ASI की बेटी 6 रैंक के साथ बनी IAS, अपनी बेटी को पिता ने नम आंखों से किया सैल्यूट: Success Story

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Vishakha Yadav IAS
Success Story Of IAS Topper Vishakha Yadav Who Clears UPSC CSE In Her 3rd Attempt. Upsc Result 2019 Delhi Police ASI Daughter Vishakha Yadav cracked UPSC Exam and Became IAS Officer.

File Photo

Delhi: जैसे ही दिमाग में IAS-IPS, IRAS अफसरों की छवि सामने आती है। तो लगता है इस परीक्षा को पास करने स्टूडेंट्स को दिन रात मेहनत करनी पड़ती होगी। बहुत से कैंडिडेट्स यूपीएससी एग्जाम (UPSC Exam) पास करने अपनी अलग रणनीति बनाते हैं। कहते है ना कि जब इरादा कुछ बड़ा करने का हो और उसके दृढ़ संकल्प भी गहरा हो तो फिर कोई चीज आपको आपका मुकाम हासिल करने से नहीं रोक सकती।

2019 की यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) जिसका रिजल्ट अगस्त 2020 में आया। इस साल भी इस परीक्षा में लड़कियों ने अपनी पहचान बनाये रखी। रिजल्ट आने के बाद कुछ लड़कियों का नाम जो लोगों की जबान पर रहा, उनमें से एक थीं विशाखा यादव (Vishakha Yadav), जिन्होंने अपने तीसरे प्रयास में परीक्षा में 6वी रेंक हासिल की।

उनके चर्चा में आने की दूसरी खास वजह थी, उनके पिता का बेटी के प्रति प्यार, जो कि दिल्ली पुलिस में एसआई यानी एसिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। विशाखा यादव की कहानी (IAS Vishakha Yadav Story) को लोगों ने ये कहते हुए शेयर किया कि आपने पुलिस में तैनात एक बाप की औलाद को अक्सर मस्ती करते हुए ही देखा है तो विशाखा यादव और उनके पिता की कहानी को भी जान लीजिए।

सभी जानते हैं कि यूपीएससी सीएसई परीक्षा (UPSC CSE Exam) कितनी कठिन होती है, जिसमें सफलता मिलेगी या नहीं इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। कई बार कठिन मेहनत के बावजूद मंजिल नहीं मिलती। ऐसे में भी विशाखा यादव जैसे कुछ स्टूडेंट्स हैं जो लगी-लगाई बढ़िया हाईपेड कॉरपोरेट जॉब छोड़कर यूपीएससी सीएसई परीक्षा देने का रिस्क लेते हैं।

मामला तब और लगता है, जब नौकरी छोड़ने के बाद पूरी मेहनत से तैयारी करने के बावजूद एक नहीं दो-दो बार विशाखा का प्री में ही सेलेक्शन नहीं हुआ तब भी निराश नही हुई। ऐसे में मन मे कई सवाल आये, कई बार यह भी लगता था कि कहीं गलत फैसला तो नहीं लिया। लेकिन ऐसे में जो हौसला नहीं हारता वही विजेता बनता है। ऐसी ही हैं हमारी आज की टॉपर विशाखा, जिन्होंने अंतत तीसरे प्रयास में न केवल एग्जाम क्लियर किया बल्कि 6वीं रैंक के साथ टॉपर भी बनीं।

कौन है IAS पापा की परी

विशाखा जन्म और शुरुआती पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में ही हुई। परीक्षा में 6 वीं रैंक हासिल करने वाली विशाखा यादव (Vishakha Yadav) नई दिल्ली के कुरन गार्डन की रहने वाली हैं और परीक्षा में बड़ा स्कोर खड़ा करने के लिए प्रतिदिन 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा का रहने वाला है। वे हमेशा से एक होशियार स्टूडेंट रही हैं और लगभग हर कक्षा में उनका प्रदर्शन अच्छा था।

बारहवीं के बाद विशाखा ने इंजीनियरिंग की और एक कंपनी में दो साल जॉब भी की। लेकिन उनको कुछ अधूरा सा महसूस हो रहा था। उनके मन मे सपना तो कुछ ही था। फिर उन्होंने जॉब छोड़कर यूपीएससी की तैयारी का बीड़ा उठाया। इस प्रकार यूपीएससी के क्षेत्र में आने के पहले भी विशाखा ने काफी लंबा रास्ता तय किया है।

हमेशा से आईएएस ही बनना चाहती थीं, ये उनका बचपन से ड्रीम था लेकिन इस ड्रीम के लिए कदम बढ़ाने में उन्हें समय लग गया। कई बार चीजें साफ होती हैं फिर भी तैयारी नहीं शुरू हो पाती। विशाखा के पिताजी और माताजी भी यही चाहते थे कि वे इस क्षेत्र में जाएं। एक प्रकार से ये उनके पूरे परिवार का ही सपना था।

विशाखा को दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने सम्मानित किया और उनके पिता एएसआई राज कुमार (ASI Raj Kumar) ने उनके विभाग में मिठाई बट कर खुशी इजहार की। विशाखा बताती हैं कि सिविल सेवा परीक्षा के तैयारी के लिए नौकरी को छोड़ना उनकी मजबूरी थी, क्योंकि परिवार से दूर रहकर नौकरी और तैयारी दोनों के बीच सामंजस्य बिठा पाना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा था।

दिल्ली आने के बाद उन्होंने यूपीएससी की कोचिंग की और जी जान से तैयारी में जुट गई। कोचिंग के बिना भी सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) को पास किया जा सकता है, लेकिन मैं लंबे समय से टैक्निकल क्षेत्र से जुड़ी हुई थी। इसलिए मुझे कोचिंग की जरूरत महसूस हुई। कोचिंग करने से मुझे काफी लाभ मिला।

परिवार का सपना था सिविल सेवा में जाना

विशाखा कहती हैं कि सिविल सेवा में जाने का सपना उन्होंने बचपन में ही संजो लिया था। जिसके लिए उन्होंने मेहनत कुछ समय बाद शुरू की। यही नहीं विशाखा बताती हैं कि उनके साथ ही उनके मां-बाप भी यही चाहते थे कि विशाखा सिविल सर्विसे में जाकर अपना नाम रोशन करें।

पिता को माना अपना आदर्श

पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम को भी अपना आदर्श मानती है। विशाखा ने बताया कि उनकी पहली प्रेरणा हमेशा उनके पिता रहेंगे क्योंकि वह पिता को देख-देखकर बड़ी हुई हैं और उनकी मेहनत और कठिन परिश्रम उन्हें हमेशा प्रेरणा से भर देती है। इसके साथ ही भारत के पूर्व राष्ट्रपति व मिसाइल मैन डॉ अब्दुल कलाम भी उनकी प्रेरणा हैं।

वहीं महात्मा गांधी की आइडियोलॉजी से भी वह बहुत कुछ शिक्षा ग्रहण की। उनके पिता राजकुमार यादव ने बताया कि विशाखा को सफलता करने में लंबा समय लगा लेकिन बेटी ने हार नही मानी। उसे सफलता तीसरी बार मे हासिल हुई। पहली-दूसरी बारी में वह सही से पढ़ नहीं पाई थी और फिर पूरा पूरा दिन लाइब्रेरी में जाकर पढ़ती रहती थी।

सफलता का रास्ता (Way Of Success)

किसी भी अभ्यर्थियों को प्री परीक्षा के लिए तैयारी करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो अच्छे से बन रहा है उसको पहले वो हल कर लें। उसके बाद उन प्रश्नों पर आएं जिनमें थोड़ा दिमाग और समय लगाकर पता कर सकते हैं कि सही उत्तर क्या है और तीसरे वो प्रश्न जो आपको बिलकुल नहीं आते, इन्हें छोड़ दें।

इन पर समय बर्बाद करने से कोई मतलब नहीं। समय की कीमत समझे। इसके अलावा विशाखा ने यूपीएससी की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स को यही सलाह दी कि एक या दो दिन इसके लिए कोशिश करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। कुछ स्टूडेंट्स होते है जो एक दिन प्रेक्टिस करके कुछ दिन आराम फरमाते है। लेकिन किसी भी परीक्षा को आपको पास करना है तो उसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

अपने अंदर किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प लें। उस चीज के पीछे जी जान से पड़ जाये। जब तक आपको हासिल ना हो जाये। इस परीक्षा को पास करने के लिए निरंतर प्रयास बेहद जरूरी है। यहां विशाखा एक जरूरी सलाह ये भी देती हैं कि प्री परीक्षा के पहले खूब सारे मॉक टेस्ट देकर ये देख लें कि कितने प्रश्न अटेम्पट करने पर आपके क्वालीफाइंग मार्क्स आते हैं। एक बार पैटर्न पता चल जाए तो उसी हिसाब से उत्तर दें। कम से कम परीक्षा में इतने प्रश्न करें ताकि आपका कट-ऑफ निकल जाए।

इसे जानने के लिए बहुत टेस्ट सीरीज हल करे। ये जाने की आप किस विषय मे कमजोर है। और कौन से विषय मे आप स्ट्रोंग है। टेस्ट सीरीज को हल करने से बहुत सारी बाते आपको पता चल जाएगी। आपको टेस्ट सीरीज को हल करने में कितना समय लगेगा। कैसी रणनीति बनानी होगी आगे के लिए। ये सब बात की जानकारी आपको हो जाएगी। जितना हो सके टेस्ट सीरीज सॉल्व कीजिये।

सफलता का श्रेय

अपनी सफलता का श्रेय विशाखा अपने माता-पिता को देती है। जिन्होंने मुश्किल दौर में उन्हें कभी लड़खड़ाने नहीं दिया। होसलो को मजबूत बनाये रखने में बहुत साथ दिया। हर समय सकारात्मक ऊर्जा दी। विशाखा बताती हैं कि शिक्षा राष्ट्रीय निर्माण का मूल आधार है। मैं चाहती हूं कि मैं शिक्षा नीतियों को ठीक से लागू करने में अपना समर्थन दे सकूं, ताकि हर घर शिक्षा रूपी दीपक से उज्जवल हो सकें।

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