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Chennai: हमारे देश के टेलेंट की कमी नहीं और देश में इन्वेंटर्स भरे पड़ें है। भारत के लोग प्राचीन काल से भी नई नई खोज करते आ रहे है। आज हम और मानव सभ्यता जंगल से उठकर सड़कों पर आ गई है। ऐसे में अच्छी सड़क हमारी जरुरत है। क्या आपने सुना है कि सड़क का निर्माण प्लास्टिक (Plastic) का उपयोग करके भी संभव है।
सड़क तो डामर और गिट्टी और सीमेंट से बनाई जाती है। परन्तु प्लास्टिक सड़क सच में देश में मौजूद है और इस नए तरीके के प्रयोग के पीछे जो व्यक्ति हैं, वह कचरे का पुनः प्रयोग करके बेहतर, अधिक टिकाऊ और कम कीमत में सड़कों का निर्माण करते हैं और वह व्यक्ति हैं 72 वर्षीय प्रोफेसर राजगोपालन वासुदेवन (Professor Rajagopalan Vasudevan)।
आज हमारे बीच “प्लास्टिक मैन ऑफ़ इंडिया” के नाम से मशहूर प्रोफसर वासुदेवन मदुरई के पास स्थित त्यागराजार कॉलेज ऑफ़ इंजिनीरिंग में केमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं। प्रोफेसर वासुदेवन उस शहर से आते है, जहाँ रोज़ाना लगभग 400 मीट्रिक टन ठोस कचरा एकत्रित किया जाता है।
प्रोफेसर ने इन्हीं कचरों के ढेर में एक अवसर ढूंढ निकाला। उन्होंने बुद्धिमत्ता से आम प्लास्टिक, जिसमें ग्रोसरी बैग्स और रेपर भी शामिल है, को डामर में कोलतार के लिए उपयोग में लाने के लिए रूपांतरित किया। प्रयोगशाला में जब बेकार प्लास्टिक को डामर के साथ गरम किया गया और उसे पत्थरों के ऊपर डाला गया, तब उत्साहजनक रिजल्ट प्राप्त हुए।
फिर प्रोफेसर वासुदेवन ने पहली प्लास्टिक सड़क अपने कॉलेज कैंपस में बनाई जो सफल रही। पहले वेस्ट या ख़राब प्लास्टिक को मशीन के द्वारा कतरनों में बदला जाता है और कंकर या बजरी को 165 डिग्री पर गर्म किया जाता है और फिर दोनों को एक मिक्सिंग चैम्बर में डाला जाता है। तापमान के चलते प्लास्टिक पिघलने लगता है और फिर इसमें 160 डिग्री पर गर्म डामर को मिलाया जाता है और सड़कों पर फैलाया जाता है।
@KTRTRS @KTRoffice Sir, I believe we should make use of Professor Rajagopalan Vasudevan's plastic roads invention for our Telangana roads to make them pothole free pic.twitter.com/Wk6lmqUYjk
— Kevin Ethan Edwards (@K_E_Edwards) August 28, 2018
डामर के मुकाबले प्लास्टिक से निर्मित सड़क (Plastic Road) ज्यादा मजबूत होती है और बारिश और गर्मी दोनों से यह ख़राब नहीं होती। सड़कें 10 सालों तक खुरदुरी नहीं होती, इनमें क्रैक भी नहीं आता और गड्ढे भी नहीं बनते और इसके चलते इसमें अधिक खर्चा भी नहीं आता है।
आपको बता दें की प्लास्टिक से निर्मित सड़कों से एक तो कचरा कम होता है और दूसरा चर्चा भी कम होता है। प्लास्टिक की सड़कों के मुकाबले डामर की सड़कों में 15% तक का ज्यादा खर्च होता है। इसके बनाने के तरीके के लिए कोई टेक्निकल ज्ञान की जरूरत नहीं होती। इस तकनीक से अभी तक देश के 11 राज्यों में 10,000 किलोमीटर से अधिक पक्की सड़क बन चुकी हैं। इनके चलते पर्यावरण के लिए खतरनाक माने जाने वाले प्लास्टिक का सही यूज़ भी हो पा रहा है।
Plastic Man of India🙏
Prof Rajagopalan Vasudevan,Professor of Chemistry at Thiagarajar College of Engineering, Madurai#environnement pic.twitter.com/cQ2qYGj6b8
— Sri (@srithh) September 10, 2018
आपको बता दें की हमारे देश रोज़ 15,000 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। ऐसे में प्रोफेसर वासुदेवन (Professor Rajagopalan Vasudevan) का यह खोज करने इससे छुटकारा पाने और सही इस्तेमाल करने का तरीका दिया है। प्रोफेसर वासुदेवन ने देश को एक कीमती गिफ्ट दिया है, जिसका सही इस्तेमाल करने की जरुरत है। अब यह प्रोफ़ेसर “Plastic Man of India” के नाम से भी मशहूर हैं।
President Kovind provided the Padma Shri to Professor #Rajagopalan Vasudevan. They patents the method of reuse of #plastic waste in road construction. The technology has given the government a free. It has created 5,000 #KMS roads in 11 states… pic.twitter.com/etwr7gd2Rn
— Chirag Patel18 (@ChiragVasani15) March 21, 2018
इस जानकरी के मीडिया में आने के बस दे कई देशी-विदेशी कंपनियों ने राजगोपालन को पेटेंट खरीदने का ऑफर दिया, लेकिन लालच ना करके, उन्होंने भारत सरकार को यह टेक्नोलॉजी फ्री में गिफ्ट कर दी। साल 2018 के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में उन्हें देश के चौथे सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया।



