शख्स ने दिल्ली और कोटा जैसी पढ़ाई गांव में की, 7 से 8 घंटे की पढ़ाई में IIT मैंस में सफलता हासिल हुई

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Pratham Raj IIT
Pratham Raj from Siwan district cleared IIT Mains exam without coaching at village. How Pratham Raj cracked this exam by self study.

Photo Source: Social Media

Siwan: अट्रैक्शन ऑफ लॉ के कारण हर व्यक्ति अपने पसंद की हर चीज को बहुत ही आसानी से पा सकता है। जीवन में सफलता पाने के लिए दृढ़ निश्चय और उसे पाने की चाहत ही व्यक्ति को सफल होने में मदद करती है। दोस्तों हर वर्ष लाखों युवा अपनी पसंद की नौकरी पाकर अपना जीवन अच्छी तरह व्यतीत कर रहे होते हैं।

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो कई वर्षों की मेहनत के बाद भी असफल होते हैं और अपना फील्ड ही बदल लेते हैं। जितने भी सफल लोग हैं, उनके अनुसार सफलता प्राप्त करने का एक ही मार्ग है और वह एक मार्ग है अपने लक्ष्य को पाने की जी तोड़ मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति चाहत। आज हम एक ऐसे ही शख्स की बात करने वाले हैं, जिसने आईआईटी मेंस की परीक्षा (IIT Mains Exam) में 98 फ़ीसदी अंकों के साथ जोरदार सफलता प्राप्त की साथ ही सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले छात्र बने।

जाने प्रथम राज के सफलता की कहानी

हम बात कर रहे हैं सिवान (Siwan) जिले के जुड़कन गांव के आईआईटी टॉपर प्रथम राज्य की। यह वही युवा है जिसने आईआईटी मेंस में 98 फ़ीसदी अंक प्राप्त करके सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करने का रिकॉर्ड बनाया है। बात करें प्रथम राज की स्कूली शिक्षा की। तो आपको बता दें उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सिवान से ही प्राप्त की जहां कक्षा 12वीं में जिला टॉप करके पूरे जिले में अपना नाम का परचम लहराया।

12वीं अच्छे अंको से पास करने के बाद उन्हें आईआईटी में प्रवेश लेना था, इसके लिए उन्होंने 12वीं के तुरंत बाद तैयारी शुरू कर दी। प्रथम राज ने अपनी मेहनत की दम पर वर्ष 2022 में आईआईटी प्रीलिम्स और आईआईटी मेंस में 98 फीसदी अंक प्राप्त किए। साथ ही पूरे सिवान जिले का नाम रोशन किया।

जाने प्रथम राज्य की स्टार्टरजी के बारे में

आपको बता दें 98 फ़ीसदी अंक प्राप्त कर IIT जैसी बड़ी संस्था में सिलेक्ट होने के बावजूद भी प्रथम राज (Pratham Raj) आईआईटी कॉलेज में एडमिशन नहीं लिया। प्रथम राज कंप्यूटर इंजीनियरिंग (Computer Engineering) करना चाहते थे, परंतु आईआईटी कॉलेज में कंप्यूटर इंजीनियरिंग ना होने की वजह से यह अपॉर्चुनिटी छोड़ दी। परिवार का दबाव और खुद पर विश्वास होने की वजह से वह यह काम काफी आसानी से कर गए।

प्रथम राज कहते हैं कि हर वर्ष लाखों अभ्यार्थी दिल्ली-कोटा जैसे बड़े-बड़े शहरों में कोचिंग के लिए भटकते हैं। साथ ही लाखों रुपए खर्च करते हैं। इतना करने के बाद भी कुछ ही लोग हैं, जिन्हें सफलता प्राप्त हो पाती है और काफी सारे लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें सफलता में मिलना काफी मुश्किल होता है। बात करें प्रथम राज्य की तो एक गांव में रहते हुए उन्होंने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी कर यह सफलता हासिल की है।

7 से 8 घंटे तक करते थे पढ़ाई

एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रथम राज ने किसी परिसंस्था में ट्यूशन नहीं ली बल्कि वे स्वयं 7 से 8 घंटे रोजाना सेल्फ स्टडी करते थे। प्रथम राज कहते हैं कि यदि किसी विद्यार्थी का बेस मजबूत है, तो वह स्वयं 7 से 8 घंटे पढ़ाई करके आईआईटी जैसे कठिन परीक्षाओं को आसानी से पास कर सकते हैं। हर वर्ष लाखों अभ्यार्थी दिल्ली कोटा जैसे बड़े शहरों में जाकर लाखों रुपए महीने का खर्च कर देते हैं।

उसके बाद भी सिलेक्शन मिलना काफी कठिन होता है। प्रथम राज सिवान कोर्ट के अधिवक्ता जिला अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष पंकज सिंह के भतीजे सरकारी स्कूल के शिक्षक रेणुका सिंह बड़े सुपुत्र हैं। जो बचपन से ही मेधावी छात्राओं में गिने जाते हैं। प्रथम राज कहते हैं कि छात्रों को बड़े शहर में किसी बड़े इंस्टिट्यूट में पढ़ाई करने की जरूरत नहीं है वे यूट्यूब की मदद से और सेल्फ स्टडी करके बड़े से बड़े परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

आईएएस अधिकारी बनना चाहते हैं प्रथम राज्य

प्रथम राज कहते हैं कि अभ्यार्थी को रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई करने की जरूरत है, साथ ही ज्यादा से ज्यादा प्रश्नों को हल कर वह खुद किसी पड़ी परीक्षा में चयनित होने लायक बन ही जाता है। प्रथम राज बताते हैं कि उनका अगला टारगेट 4 जून को होने वाली आईआईटी मेंस की परीक्षा है, जिसमें सफलता प्राप्त करके दिल्ली कानपुर या वाराणसी से कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल कर यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ करेंगे।

जिसमें सफलता प्राप्त कर वे अपने पिताजी और नाना जी मास्टर दीनानाथ सिंह का सपना पूरा करेंगे। प्रथम राज्य का कहना है कि वह विदेशों में रहकर नौकरी नहीं करना चाहते, बल्कि अपने देश में रहकर देश हित के लिए कार्य करना चाहते हैं।

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