आंगनवाड़ी में सहायिका माँ के बेटे ने किया कमाल और UPSC क्रैक कर बड़ा अफसर बन गया

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Krishan Kumar Singh UPSC
Anganwadi worker Mother's son cleared UPSC exam and becoming officer now. UPSC Success story of Krishan Kumar Singh from Orchha MP.

Orchha: इंसान की काबिलियत ही है, जो उसे वह मुकाम दिलाती है, जिसके वह हकदार होते हैं। जरूरी नहीं कि सफलता उन्हीं को मिले जो सर्व सुविधा से युक्त हैं। लोगों की माने तो यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) ऐसी परीक्षा है, जो कठिन परिश्रम मांगती है, क्योंकि इसे देश की सबसे बड़ी परीक्षा भी कहा गया है।

हर युवा का सपना होता है कि वे अपने माता पिता को ढेर सारी खुशियां दे सके। उन्हें वो दे सकें जो उन्होंने पूरे जीवन नहीं देख पाया है। अक्सर माता-पिता ही है, जो अपने बच्चों की सफलता के लिए कुर्बानियां देते हैं, वह अपना सुख सुविधा भरा जीवन भी कुर्बान कर देते हैं। इसीलिए बच्चों का भी फर्ज होता है कि वे अपने माता-पिता के लिए कुछ ऐसा करें जिससे उनका जीवन सुख में हो सके।

कुछ ऐसा कर दिखाया है गुदड़ी के लाल ने। मां आंगनबाड़ी (Anganwadi) की सहायिका थी, यूपीएससी क्रैक करके मां को फक्र करने का मौका दिया। तो आइए इस लेख के माध्यम से जाने उस युवक के बारे में।

कृष्ण कुमार सिंह ने किया कमाल

कृष्ण कुमार सिंह (Krishan Kumar Singh) एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखते हैं, उनके पिता पेशे से वकील है और मां बेलबारी आंगनबाड़ी में सहायिका के पद पर कार्यरत हैं और उसके दादा किसान हैं।

UPSC HQ
Union Public Service Commission

कृष्ण कुमार ने अपने कठिन परिश्रम और अथक प्रयास के बाद यूपीएससी परीक्षा याने संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा में 329 वी रैंक (329 Rank) हासिल कर अपने माता-पिता का सीना चौड़ा कर दिया है। मात्र 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने दूसरे प्रयास में ही इस सफलता को हासिल किया है। उनकी इस कामयाबी ने पूरे जिले को गौरव से भर दिया है।

कहानी है मध्यप्रदेश की

कृष्ण कुमार मध्य प्रदेश के अंतर्गत आने वाला निमाड़ी जिला का पृथ्वीपुर तहसील के अंतर्गत आने वाला गांव पपावनी नेगुआ में पले बढ़े हैं, उनका कुटुंब खानदान इसी गांव का है। परंतु उनके जन्म के बाद ही उनके माता-पिता ओरछा में आकर रहने लगे यहीं से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा का शुभारंभ किया।

कृष्ण कुमार सिंह के पिता रामकुमार राजपूत ओरछा अदालत में वकील के पद पर कार्यरत हैं और माता ममता राजपूत ओरछा के आगे एक छोटे से गांव बेलीबाड़ी मैं आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर कार्यरत हैं। वही उनके दादाजी नाथूराम राजपूत अपने गांव में ही खेती पाती करते हैं। उनके परिवार का माहौल पढ़ाई लिखाई वाला था इसीलिए वे आगे बढ़ते गए।

छोटे शहर में पढ़ने के बाद भी हासिल किया बड़ा पद

छोटे से इलाके में होने के कारण कृष्ण कुमार की पढ़ाई भी उन्हीं छोटे गांव में हुई। वे बताते हैं कि कक्षा 5वी तक पढ़ाई उन्होंने अपने ही गांव पापवानी से ही प्राप्त की। तत्पश्चात कक्षा आठवीं की पढ़ाई उन्होंने निमाड़ी से कीे।

फिर उसके बाद कक्षा दसवीं तक उन्होंने ओरछा (Orchha) से अपनी पढ़ाई की। कक्षा बारहवीं के बाद उन्होंने स्नातक की पढ़ाई की उन्होंने अपना स्नातक इंग्लिश लिटरेचर से पूरा किया, क्योंकि कृष्ण कुमार बचपन से ही एक होनहार छात्र थे।

यूपीएससी की तैयारी की दिल्ली से

भले ही उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश के छोटे-छोटे गांव से की, परंतु यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने दिल्ली को चुना और वे सफल भी हुए। कहते हैं छोटे शहर का बच्चा यदि बड़े शहर में जाता है, तो वह बिगड़ जाता है, परंतु कृष्ण कुमार के साथ ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि कृष्ण कुमार ने बचपन से ही पढ़ाई को अन्य चीजों से ज्यादा महत्व दिया।

आखिर में उन्होंने यूपीएससी में सफलता हासिल कर ली। यह सफलता कोई आम बात नहीं है, बल्कि अपने आप में ही उपलब्धि है, जो कृष्ण कुमार को प्राप्त हुई। 23 वर्ष की उम्र में ही एक अधिकारी के पद पर नियुक्त किए जाएंगे। कृष्ण कुमार को हमारी तरफ से उनके उज्जवल भविष्य की ढेर सारी शुभकामनाएं।

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