Alwar: कृषि के क्षेत्र में एक नई क्रांति दिखाई पड़ रही है, लोग पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक खेती कर कृषि जगत को बढ़ावा दे रहे हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि भारत में कृषि ही एक मुख्य आय का स्रोत है। यहां के 75 प्रतिशत व्यक्ति खेती किसानी से अपना घर परिवार चला रहे हैं, परंतु जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है वैसे वैसे मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी देखने मिल रही है।
लोग अधिक लागत में फसल उगाते हैं और आखिर में उन्हें उनकी लागत भी प्राप्त नहीं होती ऐसे में किसानों की स्थिति काफी दयनीय हो गई है किसान आत्मह-त्या करने पर भी मजबूर हो गए हैं। समय के साथ परिवर्तन पृथ्वी का नियम है, फल स्वरूप किसानों ने और कृषि विज्ञान के विशेषज्ञों ने एक रास्ता निकाला है, जिसमें किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक खेती को जैविक तरीके से कर रहे हैं।

किसानों को फल फूल और जड़ी बूटी की फसल उगाने में कम लागत पर अधिक मुनाफा मिल रहा है, जिसके चलते अब किसानों को एक नई राह मिली है। अब किसानों को भी सरकार की तरफ से मुनाफा मिल रहा है।
ताजी और रंग बिरंगी सब्जियां ग्राहकों को करती हैं आकर्षित
दोस्तों जब भी हम बाजार जाते हैं, सब्जियां लेने तो हम ताजी और हरी-भरी दिखने वाली सब्जियों के तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। ऐसा कहा भी जाता है कि ताजी सब्जियां हरी-भरी और चटक दिखाई पड़ती है और उन सब्जियों में भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन और खनिज पाया जाता है। बीमारी में या फिर स्वस्थ व्यक्ति को लंबे समय तक स्वस्थ बने रहने के लिए डॉक्टर हरी सब्जियां खिलाने की सलाह देता है।

यदि हम बात करें शिमला मिर्च (Shimla Mirch) की तो शिमला मिर्च तीन तरह की आती है हरी लाल और पीली। इन शिमला मिर्च इस्तेमाल ज्यादातर चाइनीस रेसिपी में किया जाता है। ऐसे में मार्केट में हरी लाल पीली शिमला मिर्च की मांग ज्यादा होती है।
दोस्तों मार्केट में ताजी रंग-बिरंगे शिमला मिर्च देखकर लोग उनके तरफ बहुत जल्दी आकर्षित हो जाते हैं। साथ ही यह शिमला मिर्च बाजार की शान बन जाती है। इस लेख के माध्यम से हम आपको राजस्थान के अलवर जिले में हो रही शिमला मिर्च की खेती के बारे में जानकारी देंगे।
किसानों ने शुरू की शिमला मिर्च की खेती
दोस्तों राजस्थान (Rajasthan) के अलवर (Alwar) जिले के सब्जी बाजार में मिलने वाली रंग बिरंगी शिमला मिर्च आज से कुछ समय पहले अन्य राज्यों से मंगाई जाती थी, परंतु अब अलवर के अंतर्गत आने वाले कुछ गांव जैसे रामगढ़, उमरैण व बानसूर के चुनिंदा क्षेत्र में शिमला मिर्च की वैराइटी की खेती की जा रही। जिससे किसानों को काफी मुनाफा कमाने का मौका मिल रहा है।

आपको बता दें शिमला मिर्च की खेती ठंडे प्रदेशों में की जाती है, यह एक ठंडे इलाके की फसल है, परंतु राजस्थान में यह दो विधियों से की जा रही है, एक तो पॉलीहाउस निर्माण करके और दूसरा ग्रीन हाउस में इस फसल की खेती की जा रही है। जानकारी के अनुसार सिक्किम में शिमला मिर्च की खेती साल के 12 महीनों की जाती है यह एक ठंडा प्रदेश है, जहां इस फसल की पैदावार काफी ज्यादा होती है।
शिमला मिर्च की खेती के लिए अधिकारी की सलाह
कृषि अधिकारी मुकेश कुमार चौधरी के द्वारा किसानों को शिमला मिर्च की खेती के लिए कुछ जरूरी जानकारी दी गई है अधिकारी मुकेश चौधरी के अनुसार शिमला मिर्च के विशेष रूप से तीन रंग होते हैं, हरा लाल और पीला। यह रंग शिमला मिर्च की नस्ल पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से शिमला मिर्च की 4 वैरायटी होती हैं जिनमें अरका मोहिनी, अरका गौरव, कैलिफोर्निया वंडर, अरका बसंत शामिल है।
आगे बताते हैं कि शिमला मिर्च की खेती मैं 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत पड़ती है जब बीज अंकुरित होते हैं। उसके बाद पौधों की वृद्धि के लिए 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। अधिकारी मुकेश चौधरी का कहना है की इस फसल के लिए सभी प्रकार की मिट्टियां उपयोगी है परंतु यदि बलुई दोमट मिट्टी जिस का पीएच मान साथ होता है का उपयोग किया जाए तो फसल और भी ज्यादा अच्छी होती।
सरकार किसानों को दे रहे हैं सब्सिडी
कृषि अधिकारी मुकेश चौधरी का कहना है कि इस फसल की तैयारी नर्सरी से होती है और नर्सरी की शुरुआत उठी हुई नर्सरी से की जाती है। आगे भी बताते हैं कि एक हेक्टेयर जमीन में करीब ढाई सौ से 300 ग्राम बीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बीजों का रोपण करते समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि बीजों के बीच का गैप 15-15 सेंटीमीटर का होना चाहिए।

कृषि अधिकारी चौधरी बताते हैं कि कृषि विभाग की तरफ से शिमला मिर्च की खेती (Capsicum Farming) को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से किसानों को सब्सिडी भी दी जा रही है। यह सब्सिडी 50 से 75 प्रतिशत तक दी जा रही है।
ड्रिप सिस्टम का उपयोग करने वाले किसानों को 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है, यदि किसान SC-ST है, तो उसे निश्चित रूप से 75 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा यदि किसान पॉलीहाउस निर्माण करके शिमला मिर्च की खेती कर रहा है, तो उसे 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।




