
Karnal: आज के समय में नौकरी पाना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है। सरकार लोगों को आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाने का संदेश दे रही है। आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) का दौर अभी इतना चल रहा है, कि हर भारतीय इस और अपने कदम बढ़ा रहा है।
गाय (Cow) को हमारे देश में माता के समान दर्जा दिया जाता है। लोग इसकी पूजा करते है। कहा जाता है कि अगर गोधन स्वस्थ होगी तो आरोग्य मिलेगा। इसका सीधा सा अर्थ है कि गाय के स्वस्थ रहने से हमें भी रोग रहित रहने मे सहायता मिलेगी।
गोशाला (Gaushala) बन रही है आत्मनिर्भर
इस सोच को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा (Haryana) राज्य मे दानवीरकर्ण के नगर करनाल में गोशाला कमेटी और सामाजिक संस्थाओं ने गोधन सेवा की ओर अपना रूख करते हुए बहुत से पदार्थों का उत्पादन करना प्रारंभ किया है। यह गोशालाऍं धीरे धीरे अब आत्मनिर्भर बनने वाली है। इस कार्य में सबसे आगे राधा कृष्ण गोशाला है।
इस गोशाला में गाये के दूध (Cow Milk) का उपयोग करके बिस्कुट, अर्क और रस्क बनाये जा रहे है। यहां पर खाद्य पदार्थ के अलावा शुद्ध फिनायल भी बनता है। जिसकी अभी मार्केट में काफी डिमांड भी है। इनके प्रोडक्ट की मॉंग धीरे धीरे इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि मॉग पूरी करने के लिए अब इनका प्रोडक्शन बहुत ही तेजी से करना पड़ रहा है।
सबसे पहले गोसेवा का रखा जाता है ध्यान
हरियाणा राज्य के करनाल में शहर के पास स्थित राधा कृष्ण गोशाला (Shri Radha Krishna Gaushala) का संचालन कुष्ण लाल तनेजा कर रहे है। आत्मनिर्भर बनने का कार्य जो इस गोशाला में किया जा रहा है, उसमें समाजसेवी हरमीत सिंह हैप्पी और अन्य लोग भी साथ दे रहे है।
तनेजा इस गोशाला (Cow Care Centre) के बारे में जानकारी देते हुए बताते है, कि इस गोशाला का आत्मनिर्भर बनने का कार्य तो बाद मे पहला इनका परमधर्म गोसेवा है। गो की सेवा में यहां कोई कमी नही कि जाती है। गोवंश के स्वास्थय का यहां बहुत ही अच्छे से ध्यान रखा जाता है। वह बताते है, कि उनके गोशाला में 1000 से भी ज्यादा गाय है। जिनकी सेवा के लिए सेवको की कोई कमी नहीं है।
गाय के दूध से बनाया जाता है बिस्कुट और रस्क
तनेजा गोशाला के बारे में जानकारी देते हुए कहते है, कि हर गाय से उन्हें दूध नहीं प्राप्त होता लेकिन उनका ध्यान भी यहॉं बहुत अच्छे से रखा जाता है। जिन गायों से उन्हें दूध मिलता है, उनके दूध से वह विस्कुट तैयार करते है।
वह बताते है कि अभी कुछ समय से ही उनके गोशाला में गाय के दूध से बिस्कुट और रस्क बनाये जा रहे है। वह बताते है कि शुद्ध और देशी होने की वजह से उनके बिस्कुट और रस्क की मॉंग बहुत ज्यादा है। लोग उनके गौशाला में आकर इन्हें खरीद कर ले जाते है।
मूत्र से गोअर्क और फिनाइल बनाया जाता है
इन खाद्य पदार्थ के अलावा यहा पर गंध रहित अर्क भी बनाया जाता है। जिसे लोग बहुत ही ज्यादा पसंद करते है। अर्क को बनाने के लिए आधुनिक मशीन और नई तकनीक की आवश्यकता पड़ती है। जिनका उपयोग करके यहॉ गोअर्क बनाया जाता है।
तनेजा बताते है कि उनके गोशाला में फिनाइल भी बनाई जाती है। इन सभी की डिमांड शुद्धता की वजह से बहुत ज्यादा है। इसलिए अब कमेटी के द्वारा इनके प्रॉडक्शन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
गोशाला में जितने भी गाय मौजूद है, उनकी सेवा में गोशाला में कोई भी कमी नहीं कि जाती है। मलमूत्र को निस्तारित करने की बात की जाये, तो इसके लिए यहां पर नई प्रक्रिया अपनाई जाती है। यहा पर 9 इंच की ईट रखकर पशुओं को खड़ा करते है ताकि सारा मूत्र अवशोषित हो जाये। यहां पर जितनी मूत्र की आवश्यकता होती है। उतने मूत्र को पात्रों में इकट्ठा कर लिया जाता है। फिर बाद में इनका उपयोग अर्क ओर फिनाइल बनाने में करते है।
करनाल की यह गौशाला गाय के दूध के बिस्कुट बना रही है, जो कि शुद्ध और पौष्टिक हैं। वाह। pic.twitter.com/aGXUQNJMGP
— sanatanpath (@sanatanpath) July 1, 2022
इसके अलावा गाय के मूत्र से कई औषधियॉं भी बनाई जाती है। गाय के मूत्र से किडनी और लीवर का उपचार किया जाता है। इसलिए दवा कंपनियों को नियमित रूप से गोशाला में एकत्रित किया गया मूत्र कंपनियों को सप्लाई भी किया जाता है।
गोबर गैस भी बनाई जाती है
गाय के गोबर को हमारी संस्कृति में शुद्ध माना जाता है। कहा जाता है कि इसे घर में लीपने से घर पवित्र हो जाता है। इन गोशालाओं में गोबरों का भी उपयोग किया जाता है। यहां पर इनका उपयोग करके गोबर गैस बनाई जाती है। सबसे पहले इन गोबरों को गोशाला में ट्राली में एकत्रित करते है।
इसके बाद गोबर एकत्रित की गई इन ट्राली को लिफ्ट करके कुंजपुरा के गोबर गैस प्लांट में भेज दिया जाता है। फिर यही पर गोबर गैस बनाई जाती है। गोशाला के इन कार्य की वजह से आत्मनिर्भर और मेक इन इंडिया दोनों ही योजना को बल मिल रहा है। कमेटी का कदम बहुत ही सराहनीय है।



