
Almora: अकसर लोगों से कहते सुना है कि अच्छी नौकरी होगी या अच्छी पढ़ाई लिखाई की होगी तो शादी भी अच्छी जगह होती है। जी हां दोस्तों लोग शादी विवाह के समय लड़का लड़की की नौकरी और घर परिवार में जमीन जायदाद देखकर रिश्ता जोड़ते हैं। पहले के समय में दहेज प्रथा ने लड़कियों के जीवन को तबाह कर रखा था, परंतु आज का समय है कि लड़कियों ने स्वयं को बनाकर दहेज प्रथा जैसी कुरीति को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
पहले की बेटी और अब की बेटियों में काफी अंतर है, पहले की बेटियां घर में रहकर चार दिवारी में ही रही आती थी, परंतु अब बेटियां उन चार दीवारों से निकलकर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने नाम का परचम लहरा रही है। आज हम एक ऐसी बेटी की बात करेंगे जो सुशिक्षित हैी। उसके बाद भी खेती किसानी में अपना जोर आजमा रहे हैं, तो चलिए बात करते हैं। अल्मोड़ा की लता कांडपाल की।
लता कांडपाल की कहानी
दोस्तों अक्सर माता-पिता अपनी लड़की को ब्याहने से पहले लड़के के परिवार उनकी धन जायदाद और नौकरी देखते है। ऐसे परिवार और ऐसी लड़कियों को आईना दिखाया है लता कांडपाल ने। यह महिला काफी शिक्षित है और मेहनती भी।
जानकारी के अनुसार लता कांडपाल (Lata kandpal) उत्तराखंड (Uttarakhand) के अल्मोड़ा (Almora) जिले के हवालबाग विकासखण्ड के चितई गांव की रहने वाली है। एक समय था जब लता हाथों में कलम पकड़ कॉपी किताब के साथ बच्चों को शिक्षित करती थी।
याने लता एक समय पर शिक्षिका थी, आज वही लता हाथों में कुदारी थामे बंजर भूमि (Barren fields) को हरी-भरी साफ सब्जियों से सुसज्जित कर रही हैं। जी हां दोस्तों यह वही महिला है जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने जन्म भूमि को सवारने की कोशिश कर रही हैं।
खेत खलियान का काम लगने लगा है छोटा
दोस्तों हम जानते हैं कि हमारा भारत कृषि प्रधान देश है भारत भूमि उर्वरक का से भरी हुई है, इसीलिए हमारी भारत भूमि सोने से भी ज्यादा कीमती है। परंतु आजकल के युवा ज्यादा पढ़ाई करने के पश्चात उन्हें लगने लगता है कि खेती-बाड़ी काफी छोटा दर्जे का काम है।
ऐसे लोगों के लिए जवाब है लता कांडपाल। इनके कार्य से यह साबित होता है कि महिला शक्ति दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है, वह चाहे तो हर असंभव काम को भी संभव कर सकती है। एक समय जब लोग महिलाओं को केवल गृहस्ती सौपा करते थे। आज वही महिला खेतों खलियान ओ को अपने तरीके से हरा भरा कर अच्छी खासी कमाई कर रही है।
उप प्रधानाचार्य के पद पर कार्य करती थी लता
दोस्तों आपको जानकर आश्चर्य होगा कि लता खेत-खलियानओं का काम संभालने से पहले अपने ही क्षेत्र के एक नामचीन स्कूल महर्षि विद्या मंदिर बाड़ेछीना में उप प्रधानाचार्य का कार्यभार संभाल रही थी।
कुछ कारणों के चलते उन्होंने वर्ष 2019 में जॉब छोड़ दी, उसके बाद बे काफी समय तक घर में बच्चों को ट्यूशन दिया करती थी। इसी बीच लता महिला हाट संस्था अल्मोड़ा की सचिव कृष्णा बिष्ट से मिली। कृष्णा बिष्ट ने लता को मशरूम खेती के लिए प्रशिक्षित किया, इसके बाद वर्ष 2020 से लता ने मशरूम की खेती प्रारंभ कर दी।

लता काफी मेहनती है और अपने काम में बहुत जल्दी मास्टर हो जाती हैं, इस बात का उन्हें फायदा मिला और पहली ही बार में उन्होंने 25000 RS इस फसल से प्राप्त किए। उनका जब मोटिवेशन बड़ा तो उन्होंने खेती को और अच्छी तरह करने का फैसला लिया जिससे प्रदेश में रह रहे अन्य महिलाओं को भी इस कार्य के लिए प्रेरित किया जा सके।
मशरूम के साथ लहराती है अन्य सब्जियों की फसल
मिली जानकारी के अनुसार लता कांडपाल ने अपने जैसी अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर उन्हें भी स्वरोजगार करने के लिए प्रेरित किया। इतना ही नहीं बे मशरूम के साथ अन्य प्रकार जैसे मटर, पालक, धनिया, बंद गोभी, फूल गोभी, लाई एवं लहसुन आदि की फसल भी लगाती है और उससे अच्छा खासा मुनाफा कमा रही है।
बात करें लता के एजुकेशन की तो आपको बता दें उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके निजी क्षेत्र से ही हुई उसके बाद उन्होंने m.a. B.ed जैसी डिग्रियां हासिल की साथ ही दिल्ली से 12 प्रकार की ट्रेनिंग हासिल की जिसमें म्यूजिक कोर्स, सिलाई, कढ़ाई पेंटिंग जेसे प्रशिक्षण शामिल है।




