Bhopal: ट्रेन में सफर करना हर किसी को पसंद है। बच्चा हो या बूढ़ा ट्रेन के सफर के दौरान खिड़की पर बैठना हर कोई चाहता है। एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए यातायात के कई साधन उपलब्ध है, लेकिन ट्रेन ट्रैवलिंग सबसे सुगम एवं सुरक्षित मानी जाती है।
जहां एक और इसका सफर सुरक्षित तो है ही, वहीं दूसरी ओर यह बस एवं कार की तुलना में काफी सस्ती भी पड़ती है। ट्रेन के सफर में टॉयलेट सुविधा होने की वजह से बच्चे एवं बड़ों के लिए काफी सुविधाजनक हो जाता है। वहीं इसमें जर्क नहीं लगते जिस वजह से इसका सफर काफी आरामदायक भी होता है।
सालों से ट्रेन में सफर करने के दौरान भी कई लोग ट्रेन के डब्बे एवं अपनी टिकट नंबर के साथ लिखे गए सीसी एवं इसी (CC or EC) जैसे शब्दों के सही मायने नहीं जानते हैं। रेलवे के इन कोड शब्दों (Railway Code Words) के पीछे इनसे मिलने वाली सुविधाएं एवं टिकट की कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

आज हम आपको रेलवे की इन दोनों टिकट वेरिएंट का फर्क बताएंगे एवं कहां कहां अवेलेबल होती है, यह सीसी एवं एसी कोच वह भी आप जान पाएंगे। इस रोचक जानकारी के लिए पोस्ट को आखिरी तक पड़ जाएगा।
सीसी का अर्थ है चेयर कार
जैसा कि हम सब जानते हैं रेल के डिब्बों में स्लीपर कोचेस ज्यादातर पाए जाते हैं। जिनमें लंबे-लंबे बर्थ बने होते हैं, जो बैठने के काम तो आते ही हैं, रात में सोने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। लंबी दूरी के लिए लोग बर्थ बुक करना ही प्रेफर करते हैं।

वही छोटी दूरियों के लिए कुछ ऐसे कोचेस बनाए जाते हैं जिनमें सोने के बर्थ की जगह बैठने की चेयर अर्थात कुर्सी लगाई जाती है। इन्हे चेयर कार (Chair Car) कहा जाता है, जिन्हे शॉर्टकट में सीसी (CC) भी कहते है।
यह सीट्स काफी लग्जरी एवं आरामदायक होती है। जिसमें हम लेट तो नहीं सकते परंतु अपने बैक रेस्ट को अपने कंफर्ट एंगल के अनुसार आगे पीछे सेट कर सकते हैं। सीसी कोच प्रायः एयर कंडीशन होते हैं।
इन ट्रेनों में लगाते गए हैं सीसी कोच
जाहिर है लेटने की सुविधा ना होने की वजह से सीसी चेयर कार या कोचेस को उन ट्रेनों में लगाया जाता है जो छोटी दूरी का सफर तय करेंगे। जैसे 2 से 4 घंटे का सफर जिसे लोग बैठे-बैठे ही तय करना पसंद करते हैं।

आपको बता दें चेयर कार में सीट एक लाइन में करीब 5 की संख्या में लगाई जाती है क्रमशः एक दूसरे के बाजू से। यह डब्बे आपको इंटरसिटी एक्सप्रेस, वंदे भारत, जनशताब्दी एक्सप्रेस एवं कुछ पैसेंजर ट्रेंस में भी देखने मिलेंगे। इनका किराया जनरल सीट की तुलना में थोड़ा अधिक होता है। परंतु स्लीपर टिकट से सस्ते।
क्या है EC एवं इसका किराया
चेयर कार कोचेस की तरह EC कोच भी सिटिंग चेयर के तौर पर बनाए जाते हैं। ई सी का पूरा नाम एक्सक्यूटिव क्लास (Executive Class) है। यह सीसी चेयर कार से काफी प्रीमियम बनाई जाती है, यह कितनी लग्जरी होगी, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसका किराया साधारण सीसी सीट के कंपैरिजन में आधा ही होता है। इसे प्रीमियम टिकट सिस्टम के अंतर्गत बनाया गया है। क्योंकि इनमें सीट को 4-4 के पेयर में छोटे-छोटे केबिन के अंतर्गत बनाया गया है ताकि, प्राइवेसी और कंफर्ट का लेवल बैटर रहे।
कुछ खास ट्रेनों में ही होता है EC COACH
एग्जीक्यूटिव सीट या इसके कोचेस की बात करें तो यह भी शॉर्ट डिस्टेंस ट्रेनों में लगाए जाते है। EC का किराया 2000 से 2500 रुपए के बीच होता है एवं हवाई जहाज के टिकट के बराबर भी हो सकता है। ये डब्बे आपको वंदे भारत जैसी ट्रेनों में सबसे ज्यादा देखने मिलता है।
वही शताब्दी एक्सप्रेस में भी ये उपलब्ध है। साधारण स्लीपर कोच या ट्रेंस मे ये डिब्बे नही होते। ये कोच एयर कंडीशन तो होते ही हैं, ज्यादातर केसेस में लंच या डिनर जैसा फूड भी इसमें जुड़ा होता है। उम्मीद है आज आपको यह जानकारी काफी रोचक लगी होगी। वैसे जर्नी में सही लग्जरी का आनंद लेना है, तो एक बार इसी कोच में सफर जरूर करें।




