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Delhi: अमेरिकी कैबिनेट में विशेष सेवा देने वालीं पहली भारतीय-अमेरिकी और रिपब्लिकन पार्टी की नेता निक्की हेली ने 59 चीनी ऐप्स को प्रतिबंधित करके बैन करने के भारत के फैसले की जमकर तारीफ की है। अमेरिकी नेता निक्की हेली ने कहा कि नई दिल्ली ने दिखाना जारी रखा है कि वह ‘चीन की मनमानी के आगे नहीं झुकेगा।’ भारत चीन के आगे निडर होकर जस का तस खड़ा है।
निक्की हेली ने बुधवार को ट्वीट किया, “भारत द्वारा चीनी कंपनियों के 59 लोकप्रिय ऐप्स पर प्रतिबंध लगाना देखकर अच्छा लगा जिसमें टिकटॉक भी शामिल है, जो भारत को अपने सबसे बड़े मार्किट में मानता है।” उन्होंने आगे कहा, भारत का यह दिखाना जारी है कि वह चीन कीआक्रामकता के आगे नहीं झुकेगा व नहीं पीछे हटेगा।” यही भारत सरकार की भी मंशा है।
Good to see India ban 59 popular apps owned by Chinese firms, including TikTok, which counts India as one of its largest markets. India is continuing to show it won’t back down from China’s aggression. https://t.co/vf3i3CmS0d
— Nikki Haley (@NikkiHaley) July 1, 2020
आपको बता दे की गलवान घाटी में चीनी हरकत के बाद मोदी सरकार द्वारा उठाये गए सख्त कदम से भारत को दुनिया का साथ मिला है। मोदी सरकार ने चीन के 59 एप्स को भारत में बंद करने का फैसला लिया, वहीँ चीन में इस बात को लेकर खलबली मच गयी। मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन देते हुए अमेरिका समेत दुनिया के अन्य देशो ने भी चीन के एप्स का बहिष्कार करके उसे करार जबाब दिया है।
संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशन कमिशन ने चाइनीज़ कंपनिया Huawei और ZTE को ऐसी कंपनियों की श्रेणी में डाल दिया है, जिससे देश की सुरक्षा को खतरों है। FCC के अध्यक्ष अजित पाई ने बोला है कि इस फैसले के बाद Huawei और ZTE, ये दोनों ही टेलिकॉम कम्पनियाँ 8.3 बिलियन डॉलर के युनिवेर्सल सर्विस फण्ड का इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।
एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि FCC के इस फंड का यूज़ इन कंपनियों की मदद से सप्लाई किये जाने वाले उपकरणों और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर किया जाना था। FCC ने बोला है, कि उसने ये फैसला टेलिकॉम कम्पनीज से सिक्योरिटी रिस्क को देखते हुए लिया है। FCC की पब्लिक सेफ्टी और होमलैंड सिक्योरिटी ब्यूरो ने Huawei और ZTE संबन्ध में ये निर्णय लिया। इसके अलावा दोनों ही कंपनियों ले अलावा अन्य कंपनियों पर भी ये नियम लागू होगा।
अमेरिका के FCC चैयरमेन और भारतीय मूल के अजित पाई ने 30 जून, 2020 को ट्विटर पर अपने एक बयान ने बोला, कि हम चीन की कंपनी के साथ अपने नेटवर्क साझा नहीं कर सकते है। जिससे हमारे कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंच पाए। भले ही अभी तक इस फैसले पर दोनों कंपनियों में से किसी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पाई ने बोला कि दोनों ही कंपनियों के चीन की कम्युनिटी पार्टी और चीनी सेना से गहरे सम्बन्ध है। उन्होंने बोला, कि जाँच में पाया गया है कि दोनों कम्पनिया चीन के नियमो का पालन करने के लिए मजबूर है जिसकी वजह से उन्हें वहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसियो की सारी बातें माननी पड़ती है उन्होंने बोला, कि अमेरिका कभी भी चीन को हमारे टेलिकम्युनिकशन सेक्टर कमजोरियों का फायदा उठाने की अनुमति नहीं देगा।
टेलीकॉम, रेलवे प्रोजेक्ट में चाइनीज कंपनियों को झटका देने और 59 चाइनीज ऐप (Chinese APP) को बैन करने के बाद भारत सरकार ने हाइवे प्रोजेक्ट में भी उन्हें बहुत तगड़ी चपत लगाई है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लद्दाख में चीन के साथ तनाव की स्थिति को देखते हुए बुधवार को कहा कि हाइवे प्रोजेक्ट में चाइनीज कंपनियों को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने साफ किया कि यह पाबंदी ज्वाइंट वेंचर पर भी लागू होगी। इसी तरह उन्होंने एमएसएमई सेक्टर के लिए भी साफ कर दिया कि चाइनीज कंपनियों के लिए अब दरवाजे बंद हो चुके हैं।
हाइवे प्रोजेक्ट में चीन की कंपनियों को मनाही के ऐलान के साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ये भी कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि विभिन्न क्षेत्रों में जैसे कि माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज में भी चीनी निवेशकों को जगह न मिले। केंद्रीय रोड ट्रांसपोर्ट, हाइवे और एमएसएमई मिनिस्टर नितिन गडकरी ने कहा कि ‘रोड कंस्ट्रक्शन के लिए हम उन ज्वाइंट वेंचर को इजाजत नहीं देंगे जिनमें चाइनीज पार्टनर होंगे।
गडकरी ने ये भी साफ किया मौजूदा या भविष्य के किसी ज्वाइंट वेंचर में भी चाइनीज कंपनियां होंगी तो उसकी फिर से बोली लगाई जाएगी। गडकरी के मुताबिक, हमने अपनी कंपनियों के लिए नियमों में थोड़ी रियायत देने का फैसला किया है, ताकि वे बड़े प्रोजेक्ट में बोली लगाने के योग्य बन सकें।



