इस बेटी ने एक घटना के चलते डॉक्टरी छोड़ IPS अफसर बनने का फैसला किया, पूरी कहानी चौका देगी

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Dr Arti Singh IPS
Dr Arti Singh became IPS officer for this reason only. A MBBS doctor by qualification cracked UPSC and became IPS. woman Singham of Maharashtra.

File Photo Credits: Twitter

Nasik: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के ग्रामीण माहौल में बड़ी होने के बाद भी आरती को कभी लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा था। आरती इस प्रकार की सोच को बदलना चाहती थीं और उन्होंने अब UPSC में जाने का फैसला किया। इसके पीछे एक बड़ी वजह थी।

इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस बीएचयू (BHU) में स्त्री रोग वॉर्ड में डॉक्टर आरती सिंह (Doctor Arti Singh) के सामने बच्चों को जन्म देने वाली मां का अधिकतर पहला सवाल यही होता था की बच्चा बेटा है या बेटी, उन्हें बच्चे का स्वास्थ्य के बारे में जानने में कोई दिलचस्पी नहीं होती थी। आरती ऐसी मानसिकता को समझने की कोशिश करती थी।

अपनी डॉक्टरी की जॉब में रहते हुए तो उनके पास ज्यादा पावर नहीं था, क्योंकि डॉक्टर का कार्य सेवा से जुड़ा होता है। उन्हें तो सवाल सर्विस करने का मन कर गया था। ऐसे में 2 साल बाद अपनी कड़ी मेहनत से 2006 में डॉ आरती ने UPSC परीक्षा क्रैक कर ली। उन्होंने नवजात लड़कियों के भाग्य को बदलने के इरादे से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को चुना।

आरती (IPS Dr Arti Singh) एक अख़बार को बताती हैं कि, लड़के की चाह रखने का एक मुख्य कारण, उसकी सुरक्षा को लेकर है। ऐसा देखा गया है की अधिकतर माता-पिता की यह सोेच हैं कि समाज में लड़कियों सुरक्षित नहीं है। उनकी सुरक्षा का एक मात्र तरीका शादी है यही सोच दहेज और बाल विवाह जैसे स्थितियों को जन्म देती है। इस समस्या को सॉल्व करने के लिए मैंने UPSC करने का विचार किया था।

आरती अपनी दृण इच्छाशक्ति और मेहनत से अपनी मंजिल तक पहुँचने में सफल हो गई। उन्होंने साबित कर दिया कि लिंग का अंतर और कुछ नहीं बल्कि लोगों की सोच है। वे बताती है की डॉक्टरी छोड़ जब आरती UPSC की तैयारी शुरू की, तब पड़ोसियों और रिश्तेदारों का उनके माता-पिता से यह कहना था की उसे पढ़ने की परमिशन क्यों दे रहे हैं। अच्छा रिश्ता ढूंढने के बजाय उनके फैसले को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं।

उस वक्त उनके माता-पिता ने सब को चुप कराते हुए अपनी बेटी का सपोर्ट किया। आरती कहती हैं, मेरे पिता को हमेशा से मुझ पर विश्वास रहा है। वह चाहते थे कि जीवन मे मैं वह सब करूं जो वह नहीं कर पाए। उनके इस समर्थन की वजह से ही मैं यहाँ तक पहुँच पाई हूँ।

अब वे एक IPS अफसर बन चुकी थी। महाराष्ट्र (Maharashtra) में अपनी ड्यूटी के दौरान जब उन्हें बताया गया कि महिला अधिकारियों सहित कुछ पुरुषों ने भी नक्सल प्रभावित इलाके में जाने से मन कर दिया है, तो वे डरी नहीं। वह एक ऐसा इलाका था, जहां पुलिस-नक्सली मुठ-भेड़ आम बात थी।

साल 2009 में चुनाव के समय उनके IPS की पोस्ट संभालने के पहले ही नक्सलियों ने 17 पुलिसकर्मियों के प्राण ले लिए थे। इस खबर के बाद भी आरती डरी नहीं थी। उन्होंने अपनी पोस्ट संभालते हुए वहां न सिर्फ सफलतापूर्वक चुनाव कराए, नक्सली असला भी बरामद कर लिया।

आरती बताती हैं, मैं गढ़चिरौली (Gadchiroli) के सुदूर इलाके में तैनात थी। वहां, बरसात के मौसम के समय पुल बंद हो जाता था। इलाके का बाहरी दुनिया से संपर्क करना मुश्किल था। टेलीफोन, बिजली सब कट हो जाता था। समाचार अख़बार भी नहीं पहुँच पाता। इस सब परिस्थितियों से निपटते हुए 3 वर्ष तक यहाँ बेहतर ढंग से काम को संभाले रखा और बेहतर करने की कोशिश की।

इसके सफल कामों और बहादुरी के चलते केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा उन्हें (Woman IPS Officer) सम्मानित भी किया। उन्हें प्रतिष्ठित ‘डीजी इन्सिग्निया पुरस्कार’ भी दिया। वह अमरावती (Amravati) में पुलिस आयुक्त के रूप में तैनात रही हैं। वर्ष 2020 में महामारी और आपदा के वक़्त भी उनके काम और प्रयास को सरकार से भरपूर तारीफ मिली।

उन्होंने (IPS Arti Singh) बताया, कई पुलिसकर्मियों के महामारी की चपेट में आने से, उनकी टीम के कर्मियों का भी मनोबल टूट गया। यहाँ उनकी डॉक्टरी काम आई और एक IPS अधिकारी की बजाय, एक डॉक्टर (Doctor To IPS Officer) के रूप में मामले को गंभीरतासे लेते हुए संभाला।

उनका एक और प्रयास सफल रहा। उन्होंने बंद पड़े पावरलूम को फिर से चालु करवाना। मालेगांव में अधिकतर लोगों की नौकरियां इसी पर टिकी थीं। IPS आरती सिंह को नौकरी की वजह से अक्सर अपनी दोनों छोटी बेटियों से दूर रहना पड़ता है।

यह दाइत्व निभाना बहुत कठिन है, खास कर के एक माँ के लिए। आरती बताती हैं, आपदा और महामारी के दौर में उनके द्वारा लिए गए निर्णय और काम को सरकार और लोगो ने बहुत सहारा और पत्रकारों ने खुस उनके काम की तारीफ की।

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