्ट ऑफिसर बन गया।
वहां से मुझे पैसे की कमी दूर हुई। 2018 में पांचवें अटेंप्ट में पहले के मुकाबले कम तैयारी की थी। लेकिन मेन्स क्लियर हो गया। कट ऑफ से 90 नंबर अधिक थे। अब सारी उम्मीदे इंटरव्यू से थी। आशा थी कि इंटरव्यू अच्छा होगा, मॉक इंटरव्यू में अच्छे नंबर हासिल हो रहे थे। इंटरव्यू से बाहर आने के बाद पिता से कहा कि इंटरव्यू अच्छा नही था। पापा ने हौसला कम नही होने दिया, पिता ने कहा मुझे लग रहा है कि तू IAS बन गया। पांच अप्रैल 2019 को नतीजा आया तो 261वीं रैंक हासिल कर ली थी।
पापा को फोन करके बताने पर गला भर गया था। फ़ोन पर मैं कुछ बता ही नही पाया। मैं भरोसा नहीं हो रहा था। पिता से खुश होकर कहा, आपका इंतजार समाप्त हुआ, मैं अब Select हो गया हूं। रियाज सभी के लिए प्रेरणा बन गए। अपने सपनो को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत करनी होती है।



