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Jamnagar: भारत में क्रिकेट के खेल को एक अलग ही दर्ज़ा दिया गया है। भले ही भारत का राष्ट्री खेल हॉकी है, परन्तु क्रिकेट को इस देश में पूजा जाता है। भारतीय क्रिकेट टीम में सेलेक्ट होना हर खिलाडी का सपना होता है। परन्तु इंडियन टीम में अपना स्थान बना पाना आसान नहीं होता है। इस मुकाम को हासिल करना भी हरफनमौला खिलाड़ी रविन्द्र जडेजा (All Rounder Ravinder Jadeja) के लिए बहुत मुश्किल था।
रविन्द्र जडेजा आज भारत ही ही बांकी दुनिया के सबसे बेहतरीन आल राउंडर (World Best All Rounder) क्रिकेटर है। आज उनके पास तजुर्बा, नाम, दौलत और शोहरत सब कुछ है। परन्तु जडेजा का बचपन मुश्किलों में बीता है। उनके पिता गार्ड की नौकरी करके घर का खर्च चलाते और पाने परिवार को पालते थे।
जडेजा के जीवन में बहुत कुश्किले आई, मगर जडेजा हारे नहीं और अपने महबूत इरादे के चलते भारत के ही नहीं विश्व के बेस्ट आलराउंडर बनने में सफल रहे। T-20 क्रिकेट हो, टेस्ट हो, वन डे हो या फिर आईपीएल जडेजा हर फॉर्मेट में अपना लोहा मनवा देते हैं।
IPL में 6 बॉल पर 37 रन बना दिए
बीते IPL के एक मैच में जडेजा ने एक ओवर मतलब 6 बॉल पर 37 रन बना दिए थे। यह कमल तो सर रविंद्र जडेजा ही कर सकें हैं। आईपीएल जडेजा चेन्नई सुपरकिंग्स टीम का हिस्सा हैं। वे आईपीएल के स्टार खिलाड़ियों में से एक हैं।
रविन्द्र जडेजा (Ravinder Jadeja) का जन्म 6 दिसंबर 1988 को गुजरात के जामनगर में हुआ था। उनके पिता अनिरुद्ध सिंह जडेजा आर्मी में नौकरी करते थे। लेकिन एक हादसे के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आई। जिसके चलते उन्हें आर्मी की नौकरी छोड़नी पड़ गई।
जडेजा के पिता ने गार्ड की नौकरी करके पाला
फिर अपने परिवार को पालने के लिए वे एक प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में गार्ड की नौकरी (Guard Job) करने लगे। रविंद्र जडेजा की मां लता जडेजा एक नर्स थीं। जडेजा का बचपन आर्थिक तंगी में ही बीता। छोटू जडेजा को क्रिकेट खलना बहुत पसंद था।
माँ का सपना था कि बेटा भारतीय क्रिकेट टीम से खेले
वह बच्चा बड़ा होकर एक क्रिकेटर बनाना चाहता था, परन्तु पिता उन्हें आर्मी अफसर बनते देखना चाहते थे। जडेजा की मां लता अपने बेटे के मन मुताबिक़ उन्हें क्रिकेटर ही बनाना चाहती थीं। माँ का सपना था कि उनका बेटा भारतीय क्रिकेट टीम से खेले। ऐसे में जडेजा माँ के बहुत दुलारे थे।
एक लो मिडिल क्लास फॅमिली से आने वाले रविंद्र के लिए क्रिकेट खिलाड़ी बनाना आसान नहीं था। उन्होंने सौराष्ट्र में ही एक क्रिकेट अकादमी ज्वाइन की। जब वे क्रिकेट खेलना सीख रहे थे, तभी उन पर दुःख का सैलाब आन पड़ा। मात्र 17 साल के रविंद्र जडेजा की माता का एक दुर्घटना के दौरान देहांत हो गया। मां के गुजरने का गम जडेजा सह नहीं पा रहे थे।
मुश्किल समय में जडेजा की बड़ी बहन संभाला
ऐसे में निराश रविंद्र ने क्रिकेट से भी दूरी बनानी शुरू कर दी थी। इस मुश्किल समय में जडेजा की बड़ी बहन नैना ने उनको दिलासा दिया और मोटीवेट किया। बहन ने उन्हें दोबारा क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। नैना ने जडेजा को मां और उनके सपने को पूरा करने के लिए मोटीवेट किया। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होती देखकर बहन नैना भी नर्स की जॉब करने लगीं। बहन ने अपने भाई जडेजा की हर संभव मदत की।
फिर जडेजा ने दोबारा क्रिकेट खेलबा शुरू किया। उन्हें कोच के रूप में महेंद्र सिंह चौहान जैसा गुरु मिला। कोच के साथ जडेजा ने क्रिकेट के मैदान पर बहुत प्रैक्टिस की। जडेजा का सौराष्ट्र की युवा में चयन हो गया। जहां जडेजा ने अपने हरफनमौला खेल से सिलेक्टरों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। अपने पहले ही मैच में जडेजा ने 72 रन देकर 4 विकेट लिए। बेहतरीन खेल के चलते साल 2006 में उन्हें अंडर-19 विश्व कप के लिए भारतीय टीम के लिए चुना गया।
U-19 World Cup टीम के लिए चुने गये
उस U-19 World Cup 2006 में युवा रविंद्र जडेजा ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में 4 विकेट लेकर सभी को हैरान कर दिया। इसके बाद फाइनल मैच में पाकिस्तान के खिलाफ 3 विकेट ले लिए, तब पाक बल्लेबाज़ उनकी गेंदों में उलझ गए थे। इस मैच में भारत को जीत तो नहीं मिली, लेकिन जडेजा की गेंदबाजी के बदौलत पाकिस्तान 109 रन ही बना पाई थी। बतौर आल राउंडर जडेजा साल 2008 में फिरसे अंडर-19 विश्व कप के लिए चुने गए।
#OnThisDay in 2008, India led by Virat Kohli, lifted their second Under-19 World Cup title🏆
Do you remember which current international stars featured in that tournament?#odi #u19 #u19cwc #viratkohli #manishpandey #ravinderjadeja #india #Wolf777News
Content by @ESPNcricinfo pic.twitter.com/E1l9ZaouKJ
— Wolf777News (@Wolf777news) March 2, 2022
यहाँ आज के स्टार क्रिकेटर विराट कोहली को कप्तान और रविंदर जडेजा को उपकप्तान बनाया गया। इस पूरे वर्ल्ड कप में जडेजा ने 10 विकेट लेते हुए सभी का दिल जीत लिया। इस बार साल भारत ने अंडर 19 विश्वकप भी जीता। रविन्द्र जडेजा ने दमदार गेंदबाजी के साथ-साथ शानदार बल्लेबाजी भी की थी।
जडेजा साल 2009 में भारतीय टीम के लिए चुने गये
फिर वह दिन भी आया जब उनकी माँ का सपना साकार होने वाला था। साल 2009 में जडेजा को भारतीय क्रिकेट टीम में बतौर ऑलराउंडर सेलेक्ट किया गया। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अपना पहला मैच 8 फरवरी 2009 को खेला था। उन्होंने टी-ट्वेंटी डेब्यू मैच भी श्रीलंका के खिलाफ 10 फरवरी 2009 को खेला। जडेजा ने अपना पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ साल 2012 में खेला था।
After all, why is Ravindra Jadeja not being given a chance to play in the match? He is also a good player. I want Ravinder Jadeja to play in the next match. pic.twitter.com/OCN6pe2oyR
— Vishal Raghav (@VishalR01532207) June 13, 2019
बता दें की साल 2012 में जडेजा ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 3 ट्रिपल शतक लगाये थे।ऐसा करने वाले वे दुनिया के 8वें और भारत के पहले खिलाड़ी बने थे। इसके बाद उन्हें ‘सर जडेजा’ (Sir Jadeja) की उपाधि मिली थी। एक बार पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मज़ाक में कहा था की जडेजा कुछ भी कर सकते हैं, यहाँ तक के वे एक गेंद में 2 विकेट भी ले सकते है।
Sir 🙏 pic.twitter.com/BMAvKOvQL5
— Shwetank (@shwetankbhushan) April 25, 2021
अब हाल ही में रविंद्र जडेजा ने श्रीलंका के खिलाब टेस्ट मैच में निचले क्रम ने आते हुए शानदार नाबाद 175 रन के पारी खेली और गेंदबाज़ी में विकेट भी झटके। जडेजा के इस कारनामे ने यह प्रूफ कर दिया की वे सही में सर रविंद्र जडेजा (Sir Ravindra Jadeja) है। उनका बल्ला और उंगली पर गेंद हर टीम पर भारी है। टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 200 विकेट लेने का रिकॉर्ड भी जडेजा के नाम है। उन्होंने महज 44 मैच में ही यह कारनामा कर दिखाया था।



