
Delhi: सच ही कहा है बुजुर्गों ने कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। आज आपको ऐसे शख्स से रूबरू कराने जा रहे है, जिसने इस पंक्ति को सही साबित कर दिखया। एक दूध बेचने वाला इंसान बड़े बैंक का मालिक बन जाए, तो उन्हें सलाम करना बनता है। मेहनत ही है जो इंसान को ऊँचाई तक ले जा सकती है।
किस्मत का सिक्का कब उछलेगा किसी को पता नही। बस मेहनत करते जाये। जैसे अंधेरी रात ज्यादा समय तक नही ठहरती वैसे बुरा समय भी ज्यादा समय तक नही ठहरता। आज हम आपको बता रहे हैं, बंधन बैंक (Bandhan Bank) के मालिक चंद्रशेखर घोष (Chandrashekhar Ghosh, Bandhan Bank CEO) की जो कभी परिवार खर्च के लिए दूध बेचने का काम किया करते थे।
बंधन बैंक (Bandhan Bank) के मालिक चंद्रशेखर घोष (Chandrashekhar Ghosh) के पिता की एक छोटी सी मिठाई की दुकान थी। चंद्रशेखर घोष का बाल्यावस्था गरीबी में बीता उनके पिता त्रिपुरा (Tripura) के अगरतला (Agartala) में छोटी सी एक मिठाई की दूकान चलाते थे। घर में इतने भी पैसे नहीं थे की वो चंद्रशेखर की पढाई किसी अच्छी विद्यालय में करवा पाते।
चंद्रशेखर अपना घर चलाने के लिए पिता की सहायता करते थे, वो गली गली जाकर दूध बेचते थे और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे। एक समय ऐसा भी आया जब उनके घर में खाना बनाने के लिए भी पैसे कम पड़ गए उस समय उनका परिवार पास के आश्रम में जाकर खाना खाने को विवश था।
Bandhan Bank
is a resounding success story 👏💐Mr Chandra Shekhar Ghosh,
founder and strength
of the fast growing institution!Hard work, Focus and Vision
are lessons from Bandhan Story!Happy to be with the team recently
in a branch inauguration! pic.twitter.com/BrZ6uWnAq2— Dr. M V Rao, IAS (@mvraoforindia) April 17, 2021
चंद्रशेखर की उच्च शिक्षा हेतु परिवार वालों के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, लेकीन उन्होंने हार नहीं मानी और खुद दूध बेच कर और बच्चों को ट्यूशन देकर उन्होंने अपनी जितनी भी जमा पूंजी थी ढाका विश्वविद्यालय में पढाई करने में लगा दी।
तो ऐसा बना बंधन बैंक
चंद्रशेकर ने देखा कि एक साहूकार से सब्जी वाला प्रतिदिन 500 रुपए उधार लेता था और संध्या के समय को मूल सहित ब्याज की रकम साहूकार को वापस कर देता था। उन्होंने इसकी गणना की और मालूम चला कि साहूकार केवल 500 रुपए में प्रतिवर्ष 700 फीसदी ब्याज लेता है। और इसी घटना से बंधन बैंक की शुरआत हुई।
महिलाओं को सशक्त बनाता है बंधन बैंक
वर्ष 2021 में चंद्रशेखर घोष ने कुछ पैसे इकठ्ठा किये और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी (Microfinance Company) खोल दी। वो छोटे स्तर पर अपना व्यापार शुरू करने वाली महिलाओं को छोटे छोटे लोन देने लगे।
He is one of the biggest stories from our country. 1 crore 50 lakh women are his customers. From being beaten & treated badly today the women are turning into micro-entrepreneurs & more importantly have newborn confidence. Chandra Shekhar Ghosh of @bandhanbank_in 💛 #India pic.twitter.com/cQLqR6rYk8
— Shradha Sharma (@SharmaShradha) April 9, 2021
वक़्त के साथ काम बढ़ता गया और कामयाबी का मार्ग खुलता गया। वर्ष 2015 में चंद्रशेकर ने अर्थिक सेवाओं की शुरआत कर दी। इसके बाद RBI ने बंधन बैंक को पूर्ण वाणिज्यिक बैंक के तौर पर स्वीकृति देदी। आज देश में बंधन बैंक देश के प्रतिष्ठित 21 बैंकों से आगे निकल गया है।
200 से ज़्यादा ब्रांच और 30 हज़ार करोड़ का बंधन बैंक
पूरे भारत में अब बंधन बैंक की 2000 से ज्यादा ब्रांच हैं, जिसका मूल्य 30 हज़ार करोड़ से भी अधिक है। वर्ष 2011 में वर्ल्ड बैंक ने भी बंधन बैंक पर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय निगम ने बंधन बैंक में 135 करोड़ रुपए का निवेश किया। आज बंधन बैंक देशभर की महिलाओं को खुद का रोजगार और उद्योग शुरू करने के लिए उधार देता है।



