एक 10वी फेल शख्स ने कबाड़ से रेल इंजन बना दिया, पिता के देहांत के बाद सपना पूरा कर दिया

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Rail Engine
10th failed young man made rail engine from junk, dream came true after father’s death. Rajnandgaon CG man Maniram made Train Engine.

Rajnandgaon: कहते है अगर मन में कुछ नया करने की कुछ बनने की इच्‍छा हो तो उस इच्‍छा को पूरे कॉन्‍फिडेंस के साथ में बिना रूके निरंतर परिश्रम करने से वह इच्‍छा एक दिन जरूर पूरी हो जाती है। अगर कुछ बनने की कुछ करने की इच्‍छा आपके मन में दृढ है, तो पढ़ाई या फिर घर की कोई भी परेशानी आढ़े नही आती है।

आज हम इस पोस्‍ट में ऐसे ही मेहनती दसवी फैल एक शख्‍स (10th Fail Man) की चर्चा करेंगे। जिसने अपने पिता का ड्रीम पूरा करने के लिये इलेक्ट्रिक इंजन को निर्मित कर दिया। यह रेंल इंजन (Rail Engine) शख्‍स ने कबाड़ की सहायता से बनाया है।

आपको बता दे कि शख्‍स के पिताजी यह चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ लिखकर रेलवे नौकरी करे तथा इलेक्ट्रिक रेल को चलाए। लेकिन इस सपने को सख्‍स ने कुछ अलग अंदाज मे पूरा किय है। क्‍या हे पूरी खबर विस्‍तार से पोस्‍ट की सहायता से जानते है।

आज हम जिस सख्‍स की बात कर रहे है वह राजनांदगांव (Rajnandgaon) के ब्‍लॉक डोंगरगढ़ में आते हे। वह बैलगांव के निवासी है। उनका नाम मनीराम लहरी है। मनीराम (Maniram) ने अपने स्‍वर्गवासी हो चुके पिता के ख्‍वाब को पूरा करने के लिये एक ऐसा इलेक्‍ट्रिकल इंजन बना दिया है, जोकि पूरी तरह कबाड़ से बना है।

यह इलेक्‍ट्रिकल इंजन (Electrical Engine) ऐसा है। जोकि बिजली की पावर से रेल पटरियों पर स्‍पीड के साथ में दोड़ता है। इस इंजन के बारे में बात करे तो यह इंजन 2 फिट की लंबाई का है। वही इसकी ऊँचाई 7 इंच की है। आपको बता दे कि यह जो इंजन मनीराम ने निर्मित किया है यह पूरी तरह पटरी पर चलने वाले बडे ट्रेन इंजन के ही समान है।

जब यह इंजन बनकर तैयार हुआ तो रेलवे के सभी अफसर इस अविष्‍कार को देखकर आश्चर्य चकित रह गये है। नागपूर मंडल के जितने भी अफसर थे, उनहें इस बात का यकीन ही नही हो रहा था कि किसी भी तकनीकी ज्ञान के बगैर एक साधारण से ग्रामीण ने यह इंजन वो भी कबाड़ से कैसे बना लिया। जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार मनीराम 10वी फैल है। ऐसे में अफसरो के लिये इस पर यकीन करना बहुत ही मुश्‍किल हो गया था।

मनीराम से जब इस विषय में जानकारी ली गई तो उन्‍होंने अपने और अपने परिवार के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि उनके पिताजी का नाम फागूराम लहरे था। वह रेल्‍वे में डीजल लोकोपायलट के पद पर थे। उनकी इच्‍छा थी की वह इलेकट्रिकल इंजन की कार को चालाए।

Jalsu nanak halt Railway station
Railway station is India Demo Photo

इस ख्‍वाब को पूरा करने के लिये वह ट्रेनिंग भी करने गये थे। लेकिन असमय बीमारी के कारण उनको वापस आना पड़ा। जैसे ही वह बीमार पड़े उनका यह सपना सपना ही रह गया। मनीराम बताते है कि उनके पिताजी जब अपना सपना पूरा ना कर सके तो उनकी इच्‍दा थी कि वह उनका यह सपना पूरा करे।

मनीराम के पिताजी चाहते थे कि मनीराम पढ़े और रेल्‍वे में नौकरी करे। हम सभी जानते है कि महामारी के समय में लॉकडाउन के चलते सभी सिस्‍टम फैल हो गये थे। सब अपने घर पर थे। इसी समय मनीराम के मन में एक नया आइडिया है।

उन्‍होंने सोचा कि क्‍यों ना घर में जो भी कबाड़ पड़ा है, उससे रेल का इंजन बनाया जाये। मनीराम ने सोचा कि अगर वह यह कर देंते है, तो उनके पिताजी का जो अधूरा सपना पूरा ना कर सके थे, वह पूरा हो जायेगा।

मनीराम ने इंजन बनाने के लिये घर में पड़े सभी प्‍लास्टिक, लोहा को इकट्ठा किया। इन सब को इकट्ठे के करने के बाद में मनीराम ने इंजन का निर्माण करना प्रारंभ कर दिया। इंजन बनाने के लिये जो मटेरियल मनीराम के घर पर नही थे।

वह मनीराम ने पड़ोसियो से मंगा लिये। 4 माह की मेहनत के बाद में मनीराम ने इंजन तैयार कर दिया। उन्‍होंने बताया कि रेल इंजन जो उनहोंने निर्मित किया है, उसे बनाने के लिये वह रोज जटकन्‍हार के रेल्‍वे स्‍टेशन जाया करते थे।

Central Terminus and Junction
Indian Railway Demo Photo Used.

मनीराम बताते है चूँकि उनके पिताजी रेल्‍वे में जॉब किया करते थे। ऐसे में जब भी विश्‍वकर्मा पूजा होती थी या फिर ऐसे भी प्रदर्शनी देखने व ट्रेन को देखने स्‍टेशन वह जाया करते थे।

वह बताते है जब वह प्रदर्शनी में जाते थे, तो वहॉं पर इंजन के सभी पार्टस तथा इसके ऑपरेट होने के सभी तरीको को बताया जाता था। वही सब चीजे मनीराम के दिमाग मे थी। जिसके चलते वह कबाड़ से रेल इंजन बना पाये।

आपको बता दे कि मनीराम ने रेल इंजन बनाने के साथ साथ इसे दोड़ाने के लिये 12 फीट लंबी पटरी भी तैयार की है। इस इंजन को मनीराम ने मुसरा रेल्‍वे स्‍टेशन के लोकार्पण के समय में सांसद संतोष पांडे, डीआरएम इन सबसे के सामने प्रदर्शित किया।

जब यह इंजन मनीराम ने प्रदर्शित किया, तो सभी इसे देखकर अचंभित हो गये। किसी को भरोसा ही नहीं हो रहा था कि एक दसवी फैल व्‍यक्‍ति इस तरह का इंजन बना सकता है। डीएम को इसकी खबर लगी, तो वह बेलगांव मनीराम के घर में पहुंचे और उनके प्रोजेकट की खूब तारीफ की।

मनीराम का मॉडल इतना फैमस हो गया है कि स्‍कूलो में उनके इंजन को प्रदर्शित किया जाने लगा है। मनीराम ने अपने इस कबाड़ के इंजन में बहुत बरीकी से रेल गाइड बुक, सस्‍पेंशन एक्‍स्‍प्रेस, पहिए, फॉर सीबीएसई कपलर, पायदान, ब्रेक शू माइक्रोप्रोसेसर इन सभी को लगाया है।

वही उनका इंजन ऊँचाई पर चढ सके, इसके लिये रेल फ्लोइंग पाइप तथा इलेक्ट्रिक बल से जॉइन्‍ट करने को पेटो भी जॉइन्‍ट किया है। मनीराम ने जो किया है, वह पढ़े लिखे भी नही कर पाते। मनीराम ने हर किसी को हैरान किया है। उनकी प्रतिभा काबिलिये तारीफ है।

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