कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की शहनशीलता अब और नही चल पा रही है, उनकी हिम्मत अब टूटने लगी है। नजरबंदी और लंबी हिरासत ने उनके जस्बात तोड़ दिए हैं। घाटी में कहीं से भी सपोर्ट न मिलने की वजह से वे अंदर ही अंदर टूट चुके हैं। अब ये भारत विरोधी नेता बैकफुट पर खड़े दिखाई दे रहे है।
समय ये है कि ये अलगाववादी नेता अब सरकार के आगे आजादी के लिए गुहार कर रहे हैं और उसके बदले में सारी नियम मानने को रेडी हो गए हैं।
सरकार ने इनके सामने कॉन्ट्रैक्ट भरने की शर्त रखी थी। इन कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार यह नेता स्थिति पर बुरा प्रभाव डालने या कानून व्यवस्था बिगाड़ने का कोई कार्य नहीं करेंगे।
अब अलगाववादी इस कॉन्ट्रैक्ट को भरने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गए हैं। जानकारी के अनुसार पीडीपी, हुर्रियत और नेशनल कांफ्रेंस के कई नेताओं ने प्रशासन को यह कॉन्ट्रैक्ट भर कर सौप दिया है। उन्होंने इन बांड्स के माध्यम से वादा किया है कि वह स्थिति खराब करने का कोई काम नहीं करेंगे।
जानकारी के अनुसार अलगाववादी नेता मौलवी मीरवाइज उमर फारूक (Mirwaiz Umar Farooq) ने भी इस बांड को भर दिया है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त होने के बाद से अब तक तकरीबन 1200 कार्यकर्ताओं और राजनेताओं को हिरासत में लिया गया है। इनमे कुछ को नेताओ और कार्यकर्ताओं को नजरबंद भी किया गया है। इन्हें CRPC की धारा 107 के अन्तर्गत हिरासत में लिया गया है।
अधिकारियों की खबरों के अनुसार इस बांड को भरने का अर्थ पूरी तरह से स्पष्ट है। अगर इसके बाद भी इन नेताओ और कार्यकर्ताओं ने कानून का तोड़ने या कोई भड़काऊ भाषण बाजी की तो इन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया जाएगा। इनके ऊपर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बांड भरने के बाद अब इन नेताओ और कार्यकर्ताओं को आजाद करने की प्लांनिग की जा रही हैं।



