15 फीट ऊंचे पेड़ पर लगे हुये कद्दू देखकर हैरान रह जाओगे, लोग विदेशों से इसे खाने बिहार आते हैं

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Pumpkin Tree Calabash
Pumpkin Tree seen in Bodh Gaya Bihar. American pumpkin grows on a tree in Gaya. Calabash tree and kaddoo fruits grows in Bihar.

Bodh Gaya: आप सभी ने जीवन में कभी ना कभी कद्दू (Pumpkin) जरूर खाया होगा, यह ऐसी सब्जी है जो, किसी भी तरह के प्रोग्राम में हमारे भारतीय समाज के लगभग हर क्षेत्र में बनाई जाती है। कद्दू एक तरफ सब्जी का काम भी करता है दूसरी तरफ से कुछ मिठाईयां भी बनाई जाती है।

आपने देखा होगा कि कद्दू का भजन 1 किलो से लेकर के 15 से 20 किलो तक के हो सकते हैं। जो आकार में बहुत बड़े होते हैं और यही वजह है कि कद्दू की खेती जमीन से सटके की जाती है। कद्दू पेड़ में ना लग कर जमीन में ही उठता है। परंतु आज हम आपसे एक अलग तरह के कद्दू (Kaddoo) के बारे में बात करने वाले हैं जो, 15 से 30 फीट ऊंचे पेड़ में होता है।

आप हैरान हो गए होंगे की इतनी ऊंचाई पर कद्दू टिकेगा कैसे। कद्दू की तरह दिखने वाला यह पौधा वास्तव में किसी दूसरे फल का है। स्वाद में नींबू की तरह थोड़ा खट्टा होता है, और इसको खाने के शौकीन विदेशी है। आइए जानते हैं, यह पौधा कहां से आया इसके फायदे क्या है।

बोधगया की इस विशेष नर्सरी में पाया जाता है यह विशेष कद्दू

बोधगया के एक प्रसिद्ध होटल डेल्टा ने कभी नहीं सोचा होगा कि उनके द्वारा नर्सरी में लगाए जाने वाला लौकी की तरह फल वाला यह पेड़ उसे पूरे देश में फेमस कर देगा। दोस्तों जिस कद्दू के पेड़ की हम बात कर रहे हैं, वास्तव में होटल डेल्टा ने अपनी नर्सरी की सुंदरता को बढ़ाने के लिए इस प्लांट को लगवाया था।

जैसे जैसे से पेड़ बड़ा हुआ उसमें कद्दू की तरह दिखने वाला यह फल जो लगभग 20 इंच की गोलाई का होता है। लौकी के शेप में उसकी चर्चा पूरे शहर में होने लगी। देखने वालों की भीड़ लगने लगी। खाने में इसका स्वाद कुछ नींबू की तरह हल्का खट्टा होता है।

सबसे बड़ी बात यह फल 12 महीने होता है, इसका कोई सीजन नहीं। होटल मैनेजमेंट से बातचीत के दौरान पता चला कि ये प्लांट विदेश से बुलाया गया है, जो कि अमेरिकी (American) मूल का बताया जाता है।

राष्ट्रीय पौधे का दर्जा दिया गया सेंट लूसियाना में

आपको बताना चाहेंगे इस पेड़ का वास्तविक नाम कलाबस (Calabash) है। यह उत्तरी अमेरिका (North America) के कैरेबियन देश में पाया जाता है। सेंट लूसिया नमक देश ने तो इस पौधे को अपना राष्ट्रीय पौधा घोषित कर रखा है।

वास्तव में इस पेड़ के बहुत सारे औषधीय गुण हैं, जो अमेरिकी देश के क्लाइमेट के हिसाब से लोगों को सेहत में फिट रखने के लिए बहुत मददगार होता है। भारत में भी इस पेड़ का बीज अमेरिका के इसी उत्तरी कैरेबियन क्षेत्र से पहुंचा है। इसलिए प्राय है जब भी कोई पर्यटक अमेरिकन मूल का होता है, तो इस फल की तरफ स्वयं ही खिंचा चला आता है।

कई औषधीय गुणों से परिपूर्ण है यह पौधा करता है कई बीमारियों में मदद

डेल्टा होटल में इस प्लांट की देखभाल करने वाले मैनेजमेंट की तरफ से यह जानकारी मिली। ये फल यूंही इतना फेमस नहीं है, दरअसल इसमें बहुत सारे आयुर्वेदिक गुण भी विद्यमान है। कलाबास में आयरन अधिक मात्रा में पाया जाता है, जिस वजह से महिलाओं की सेहत के लिए यह अमृत की तरह काम करता है।

साथ ही इस फल की टेंडेंसी ठंडी होती है, इस वजह से खाने वाले का स्ट्रेस एवं तनाव दूर होता ह साथ ही शरीर काफी रिलैक्स महसूस करता है। जहां एक ओर इसको खाने से एनर्जी तो फील हो ही रही है, वहीं डायबिटिक पेशेंट के लिए भी यह काफी फायदेमंद माना जाता है।

वियतनाम थाईलैंड जैसे देशों के पर्यटक खींचे चले जाते हैं इसे खाने

होटल मैनेजमेंट से मिली जानकारी के अनुसार बोधगया में आने वाले ज्यादातर विदेशी पर्यटक जैसे, वियतनाम, थाईलैंड या अमेरिका से आने वाले सभी पर्यटक इस फल को खाने के लिए उत्साहित रहते हैं।

कुछ लोग इसे काट कर के खाते हैं और बहुत से लोग इसका जूस पीने पसंद करते हैं। काफी पर्यटक तो इसके स्वाद को पसंद करने के कारण इस पौधे का छोटा प्लांट अपने साथ अपने देश लेकर के जाते हैं। ताकि वह अपनी नर्सरी में इसे उगा सके।

निश्चय ही दोस्तों अगर आप बोधगया के टूर पर जाने वाले हैं तो, एक बार होटल डेल्टा की नर्सरी में कलाबस फ्रूट को जरूर टेस्ट करें। हो सकता है यह अमेरिकी फल आपको भी पसंद आ जाए और आप इसका प्लांट अपने घर में लगा ले।

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