सेना को बीस साल से फ्री कमांडो ट्रेनिंग दे रहीं देश की पहली महिला कमांडो ट्रेनर

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Dr Seema Rao
Dr Seema Rao, India's first woman commando trainer. Meet India's Only Woman Commando Trainer Dr Seema Rao. She has trained over 20,000 soldiers of India's armed forces and paramilitary.

File Photo

Bhopal: सीमा का जन्म स्वतंत्रता सेनानी प्रोफ़ेसर रमाकांत सिनारी के घर हुआ था। अपने पिता की तरह ही वह देश के लिए अपना योगदान देने की इक्छा रखती थीं। वह एक सर्टिफ़ाइड डॉक्टर हैं और उन्होंने Crisis Management में MBA भी किया हुआ है। पढ़ाई के दौरान सीमा की मुलाकात डॉ दीपक राव से हुई।

उन्होंने दीपक से शादी की और वह सेना में शामिल हो चुके थे। शादी के बाद दीपक ने ही अपनी पत्नी को मार्शल आर्ट्स सिखाया। 49 साल की डॉ. सीमा (Dr Seema Rao) बताती हैं “मेरा जन्म मुंबई के बांद्रा में हुआ था। मेरे पिता प्रो रमाकांत सिनारी एक फ्रीडम फाइटर थे। उन्होंने गोवा को पुर्तगालियों से आजाद कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।” मैंने देश सेवा की भावना अपने पिता से विरासत में प्राप्त की है।

मेरे पिता खाली टाइम में मुझे स्वंत्रतता की लड़ाई के किस्से सुनाते थे। घर में हम तीन बहनें थे। मैं उनमें सबसे छोटी थी। हम तीनों बहनों की बचपन अच्छे माहौल में गुजरा था। मुझे बचपन से ही शूटिंग का क्रेज था। मैं मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनाना चाहती थी, इसलिए मैंने जीएस मेडिकल कॉलेज से एमडी की पढ़ाई पूरी की।

सीमा का कहना है “मेरे मन में शुरू से देश सेवा का जुनून था। मैंने सोच लिया था कि अगर नौकरी और देश सेवा दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ा तो मैं देश सेवा को ही प्राथमिकता दूंगी।” देश की ये पहली महिला कमांडो ट्रेनर हैं महिलाओं के लिए मिसाल, मॉडलिंग में भी दिखा चुकी हैं अपना हुनार।

मार्शल आर्ट्स (Marshal Arts) में ब्लैक बैल्ट हासिल कर चुकीं सीमा इंडियन पैरा स्पेशल फोर्सेज़, कमांडो विंग, विभिन्न अकादमियों, नेवी मारकोस मरीन कमांडो, एनएसजी, वायु सेना गरुड़, आईटीबीपी, पैरामिलिट्री और पुलिस के जवानों को ट्रेनिंग देती हैं।

भारत की सबसे पहली महिला कमांडो ट्रेनर सीमा राव (India’s First Woman Commando Trainer Dr Seema Rao) वाकई अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा दायक है। ये आयरन लेडी सालों से इंडियन आर्मी के कमांडोज को प्रशिक्षण देती आ रही हैं। ये सिलसिला पिछले 20 साल से लगातार जारी है। भारतीय जवानों को जब सीमा कमांडो ट्रेनिंग देती हैं, तो देखने वाले उनको सलाम करते है।

डॉ सीमा राव भारत की पहली महिला कमांडो ट्रेनर (First Woman Commando Trainer) हैं, जिन्होंने भारतीय विशेष बलों को बिना कोई मुआवजा लिए 20 वर्षों तक प्रशिक्षित किया। वह क्लोज क्वार्टर बैटल जोकि निकटता में लड़ाई करने की एक कला है, उसमें अग्रणी है और विभिन्न भारतीय बलों को प्रशिक्षित करने में वे सक्षम हैं। उनके काम में मेजर दीपक राव, ने अपनी भागीदारी निभाई, जिन्हें भारतीय राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया।

सीमा राव देश की पहली महिला कमांडो ट्रेनर हैं। इस काम में उनके पति मेजर दीपक राव उनकी हेल्प करते हैं। उनके होसलो को कभी कम नही होने देते। सीमा कॉम्बेट शूटिंग इंस्ट्रक्टर हैं। जो गेस्ट ट्रेनर के रूप में जवानों को प्रशिक्षण देती हैं। इन्होंने माउंटेनियरिंग और रॉक क्लाइम्बिंग में भी मैडल हासिल किए हैं।

उनका जन्म भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी प्रोफेसर रमाकांत के यहाँ हुआ। उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में, पारंपरिक चिकित्सा में प्रमाणित चिकित्सक की शिक्षा ली। राव ने संकट प्रबंधन में भी एमबीए किया है। अपने पति मेजर दीपक राव के साथ मिलकर उन्होंने 15000 सैनिकों को आधुनिक क्लोज क्वार्टर बैटल का प्रशिक्षण दिया है।

सीमा राव ने भारतीय वायु सेना के स्काइडाइविंग पाठ्यक्रम द्वारा अपने लिए पैरा विंग्स अर्जित किये। वह एक लड़ाकू शूटिंग प्रशिक्षक, सेना के पर्वतारोहण संस्थान एचएमआई की पदक विजेता, और मिलिट्री मार्शल आर्ट में 7वीं डिग्री की ब्लैकबेल्ट हैं। वह दुनियाभर के उन कुछ प्रशिक्षकों में से एक हैं जिन्हें जीत कुन डो सिखाने के लिए अधिकृत किया गया है।

वह श्रीमती भारत विश्व सौंदर्य प्रतियोगिता की फाइनलिस्ट भी रह चुकी है। वह एक पेशेवर मार्शल मुकाबला प्रतिपादक हैं जिनके वंश के निशान रिचर्ड बुस्तिललो, तक जाते हैं, जोकि महान ब्रूस ली की कला जीत कुन डो के मूल शिष्य हैं। उन्हें भारत की पहली महिला कमांडो ट्रेनर के रूप में संबोधित किया जाता है। उनके महिलाओं की सुरक्षा पर कई लेख प्रकाशित हैं।

फ्रीडम फाइटर रहे प्रोफेसर रमाकांत की बेटी सीमा ने क्राइसिस मैनेजमेंट कॉलेज से एमबीए की डिग्री हासिल की है। वे पीएचडी होल्डर भी हैं। यही नहीं ये सुपर वुमन मिस इंडिया वर्ल्ड की फाइनलिस्ट भी रह चुकी हैं। सीमा को जवानों की आंखों में सम्मान देखकर गर्व होता है।

डॉ. सीमा के अनुसार, क्लोज क्वार्टर बैटल (सीक्यूबी) एक्सपर्ट बनना इतना easy नहीं था। भारतीय सेना के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए कड़ा परिश्रम करना पड़ता है। कई दौर की बातचीत एवं कौशल प्रदर्शन के बाद जवानों को कॉम्बैट ट्रेनिंग देने का सिलसिला स्टार्ट हुआ।

वह बताती हैं, मुझे अक्‍सर पुरुष जवानों को ट्रेन करना होता था। इसलिए अपनी फिटनेस पर फोकस करना पड़ता है। समय-समय पर अपनी स्किल्स को अपग्रेड करती रही। सीक्यूबी मेथोडोलॉजी संबंधी सर्टिफिकेशंस हासिल किए। आज जब जवानों की आंखों में खुद के लिए सम्मान देखती हूं, तो गर्व महसूस होता है।

डॉ. सीमा के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके प्रभाव के कारण इनके अंदर भी देशसेवा की भावना जागृत हो गई। उसी के तहत वे प्रशिक्षण में जवानों से कोई फीस नहीं लेती हैं। बताती हैं, शुरुआत में तो अपनी जमा पूंजी भी लगा दिया करती थी, जिससे कई बार आर्थिक संकट की पैदा हो जाती थी। बावजूद इसके कोई गम नहीं हुआ।

डॉ सीमा का कहना हैं कि महिलाएं चाह लें, तो कुछ भी कर सकती हैं। उनको अपने हॉलप को मजबूत बनाये रखना पड़ता है। कभी भी परिस्थिति को देखकर घबराना नही है। जीवन तो संघर्षो से भरा हुआ है। उन्हें सिर्फ अपने सपनों का पीछा करना आना चाहिए। मैंने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत परिश्रम किया है।

ठिठुरती ठंड, तपतपाती धूप, घने जंगलों से लेकर दुश्मनों के प्रभाव वाले क्षेत्र में रहकर खुद को हर माहौल के लिए ततपर किया है। मेरे शरीर की शायद ही कोई हड्डी है जो टूटी न हो। डॉ. सीमा एक बार 50 फीट की ऊंचाई से गिर गई थीं। उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर आ गए। कहती हैं, पिता जी के गुजर जाने के बाद में भटक गया था।

अपना ध्यान भटकाने से ट्रेनिंग के दौरान सिर के बल गिर गई। सिर में गहरी चोट लगने से याददाश्त चली गई। कुछ महीनों याददाश्त नहीं रही। लेकिन ये सभी मेरा हौसला नहीं तोड़ सके। मैंने अपने अनुभवों को किताबों और मोटिवेशनल स्पीच के माध्यम से दूसरों के साथ शेयर करना स्टार्ट कर दिया। कॉरपोरेट्स के अलावा शिक्षण संस्थानों में सेशन लेती हूं।

पांच बार टेडएक्स इवेंट में शामिल हो चुकी हूं। अन्य सोशल प्लेटफॉर्म पर प्रशंसकों से जुड़ना अच्छा लगता है। हुनार हो तो कोई भी परिस्थिति झुका नही सकती। 2019 फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पावर ट्रेलब्लेज़र सूची में राव को छठे स्थान पर रखा गया था। उन्हें 2019 में भारत के राष्ट्रपति से नारी शक्ति पुरस्कार मिला।

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