मास्टरशेफ की अरुणा विजय पर जैन समाज को गर्व हो रहा, इस वजह से 2500000 रुपए भी ठुकरा दिये

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aruna vijay masterchef
Rejected 25 lakh but did not put egg in the food, Jain society is proud of Aruna Vijay of Masterchef show. Aruna Vijay wins hearts now.

Mumbai: भारत में कई प्रकार के लोग होते हैं कुछ शाकाहार तो कुछ मांसाहार। लोगों का मानना है कि शाकाहार भोजन सात्विक और साधारण भोजन है, जो एक मानव को लंबी आयु प्रदान करता है। संतुलित आहार में सभी विटामिंस एवं मिनरल्स समान मात्रा में ली जाती है, जिससे व्यक्ति स्वस्थ और तंदुरुस्त रहता है, दूसरी तरफ मांसाहारी लोगों का मानना है कि मांसाहार ही एक ऐसा आहार है जो मानव को अच्छी तरह से शक्ति प्रदान करता है।

भारत में भांति भांति प्रकार के धर्म के लोग रहते हैं और का खानपान धर्म के अनुसार ही होता है जैसे कि कुछ लोग पंडित धर्म को मानते हैं पंडित धर्म में लोग मांसाहार का नाम तक नहीं लेते। वहीं दूसरी तरफ एक मुस्लिम धर्म है, जहां ईश्वर को ही मांसाहार चढ़ाया जाता है। इन सब में है जैन धर्म, जो अपने धर्म और रीति रिवाज के लिए पूरी तरह समर्पित रहता है।

जैन धर्म के मुताबिक जैन धर्म का पालन करने वाले लोग मांस मदिरा तो दूर की बात लहसुन प्याज का भी सेवन नहीं करते लोग वर्षों से इस रिवाज को मानते आ रहे हैं और आज भी इस रिवाज को कायम रखा मास्टर सेफ की कंटेस्ट अरुणा विजय (Aruna Vijay Masterchef)।

2500000 रुपए भी ठुकरा दिए अरुणा ने

मारवाड़ की अरुणा विजय ने आज जैन समाज को गौरवान्वित कर दिया है। बताया जा रहा है कि अरुणा विजय तमिलनाडु (Tamil Nadu) की रहने वाली है और वे सोनी टीवी में आने वाला शो मास्टर सेफ ऑफ इंडिया (Masterchef Of India) की प्रतियोगी रही है। उन्होंने आखरी तक बहुत अच्छी तरह से खेला है। अरुणा के द्वारा निर्मित व्यंजन मास्टर को इतना पसंद आ रहा था कि वह उंगली चाटते रह जा रहे थे।

अरुणा का कहना है कि तमिलनाडु का होने के बाद भी वे कभी इडली डोसा तक सीमित नहीं रही बल्कि उन्हें भारत की हर शाकाहारी डिश बनानी आती है और वे अपने तरीके से बहुत ही अच्छे तरीके से शाकाहारी डिश को रिप्रेजेंट कर रही थी, परंतु आखिर में जब उन्हें अंडे (Egg) का इस्तेमाल करके कोई रेसिपी बनानी थी, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया, क्योंकि वह एक जैन धर्म से ताल्लुक रखती थी और उनके धर्म में नॉनवेज को छूना भी पाप माना जाता है।

शाकाहार समाज के लिए गर्व है अरुणा

शाकाहार समाज के लिए अरुणा ने एक मिशाल कायम की है। अक्सर लोगों को हालातों के मुताबिक बदलते देखा है कुछ लोग हालातों को अपने हिसाब से चलाने के लिए खुद को ही बदल देते हैं, परंतु अरुणा अपने समाज और धर्म के लिए एक प्रेरणा बनी है।

आपको बता दें अरुणा जीत के द्वार पर खड़ी थी, केवल एक प्रतियोगिता के बाद वे 2500000 रुपए जीत सकती थी परंतु उन्होंने इस जीत को कुबूल नहीं किया क्योंकि इस जीत में उनका धर्म ध्वस्त हो जाता। अरुणा हार के भी जीत गई है।

उन्होंने ट्विटर पर ट्वीट कर बताया कि किस तरह उन्होंने अपने धर्म को बचा लिया और देश के सामने दक्षिण भारतीय व्यंजनों को भी रिप्रेजेंट किया है। अरुणा चेन्नई के मास्टर साहब की प्रतियोगी है, इसीलिए कई लोग सोचते हैं कि यहां के लोग इडली डोसा और चावल से अपना जीवन व्यतीत करते हैं, परंतु उन्होंने इस प्रतियोगिता के माध्यम से चेन्नई की डोसा इडली और चावल से अलग पकवान का परिचय दिया।

अरुणा विजय के द्वारा कही गई बातें

अरुणा विषय का कहना है कि वे काफी खुश है क्योंकि उन्होंने काफी लोगों की भ्रांतियां थोड़ी है। है कि तमिलनाडु चेन्नई के लोग चावल से बने व्यंजनों को ही ज्यादा खाते हैं उस इलाके में इडली डोसा के अलावा और कुछ भी खास नहीं है। परंतु अभिनेता ने मास्टर शेफ के प्लेटफार्म से यह साबित किया है कि दक्षिण भारत व्यंजन के मामले में भारत के सभी राज्यों के बराबर यहां कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनते हैं।

टॉप टेन में शामिल थी अरुणा

जानकारी के मुताबिक अरुण विजय टॉप 10 लिस्ट में शामिल थी। उनका प्रदर्शन इतना शानदार था कि लोग उनसे काफी ज्यादा खुश हैं। अरुणा कहती है कि उन्होंने अपने राज्य का प्रतिनिधित्व किया है और अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी वाला काम था क्योंकि लोगों के मन में विशेष हिस्से की पहचान बनती है कि भारत के इस विशेष हिस्से में खास क्या है।

उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाई। उन्होंने देश में यह साबित कर दिखाया है कि चेन्नई में ना केवल इडली डोसा चावल बल्कि और भी कई प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं, जो स्वाद में इतने भरपूर होते हैं कि लोग उंगलियां चाटते रह जाए।

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