
Bokaro: दोस्तों विज्ञान ने हर कदम पर हर क्षेत्र में दिनों दिन काफी तरक्की की है हमारा एक ही उद्देश्य रहा है कि किसी ने किसी तरह हमारा सामाजिक जीवन अधिक से अधिक सुविधाजनक हो एवं सुरक्षित रहे। इस क्रम में बुजुर्गों के लिए ढेरों अविष्कार होते रहे हैं, जिन्होंने उनके आराम के साथ-साथ सुरक्षा को भी बढ़ाया है।
बुजुर्गों की सुविधा हेतु कान में सुनने की मशीन व्हीलचेयर से लेकर के तरह-तरह के अविष्कारक। इसी सिलसिले पर आज हम आपको शेयर करने वाले हैं, एक बहुत ही साधारण परंतु महत्वपूर्ण अविष्कार जो किया है।
सिर्फ नौवीं क्लास की छात्रा ने उसका दावा है कि इस बैसाखी के जरिए बुजुर्ग ना केवल चलने में सक्षम रहेंगे, बल्कि थकान आने पर वैशाखी को कुर्सी में कन्वर्ट (Crutch To Chair) करके बैठकर आराम भी कर सकेंगे एवं कुछ छोटी-छोटी यूटिलिटीज भी जोड़ी गई है, जिनसे अंधेरे में चलने के लिए टॉर्च एवं इमरजेंसी में मोबाइल चार्ज करने के लिए पावर बैंक जैसी व्यवस्थाएं भी जोड़ी गई है।
इस शहर की रहने वाली है प्रियंका
झारखंड का एक जिला है बोकारो जो अपने स्टील प्लांट की वजह से प्रसिद्ध है। उसके अंतर्गत एक छोटा सा खंड आता है, जिसे चास के नाम से जाना जाता है, वहीं की रहने वाली है हमारी यह होनहार छात्रा। प्रियंका (Priyanka) राम रुद्रा प्लस टू हाई स्कूल मैं अभी नौवीं क्लास की पढ़ाई कर रही हैं।
पढ़ाई के दौरान ही एक आईडिया के चलते उन्होंने यह बैसाखी (Magical Crutches) का निर्माण किया है। बातचीत के दौरान प्रियंका से जो भी जानकारी मिली, वह हम आपसे शेयर करने वाले हैं कि कैसे यह बैसाखी मनाने का आइडिया आया।
दादाजी से मिली प्रेरणा इस अविष्कार की
दोस्तों प्रियंका से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने बताया कि उनके दादा जी अब उम्र के हिसाब से काफी बुजुर्ग हो चले हैं, जिसके कारण प्रियंका उन्हें कई बार चलने में मदद भी करती है।
ऐसे में दादाजी हमेशा उसको कहते रहे हैं की कुछ ऐसी सुविधा होनी चाहिए कि बुजुर्ग यदि चलते चलते किसी रास्ते पर थक जाए या आराम करना चाहे, तो तुरंत कोई सुविधा मुहैया हो सके।
उनकी इसी बात से प्रियंका को प्रेरणा आई कि क्यों ना वैशाखी को ही कुर्सी में कन्वर्ट कर दिया जाए। लेकिन एक चैलेंज भी था की कुर्सी अटैच करने के बावजूद वैशाखी का वजन हल्का हो ताकि एक बुजुर्ग उसे मैनेज कर सके। इन पहलुओं पर ध्यान रखते हुए इस बैसाखी का निर्माण किया।
पहली बार विज्ञान प्रदर्शनी में किया प्रदर्शन जहां से मिली पहचान
प्रियंका के वैशाखी निर्माण के तुरंत बाद ही अंतर जिला स्तरीय स्कूलों के मध्य एक विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें उस प्रखंड के सभी स्कूलों ने हिस्सा लिया। सभी स्टूडेंट को तीन ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप था 6 से 8 क्लास, दूसरा ग्रुप था 9वी से दसवीं ग्रुप एवं तीसरे में 11वीं 12वीं के छात्रों को रखा गया।
Bokaro 9th class girl Priyanka made magical crutches for the elderly, if you get tired then make a chair, charge your mobile whenever you want. pic.twitter.com/Pej9iuTm6r
— sanatanpath (@sanatanpath) January 3, 2023
सभी स्कूलों ने अच्छा प्रदर्शन किया, एवं अलग-अलग ग्रुप में अलग-अलग स्कूलों को जीत मिली। परंतु राम रुद्रा प्लस टू हाई स्कूल को विशेष दर्जा मिला, प्रियंका के वैशाखी अविष्कार के कारण, सभी ने उसकी खूब तारीफ की।
शिक्षा अधिकारी ने बताया सकारात्मक विचार के परिणाम
विज्ञान प्रदर्शनी के आयोजन के दौरान शिक्षा से जुड़े काफी अधिकारी मौजूद रहे। एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी श्रीमती प्रतिमा दास ने बच्चों के पार्टिसिपेशन पर काफी प्रशंसा जाहिर की और बताया कि आज देश के छोटे छोटे से गांव के बच्चे आगे चलकर कुछ बड़ा जरूर करेंगे।
फिर प्रियंका के द्वारा किए गए वैशाखी निर्माण पर उन्होंने विशेष जोर दिया कि प्रियंका ने ना केवल बुजुर्गों की सुविधा के लिए यह खास बैसाखी बनाई। बल्कि इमरजेंसी जरूरतों को देखते हुए फ्लैश टॉर्च एवं मोबाइल के लिए पावर बैंक जैसी फैसिलिटी की भी व्यवस्था बनाना एक दूर की सोच का नजरिया है। हमारा प्रयास रहेगा कि हम इन बच्चों को एक बड़ा प्लेटफार्म प्रदान कर सकें, जहां यह अपने आईडिया से देश के लिए कुछ अच्छा आविष्कार कर पाए।



