गरीबी में अंडे की रेहड़ी लगाकर पढाई की, फिर कड़े संघर्ष से UPSC पास कर अफसर बने: Success Story

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IAS Manoj Kumar UPSC
Once an Egg Vendor, IAS Manoj Kumar Roy Success Story: Manoj Kumar Roy from Bihar cleared his UPSC exam in his 5th attempt: Ek Number

Patna: सफलता की एक ही कुंजी है और वह है कड़ी मेहनत और संघर्ष का मिश्रण। इस कहावत को सच कर दिखाया बिहार के रहने वाले मनोज कुमार रॉय ने। उन्होंने हर चुनौती का दटकट सामना किय और अपने सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

अंडे और सब्ज़ी की रेहड़ी लगा कर अपना जीवन यापन करने वाले मनोज ने अपनी मेहनत और संघर्ष के बल पर अपने पाँचवे प्रयास में UPSC परीक्षा पास की। इस कामयाबी में दोस्तों का भी साथ रहा और दोस्तों द्वारा समय पर दी गयी अच्छी सलाह ने उन्हें यह सफलता दिला दी।

मनोज कुमार (Manoj Kumar) बिहार (Bihar) के सुपौल जिले के रहने वाले हैं। वह एक हिंदी अख़बार को बताते है की जब वह स्कूल में थे, तब उनके घर पर उन्हें अक्सर यही बताया जाता था कि पैसा कमाना शिक्षित होने से ज़्यादा ज़रूरी है और इसलिए उन्हें पैसा कमाने पर ध्यान देना चाहिए ना की पढ़ने पर।

इसी बात के साथ मनोज 12वीं की पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तलाश में बिहार से दिल्ली चले गए। फिर गाँव से बड़े शहर में रहने का बदलाव मनोज के लिए काफी नया रहा। परन्तु नौकरी पाने की कोशिश में विफल होने के बाद उन्होंने अपना कुछ काम करने का मन बनाया और एक अंडे (Egg Vendor) और सब्जी की रेहड़ी लगानरे का इरादा बनाया।

फिर कुछ खोज बीन के बाद मनोज ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालयन (JNU) में राशन पहुंचाने का काम करना भी शुरू किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात वहां के एक छात्र उदय कुमार से हुई।

मनोज बताते हैं, हम बिहार के एक ही क्षेत्र के थे और एक दोस्त के रूप में, उदय ने मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करने की राय दी। आगे अच्छी नौकरी की तम्मना लिए मैंने श्री अरबिंदो कॉलेज (इवनिंग) में प्रवेश लिया और अंडे और सब्जियां बेचते हुए 2000 में बीए (BA) पास कर लिया।

मनोज अख़बार को बताते हैं की उदय ने समझाइस दी कि वह यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) देने का प्रयास करें। ऐसे में उन्हें यह पता लगाने में कुछ समय लग गया की क्या वे सच में में सिविल सेवाओं में जाना चाहते है और जीवन भर अंडे ही बेचना चाहते है।

जब मनोज 2001 में UPSC तैयारी शुरू करने वाले थे, तब एक अन्य मित्र ने उन्हें पटना विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में पीएचडी प्रोफेसर रास बिहारी प्रसाद सिंह से मिलवाया जो कुछ दिनों के लिए दिल्ली में थे। भूगोल में सिंह की विशेषज्ञता से प्रभावित होकर मनोज ने भूगोल विषय को UPSC के लिए वैकल्पिक के रूप में लिया और उसके तहत अध्ययन करने के लिए पटना चले गए।

फिर उन्होंने पटना में 3 साल बधाई की और 2005 में UPSC का अपना पहला प्रयास किया। उन्होंने स्कूल के छात्रों को ट्यूशन पढ़ाया, जिससे वे खुद का खर्चा निकाल सकें। हालाँकि वह UPSC परीक्षा पास करने में असफल रहे और बिहार से वापस दिल्ली आ गए।

कड़ी मेहनत की और चार बार UPSC परीक्षा में असफल होने के बाद मनोज ने पाँचवी बार अपनी पढाई की स्टाइल को पूरी तरह से बदल दिया। अपनी स्ट्रेटेजी के बारे में मनोज बताते हैं प्रीलिम्स के लिए तैयारी करने के बजाय, मैंने पहली बार मेन्स का सिलेबस पूरा किया।

ऐसा करने से मैंने स्वचालित रूप से प्रीलिम्स के 80 प्रतिशत पाठ्यक्रम को कवर कर लिया था। मैंने कक्षा 6-12 की एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को भी पूरा के पूरा पढ़ा। उन्होंने कहा कि सामान्य अध्ययन के लिए आवश्यक मेरी बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत किया।

करंट अफेयर्स के लिए, मनोज ने सिविल सेवा के लिए समर्पित मासिक पत्रिकाओं की सदस्यता ली और पुरानी खबरें भी पढ़ीं। अपनी अंग्रेजी सुधारने के लिए वह द हिंदू को एक घंटा पढ़ते थे। उन्होंने निबंध लिखने का अभ्यास किया और उनके उत्तरों की संरचना की। यह सब काम आया और मनोज ने 2010 में यूपीएससी परीक्षा क्रैक (UPSC Exam Cracked) कर की।

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