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Bhopal: हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Rannath Kovind) द्वारा राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री पुरस्कार (Padma Shri Award) विजेताओं को सम्मानित किया गया। अब हर कोई इन नए पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं के बारे में जानता चाह रहा है। इसमें एक नाम ऐसा है ‘भुरी बाई’ (Bhuri Bai) का। भूरी बाई को कला के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए पद्मश्री अवार्ड दिया गया है।
मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय से आने वाली भूरी बाई, झाबुआ जिले के पिटोल गांव की रहने वाली हैं। उन्हें बचपन से ही चित्रकारी करने के बेहद प्रेम था। उन्होंने कैनवास का इस्तेमाल कर आदिवासियों के जीवन से जुड़ी चित्रकारी को करने की नीव राखी और कुछ समय बाद उनकी पहचान पूरी देश में हो गई।
देश के अलावा विदेशों में भी प्रसिद्ध हुई
भूरी बाई की बनाई गई पेटिंग्स (Bhuri Bai Made Painting) ने देश के अलावा विदेशों में भी काफी ख्याति प्राप्त की। उनकी पेटिंग अमेरिका में लगी वर्कशॉप में भी लगाई गई। जहां उनकी पेटिंग बहुत अधिक पसंद की गई। वे देश के अलग-अलग जिलों में आर्ट और पिथोरा आर्ट पर वर्कशॉप का आयोजन करवाती हैं।
पद्मश्री के अलावा भी अन्न पुरस्कार हासिल किये
भूरी बाई ने अपना सफर एक समकालीन भील कलाकार के रूप में शुरू किया। भूरी बाई अब भोपाल में आदिवासी लोककला अकादमी में एक कलाकार के तौर पर काम करती हैं। उन्हें मध्यप्रदेश सरकार से सर्वोच्च पुरस्कार शिखर सम्मान (1986-87) प्राप्त हो चुका है। 1998 में मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें अहिल्या सम्मान से विभूषित किया।
President Kovind presents Padma Shri to Smt. Bhuri Bai for Art. She is a well-known tribal painter from Madhya Pradesh. She has contributed immensely to teaching and preserving the traditional Bhil paintings. pic.twitter.com/VyAm6f3mex
— President of India (@rashtrapatibhvn) November 9, 2021
भूरी बाई की पेंटिंग में जंगल में जानवर, वन और इसके वृक्षों की शांति के अलावा स्मारक-स्तंभ, भील देवी-देवताएं, पोशाक, गहने और टैटू, झोपडि़यां, हाट मेला, उत्सव और नृत्य के साथ साथ मौखिक कथा और भील के जीवन के प्रत्येक पहलू को दिखाया गया है। भूरी बाई ने हाल ही में वृक्षों और जानवरों के साथ-साथ वायुयान, टेलीविजन, कार तथा बसों का चित्र बनाना शुरू किया है।
Bhuri Bai, a tribal woman from Jhabua, Madhya Pradesh. Once worked as a daily wager, earning Rs 6.
She has been conferred with a Padma Shri for her immense contributions in preserving the traditional Pithora art form. Her artwork got world recognition. pic.twitter.com/m1RMjGT1S9
— Prashant Padhihary प्रशांत पढिहारी 🚩🇮🇳 (@prashantp_2011) November 8, 2021
पद्मश्री मिलने के बाद भुरी बाई ने कहा “ये पुरस्कार मुझे आदिवासी भील पेंटिंग करने के लिए मिला है, मैंने मिट्टी से पेंटिंग की शुरुआत की थी। मैं भोपाल के भारत भवन में मज़दूरी करती थी और उसके साथ पेंटिंग भी बनाती थी। मेरी पेंटिंग आज देश विदेश में जाती है। मैं बहुत खुश हूं।” आज भूरी बाई बेहद ही खुश हैं।
Smt. Bhuri Bai and her indigenous art 💜#indianartist #Tribalart pic.twitter.com/nZMjwicRKn
— manisha bohra (@manishabohra3) February 4, 2021
हालांकि भूरी बाई का यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। बता दें की उनका बचपन बहुत ही गरीबी में बीता है। भूरी बाई पहली आदिवासी महिला हैं, जिन्होंने गांव में घर की दीवारों पर पिथोरा पेंटिंग करने की शुरूआत की थी। फिर उनकी पेटिंग की पहचान अन्न जगह और शहरों में होने लगी।
Internationally acclaimed Bhil Painter from Jhabhua, Smt. Bhuri Bai is the first to transfer mud wall paintings to huge canvases. She has been awarded the Padma Shri this year. #PeoplesPadma #PadmaAwards2021 pic.twitter.com/vmnrX4HcZx
— MyGovIndia (@mygovindia) November 9, 2021
इसके बाद भुरी बाई भोपाल आकर मजदूरी करने लगी। उस दौर में भोपाल (Bhopal) में पेटिंग बनाने का काम करती थी। बाद में मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की तरफ से उन्हें पेटिंग बनाने का काम दिया गया। जिसके बाद वे भोपाल के भारत भवन में पेटिंग करने का काम करने लगी थी।



