
Panna: ऐसा माना जाता है कि एक बच्चे की प्रथम गुरु मां होती है। और दूसरे शिक्षक जो सही मार्ग पर चलने के लिए राह दिखाते हैं। एक गुरु का होना किसी भी व्यक्ति के जीवन में बेहद जरूरी है गुरु ही वह इंसान है जो बच्चों को मार्ग प्रशस्त कर आता है।
एक अच्छा जीवन जीने के लिए और सफल आदमी बनने के लिए गुरु का योगदान बेहद जरूरी है। हर सफल इंसान के पीछे किसी एक इंसान का हाथ होता है, जिससे वे सफल हो पाते हैं। गुरु की परंपरा आज से नहीं बल्कि कई पीढ़ियों से चली आ रही है, महाभारत काल हो या रामायण हर किसी में गुरु का स्थान एक महत्वपूर्ण स्थान बताया गया है।
ऐसा माना जाता है कि ज्ञान बांटने से कम नहीं बल्कि और भी ज्यादा बढ़ता जाता है। इसीलिए किसी भी ज्ञानवान व्यक्ति से ली गई शिक्षा हमेशा जीवन में किसी ना किसी मोड़ पर काम आती ही है।
आज इस लेख के माध्यम से हम आपको एक ऐसे शिक्षक (Retired Teacher) के बारे में बताने वाले हैं, जिन्होंने रिक्शा चलाया दूध बेचा उसके बाद एक शिक्षक के पद पर कार्यरत रहे और रिटायरमेंट के बाद मिले धन को बच्चों की शिक्षा के लिए दान में दे दिया। आइए जाने उस महान दानवीर शिक्षक के बारे में।
4000000 रुपए गरीब बच्चों को किए दान
दोस्तों हम बात कर रहे हैं एक साधारण परिवार में जन्मे विजय कुमार की जिन्होंने अपने जीवन में रिक्शा चलाया, दूध बेचा और जीवन भर बच्चों को शिक्षित करते रहे। एक सरकारी शिक्षक हैं, परंतु उन्होंने कभी सरकारी नौकरी होने का फायदा नहीं उठाया, बल्कि उन्होंने इस फायदे को उन गरीब बच्चों को सौंपा जो शिक्षा के लिए हमेशा मोहताज रहे हैं।
अपना जीवन चलाने के लिए उन्होंने दूध भी बेचा बेहद संघर्षों के बाद उन्होंने जब टीचर की नौकरी प्राप्त की तब उसका लाभ भी उन्होंने नहीं उठाया बल्कि जीवन भर एक गुरु बनकर बच्चों को शिक्षा प्रदान की और रिटायरमेंट के पश्चात मिलने वाला रिटायरी का पैसा गरीब बच्चों में दान कर समाज में एक मिसाल कायम की।
कौन है विजय कुमार
रिपोर्ट के अनुसार विजय कुमार चंसोरिया (Vijay Kumar Chansoria) एक साधारण से परिवार में जनमें एक साधारण से शिक्षक हैं। वे मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना (Panna) जिले के अंतर्गत आने वाला सरकारी प्राथमिक स्कूल के शिक्षक रहे हैं। उन्होंने इस स्कूल में 39 वर्ष अपनी सेवा दी है।

बताया जा रहा है कि बीते दिनों उन्होंने रिटायरमेंट लिया है, उनकी रिटायरमेंट की खुशी में उनके सहकर्मियों ने उनके लिए एक प्रोग्राम आयोजित किया प्रोग्राम के दौरान ही उन्हें रिटायरमेंट के बाद भविष्य निधि योजना के तहत 4000000 रुपए दिए गए, जिसमें से उन्होंने खंडिया के सरकारी स्कूल के छात्रों में इन 4000000 रुपए को बांट दिया वे चाहते हैं कि उनके इस धन से बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपना भविष्य संवार सके।
रिटायर्ड शिक्षक (Retired Teacher) विजय कुमार चनसोरिया के शब्द
विजय कुमार चनसोरिया का कहना है कि उन्होंने यह फैसला अपने परिवार पत्नी और बच्चों से पूछ कर लिया है। उनकी पत्नी और बच्चों का भी कहना है कि इन पैसों से यदि गरीब बच्चों की मदद होती है तो उन्हें इसमें बेहद खुशी मिलेगी।
विजय कुमार बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन को बेहद संघर्षों से गुजारा है। जब उनके पास शिक्षक की नौकरी नहीं थी। उस वक्त उन्होंने रिक्शा चलाया दूध बेचा और अपने परिवार को संभाला है।
ईश्वर की कृपा से जब उनकी जॉब लग गई तो उन्हें बेहद खुशी हुई तभी उन्होंने फैसला किया, कि वह अपने फर्ज को बहुत अच्छी तरह निभाएंगे। वैसे तो एक शिष्य का फर्ज होता है। अपने गुरु को गुरु दक्षिणा देने का परंतु एक गुरु ने दान देकर कई बच्चों के जीवन को सभारा है।
विजय कुमार की सहमति में ही है परिवार की सहमति
विजय कुमार कहते हैं कि सन 1983 में उन्हें शिक्षक की नौकरी प्राप्त हुई थी तब से वह लगातार अपने कर्तव्य को भलीभांति निभा रहे थे। विजय कुमार आगे कहते हैं कि उनके बच्चे अच्छी तरह शिक्षित और सक्सेसफुल है।
उनका बेटा एक अच्छी नौकरी पर है और बेटी उनकी विवाहित है। उनके सभी बच्चे अपने अपने निर्धारित लक्ष्य की तरफ है, इसीलिए उन्हें 4000000 रुपए जो उन्हें भविष्य निधि के तौर पर मिले थे। इन पैसों से उन्होंने उन बच्चों की मदद की जो अभावग्रस्त जीवन जी रहे हैं।
इनमें सबसे ज्यादा व बच्चे शामिल हैं, जो शिक्षा से कोसों दूर है। वह कहते हैं कि उन्हें इन बच्चों की मदद करके बेहद खुशी मिलती है, क्योंकि इससे पहले भी बे इन बच्चों की काफी मदद करते थे, तब उनके चेहरे की खुशी देखकर उन्हें बेहद खुशी होती थी।



