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Nagpur: आज के समय में एक स्त्री और पुरूष मे कोई फर्क नहीं रह गया है। जो काम एक पुरूष कर सकता है वह स्त्री भी कर सकती है। इस बात को महिलाओं ने हर क्षेत्र में आगे बढ़कर साबित भी कर दिया है। आज महिला हर क्षेत्र में अपने नाम का परचम लहरा रही है।
आज स्त्री पुरूष के कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है और अपनी मेहनत से देश और दुनिया में बहुत से बड़े बड़े पदो पर रहकर कार्यभार सम्हाल रही है। वह केवल जॉब ही नहीं बल्कि बिजनेस करने में भी किसी से पीछे नहीं है।
पुराने समय में स्त्री को पुरूष के बराबर अधिकार नहीं दिया जाता था। उन्हें समाज की रूढिवादी सोच और परंपरा के बीच दबा कर रखा जाता था। जिस वजह से एक स्त्री केवल घरों तक ही सीमित हो जाती थी।
आज ऐसा नहीं है, पुरानी रूढीवादी परंपरा को पीछे छोड कर महिलाऍ आज बहुत आगे निकल गई है। आज महिला हर क्षेत्र में आगे बढ़कर अपना एक अलग मुकाम बना रही है। आज के युग में एक महिला सिर्फ घर तक ही सीमित नहीं रह गई है। वह बिजनेस करके लोगो को रोजगार देने में भी सक्षम हो चुकी है।
महिला कारपेंटर बनने का सफर
आज के समय में किसी भी व्यक्ति में हौशलों की कमी नहीं है। आजकल व्यक्ति जो ठान लेता है, उसे पाकर ही रहता है। हर व्यक्ति कुछ हटकर करने का सपना देखता है, जिससे उसे समाज में एक अलग पहचान मिले और केवल अपने देश में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में उसे जाना जाये।
एक ऐसा ही सपना एक महिला ने भी देखा। वह महिला जिसने पुरूष और स्त्री के काम में अंतर नहीं समझा और कारपेंटर (Carpenter) बनने का निश्चय कर लिया और अपना कार्य उस महिला ने इतने लगन से किया कि कुछ ही समय में उसे पूरी दुनिया में पहचान मिलने लगी। आज वह इतनी प्रसिद्ध हो चुकी है, कि लोग उनके लकड़ी के बनाये सामानों (Wood Products) को खरीदने के लिए कतार में लगने को तक तैयार है।
कारपेंटर बनने का था सपना
आज हम एक ऐसी महिला की कहानी लेकर आये है, जिसने बचपन से ही अपने पिताजी को लकड़ी का काम करते हुए देखा था और अपने पापा को यह काम करता हुआ देखकर बचपन में ही अपना मन बना लिया था कि वह भी अपने पापा की ही तरह कारपेंटर बनेंगी।
आपको बता दे कारपेंटर लकड़ी की सहायता से फर्नीचर (Furniture) बनाने का कार्य करते है और उसमें अपने हाथों से सुन्दर नक्काशी भी करते है और यही बनने का सपना उस महिला का था। उनका इरादा अपने पिताजी से भी आगे बढ़कर काम करने का था। वह सीमित नहीं रहना चाहती थी।
वह चाहती थी कि देश विदेश में हर जगह उनकी कारीगिरी को पहचान मिले और इसी को अपने मन में रखकर वह कारपेंटर बनने की और कदम बढ़ाने लगी। एक लड़की का कारपेंटर बनने का सपना देखना सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन यह बात सच है।
नागपुर शहर की है प्रीति
हम जिस महिला कोरपेंटर (Woman Carpenter) की बात कर रहे है, उनका नाम प्रीति है। वह महाराष्ट्र राज्य के नागपुर में रहती है। नागपुर में ही इनकी फर्नीचर की शॉप (Furniture Shop Nagpur) है। जिसका नाम श्री गणेश फर्नीचर (Ganesha Furniture) है। और इस शॉप में ही प्रीति ने बचपन से अपने पिताजी के साथ काम करना सीखा था।
प्रीति जब छोटी थी, तो अपने पिताजी के साथ शॉप में काम करके अपने पिताजी की मदद किया करती थी। और धीरे धीरे वह अपने पिताजी की ही तरह लकड़ी से चीजें बनाना सीख गई। पहली बार उन्होने अपने पिताजी से सीखकर एक अलमीरा बनाई थी।
अलमीरा से हुई करियर कि शुरूआत
अलमीरा उन्होंने इतनी अच्छी बनाई थी, कि उनके आस पास के सभी लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे। और यही से प्रीति के कारपेंटर बनने की शुरूआत हो गई। आज प्रीति इतनी प्रसिद्ध हो गई हे, कि उनके इलाके में होने वाली शादीयों में जरूरी सभी लकड़ी के समान बनाने का ऑर्डर उन्हें ही मिलती है। लोग उन्हें सबसे पहले प्रेफरेंस देते है। प्रीति ने अपने काम से वहा के फर्नीचर शोरूम के मालिकों को एक बड़ी चुनौती दे दी है।
एक अलमीरा से प्रीति (Priti) ने अपने करियर की शुरूआत की और लोगों की तारीफ पाकर उनके हौसले और भी बुलंद हो गये और इस कार्य को करने में प्रीति ने अपनी पूरी जान झोंक दी। धीरे धीरे वह इतने अच्छे फर्नीचर बनाने लगी की लोग उनके कार्य के कायल हो गये। उनका काम आज इतना प्रसिद्ध हो चुका है, कि पूरे देश भर में उनकी चर्चा हो रही है।
पिता और पति ने दिया साथ
प्रीति को आगे बढ़ाने में उनके पिता और पति ने बहुत मदद की। उन्होंने हर संभव प्रयास करके प्रीति को आगे बढ़ाया। तभी वह यह कार्य कर पाई वरना हमारे समाज में एक लड़की का इस तरह कारपेंटर बनना शायद एक्सेप्ट नहीं किया जाता।
प्रीति के कार्य को सपोर्ट करते हुए प्रीति के पिता और पति ने उन्हें एक शॉप किराये से दिलवाई। ताकि वह अपना अलग से कार्य कर सके। प्रारंभ में तो प्रीति को अपने आस पास के लोगों के द्वारा बस ऑर्डर दिये जाते थे। लेकिन उन्होंने इस कार्य को इतनी मेहनत से किया कि उनकी बारीकी का काम देखकर दूर दूर से लोग उनके पास ऑर्डर देने आने लगे।
लोगों को देने लगी है रोजगार
आज प्रीति एक फेमस महिला कारपेंटर बन गई है। उनकी शॉप इतनी चलने लगी है। वह बताती है कि अब उनके पास इतना काम होता है कि उसे वह अकेले नही कर पाती है। इसलिए उन्होने काम बटाने के लिए अपनी शॉप में काम करने के लिए कुछ वर्करों को भी रख लिया है। जिन्हें वह हर माह तन्ख्वा भी देती है।
इस तरह प्रीति लोगों को रोजगार देने का काम भी करती है। प्रीति ने इस कार्य को अपनी मेहनत और लगन से सफलता की उस ऊँचाईयों तक पहुँचा दिया है, कि बड़े-बड़े बिजनेसमेन तक इस ऊँचाई तक पहुँचने में सालों का समय लगा देते है।
प्रीति (Woman Carpenter Priti) ने बहुत ही कम समय में इस सफलता को प्राप्त कर लिया। प्रीति ने इस कार्य में लड़को लड़कियों का भेद ना करते हुए पूरी ईमानदारी और लगन से इसे किया। यही कारण है कि आज वह एक अलग मुकाम तक पहुँच गई है।
प्रीति कहती है कि यह उनकी अभी शुरूआत है। अभी तो उन्हें अपने इस काम को और भी नई उँचाइयों तक लेकर जाना है। जिसके लिये वह हमेशा इसी तरह ईमानदारी से मेहनत करती रहेंगी। प्रीति का सपना अपना एक शोरूम खोलने का है। जिसके लिए उन्होंने नागपुर (Nagpur) में ही छोटी सी जमीन ले ली है।
प्रीति चाहती है कि महिलाऍं उन्हे देख कर प्रेरित हो और वह भी बिना स्त्री पुरूष का भेद किये आगे बढे। इसलिए वह अपने काम को पूरी दुनिया में पहचान दिलाना चाहती है। प्रीति कि इस प्रसिद्धि का श्रेय उनकी मेहनत को जाता है। उनका यह कार्य करोड़ो महिलाओं प्रेरित कर रहा है। प्रीति अपने जीवन में और भी आगे बढे और सफलता हासिल करे हम यही कामना करते है।
आपको बता दे, कि प्रीति अपने काम को चलाने के लिए द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अंतप्रेनोरशिप एंड स्मोल बिजनेस डेवलपमेंट में पन्द्रह दिन के वर्कशॉप में भी भाग ले चुकी है। यह कार्यक्रम हमारे देश में चल रहे स्किल इंडिया मिशन की सहायता से चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वह लोग जो छोटे-मोटे शहरों से है और जीवन में कुछ करने का हौसला रखते है उन्हें इसके जरिए आगे बढ़ाने का है।



