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Jabalpur: साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इजरायल लगातार नये नये कीर्तिमान बना रहा है और इस बार इजरायल (Israel) के वैज्ञानिकों ने टेक्नोलॉजी का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसके बारे में किसी भी देश ने सोचा भी नहीं होगा। इजरायली रक्षा मंत्रालय ने अपने देश की पोलारिस सॉल्यूशन कंपनी के साथ मिलकर हैरान कर देने वाली टेक्नोलॉजी का निर्माण किया है, जिसके तहत इजरायली सैनिक पूरी तरह से अदृश्य हो जाएंगे, गायब हो जाएंगे और फिर अपने दु-श्मनों का अंत कर सकेंगे।
पूरी दुनिया इस देश का लोहा मानते है यह देश है इजरायल। असल में इजरायल एक ऐसा देश है, जो अपने देश की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इजराइल ने उग्र-वादियों का अंत करने के लिए ऐसे ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं, जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है।
इजराइल के चारों ओर दु-श्मन का ही नजारा है जो किसी भी तरीके से इजराइल का अंत करना चाहते हैं, लेकिन आज के समय में इजरायल इतना शक्तिशाली देश है कि उससे टकराने का साहस कोई और नहीं कर सकता। इजरायल एक शक्तिशाली और खतर-नाक देश बन चुका है।
आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि इजरायल और हिंदुस्तान के बीच में रणनीतिक साझेदारी काफी हद तक स्ट्रोंग है। इजरायल के लोग भी यही मानते हैं कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जो इजरायल का सपोर्ट करता है। भारत ने अभी हाल ही में कई इजरायल से कई अस्त्र शस्त्र भी खरीदे हैं। इजरायल के लोग और वहां की सरकार पाकिस्तानी लोगो को नपसंद करती है।
पाकिस्तानी पासपोर्ट पर साफतौर पर लिखा होता है कि यह पासपोर्ट इजरायल को छोड़कर सभी देशों में मान्य है। इज़रायली सेना दुनिया की चौथी बड़ी सेनाओं में से एक है। इसके साथ ही वहां पर पुलिस के जवानों को भी खास ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही इजरायल का सुरक्षा सिस्टम भी बेहद स्ट्रोंग है।
इजरायल उग्र-वादियों की निंदा करता है और उसको नस्ता-नबूत करने के लिए वह भी प्रयासरत है, सबसे खास बात ये कि इजरायल की सेना कुछ खास टेक्निक को फॉलो करती है उसमें से एक है, किसी भी स्थिति में ऐसी मज़बूत रणनीति के साथ उतरना कि जिससे देश को कम से कम हानि हो।
साल 2016 में इजराइल सेना (Israel Army) पर सबसे अधिक खर्च करने वाला 15वें पायदान पर है। इसे अमरीका से 30.5 लाख डॉलर की सैन्य सहायता भी मिलती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 1985 तक इजराइल दुनिया भर में सबसे बड़ा ड्रोन निर्यातक देश रहा। उसका ड्रोन का 60 फ़ीसदी वैश्विक मार्केट पर अपना रुतवा था।
मिसाल के लिए 2010 में पांच नेटो देश अफ़ग़ानिस्तान में इजराइली ड्रोन ही उड़ाते थे। आख़िर जिस देश की उम्र 70 साल भी नहीं हुई है, उसने दुनिया की सबसे आधुनिक सेना कैसे तैयार कर ली। लोग आज भी सवाल करते है। इसका जवाब उसकी राष्ट्रीय संरचना में ही निहित है। पहली बात यह कि छोटा देश होने का बावजूद इजराइल अपनी जीडीपी का 4.5 फ़ीसदी शोध पर खर्च करता है।
इजराइल 1950 से पर-माणु गुप्त कार्यक्रम पर काम कर रहा है और दुनिया से अदृश्य होकर बम बना रहा है। शांत रेगिस्तान में इस देश के पास नेगेव पर-माणु रिसर्च सेंटर है, जहां ताकतवर ह-थियार बनने के काम किया जाता है।
दुनिया का लगभग हर देश अपने जवानों और देश की रक्षा पर लाखों-करोड़ों खर्च करता है। डिफेंस को स्ट्रांग बनाकर अपने देश की हालत दुनिया (World) में मजबूत बनाता है। भारत भी हर साल करोड़ों का रक्षा बजट पास करता है। इसके बावजूद कई जवान अचानक हुए हमले में वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं।
इजरायल ने अपने देश के जवानों की जान को बचाने के लिए ख़ास तरह की ड्रेस बनाई है। इसे इजरायल मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस Israel’s Ministry of Defense के साथ मिलकर बनाया गया है। इस ड्रेस को किट 300 Kit 300 नाम दिया गया है। किट 300 शीट थर्मल विजुअल कंसीलर टीवीसी से बनी है जो माइक्रोफाइबर, धातु और पॉलिमर को जोड़ती है, ताकि सैनिकों को इंसान की आंखों और थर्मल कैमरों से देखना सम्भव ना हो सके।
इस शीट का वजन सिर्फ 1.1 पाउंड है, जिससे सैनिक आसानी से इसे फोल्ड कर सकते हैं और खतर-नाक जंग भरे क्षेत्रों में ट्रेकिंग करते हुए इसे ले जा सकते हैं। शीट को चलते समय सैनिक अपने चारों ओर लपेटते सकते हैं। इसके साथ अगर वो जिस जगह बैठ जाएं तो एक चट्टान जैसे नजर आएंगे।
शोधकर्ताओं के मुताबिक इसका उपयोग करने के बाद इजरायली सैनिक पत्थर की तरह दिखने लगेंगे और दु-श्मनों को लगेगा कि उनके सामने कोई सैनिक नहीं, बल्कि बड़े-बड़े पत्थर रखे हुए हैं। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के बाद इजरायली सैनिकों को पहचानना मुमकिन नहीं होगा। इस सामग्री को हल्के स्ट्रेचर में बदला जा सकता है। इसे पहनने पर इजरायली सैनिकों को इंसानी आंखों और थर्मल इमेजिंग इक्विुपमेंट की सहयता से पहचाना नहीं जा सकेगा।
इजरायली रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि इस टेक्नोलॉजी का उपयोग किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है और अगर किसी इजरायली जवान को लगता है कि उनके चारो ओर दुश्मनों का समूह आ गया है तो फिर वो इस शीट का उपयोग कर दुश्मनों की आंख में धूल झोंक सकेगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इसे बंडल के रूप में रोल किया जा सकता है।
इजरायली सेना ने इसका सफल परीक्षण कर लिया है और अब इसे सेना में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह का छल आवरण बनाने का विचार पोलारिस सॉल्यूशंस के सह-संस्थापक आसफ ने अपने व्यक्तिगत विचारों से लिया है। 2006 के लेबनान जंग के दौरान आसफ इजरायली सेना में थे और उन्होंने पाया कि सैनिक अपने दुश्मनों के थर्मल इमेजिंग उपकरणों के सामने पूरी तरह से मजफूज नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने इस टेक्नोलॉजी को बनाने की तैयारी की थी। अब यह कंपनी इस तकनीक को अमेरिका और कनाडा को भी देने पर सोच रही है।



