मजदूर कड़ी मेहनत से बना IAS अधिकारी, कभी प्लेटफार्म पर सोये, पढ़ने के लिए की मजदूरी, संघर्ष भरा रहा जीवन

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Sivaguru Prabhakaran IAS
Sivaguru Prabhakaran a villager from Tamil Nadu has Cracked UPSC with rank 101. Story of M Sivaguru Prabakaran who is UPSC Topper.

File Photo

Tamilnadu: मजदूर हमारे समाज का वह मजब है, जिसके ऊपर समस्त आर्थिक उन्नति टिकी होती है। वह मानवीय श्रम का सबसे आदर्श मिसाल है। वह सभी प्रकार के क्रियाकलापों की धुरी है। आज के मशीनी युग में भी उसकी महत्वता कम नहीं हुई है। उद्‌योग, व्यापार, कृषि, भवन निर्माण, पुल एवं सड़कों का निर्माण आदि सभी कामों में मजदूरों के श्रम का योगदान जरूरी होता है।

आज हम बात एक ऐसे व्यक्ति के विषय में कर रहे हैं, जिन्होंने मजदूरी करते हुए पढ़ाई जारी रखी और अखिर मे IAS अधिकारी बन कामयाबी का उदहारण पेश की। आईए जानते हैं, उनकी संघर्ष से सफलता तक की कहानी।

बचपन का सफर बेहद संघर्षों भरा

एम. शिवागुरू प्रभाकरण (M. Shivaguru Prabhakaran) तमिलनाडु (Tamilnadu) के निवासी है। उनका बचपन बेहद हीं मुश्किल भरे हालातों में बीता है, जिसमें उनके पास सुविधा के तौर पर कुछ भी नहीं था।

शिक्षा लेना तो दूर उनके पास निवास के लिए एक घर भी नहीं था, जिस कारण से उन्हें प्लेटफार्म को हीं अपना निवास स्थान बनाना पङा। पिता को शराब की ऐसी गंदी लत थी कि उन्हें भूख से जूझना पड़ता था। यदि सुबह को कुछ खाया, तो शाम में क्या खाएंगे इसका पता नहीं होता था।

मजदूरी कर अपनी पढ़ाई रखी जारी

बेहद गरीबी में जीते हुए भी प्रभाकरण के भीतर शिक्षा हासिल करने के लिए लालसा कभी खत्म नहीं हुई और जैसे भी परिस्थिति हों उन्होंने पढ़ना नहीं छोड़ा। पिता की बेपरवाही की वजह से बचपन में हीं उन्होंने घर की उत्तरदायित्व उठा लीया था।

पढ़ाई में वे बचपन से हीं बेहद होशियार रहे और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किये रहे। जब वे उच्च शिक्षा के लिए तैयार हुए, तो धनराशि ज्यादा चाहिए थे, इस कारण से उन्हें विवश होकर अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कभी खेतों में मजदूरी तो कभी आरा मशीन पर लकड़ी काटने तक का कार्य प्रभाकरन ने किया।

परिवार के लिए बचपन से रहे संजीदा

प्रभाकरन बाल्यकाल से हीं अपने घर के हर उत्तरदायित्व को बखूबी निभाते रहे। अपने परिश्रम के दम पर वर्ष 2008 में अपने छोटे भाई को इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाए। साथ हीं बहन का विवाह भी करवाया। यह कुछ ऐसे उत्तरदायित्व थे, जिसे पूरा किए बिना प्रभाकरण अपने लक्ष्य की ओर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते थे।

इस तरह की आगे की पढाई

उनके समक्ष अब केवल एक हीं लक्ष था वह है यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करना। उन्हें आईआईटी (IIT) में दाखिला लेना था जिसके लिए उन्हें चेन्नई जा कर कोचिंग लेनी पड़ती, परंतु इतनी धनराशि की व्यवस्था कर पाना भी कठिन था। जब आप अपने लक्ष्य की ओर अडिग होकर प्रयास करते हैं, तो भगवान कोई ना कोई मार्ग जरूर निकालते हैं।

ऐसी परिस्थिति में प्रभाकरन को एक मित्र के जरिए सेंट थॉमस माउंट (ST. THOMAS MOUNT) के विषय में जानकारी हासिल हुई, जहां जरूरतमंद, विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। प्रभाकरन फिर चेन्नई सेंट थॉमस माउंट में चले गए, वहां उन्हें दाखिला तो मिल गया, लेकिन किसी से कोई परिचय नहीं था।

यहां तक कि उनके पास किराए का कमरा लेने तक के लिए धनराशि नहीं थी। इस वजह से उन्होंने रेलवे प्लेटफॉर्म को ही अपना निवास स्थान बना लिए। 4 महीने तक रोजाना स्टेशन पर निवास करने के बाद एक छात्र ने सहयता के लिए हाथ बढ़ाया और प्रभाकरन उसके साथ रहने लगे। वह अपनी विषम परिस्थितियों से कभी भी निरास नहीं हुए।

उन्हें आईआईटी (IIT) में नामांकन मिल गया। आगे चलकर प्रभाकरन बीटेक (B.TEC) करने के बाद एमटेक (M.TEC) में भी टॉप किए। इसके पश्चात उनके समक्ष एक ही लक्ष्य था यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) पास कर IAS अधिकारी बनना।

101वां रैंक प्राप्त कर पास की यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam)

विफलता को कामयाबी की पहली सीढ़ी मानी जाती है। प्रभाकरण भी इसी बात पर भरोसा करते थे, इसलिए उन्होंने असफलता से हार ना मान कर स्वम को पहले से ज्यादा सुदृढ़ बनाया। आखिरकार उनके द्वारा किया हुआ परिश्रम रंग लाया और साल 2017 के बैच में 990 परीक्षार्थियों में प्रभाकरण 101 वां स्थान हासिल किये हैं।

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