
Bhopal: आधुनिकता के इस दौर मे लोगों ने अपनी सुख सुविधा की वजह से सबसे ज्यादा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। बढ़ते शहरीकरण की वज़ह से जगह की कमी हुई जिस कारण लोगों ने जंगलों को काटना प्रारंभ कर दिया। इस वज़ह से जंगल मे वन्य जीवों का जीवन भी प्रभावित हुआ। बढ़ते शहरीकरण के कारण और सुख सुविधा के चक्कर मे घरों का नामोनिशान खत्म होता जा रहा है।
आज घर अपार्टमेंट के रूप मे बदल चुके है। घटती जमीन की वजह से शहर मे लगभग सभी लोग दूध के लिए गौशालाओं की डेयरी पर पूरी तरह निर्भर हो गए हैं। क्योंकि जगह की कमी और शहरी चकाचौंध के चक्कर मे लोगों ने घर पर पशुओं को पालना बंद कर दिया। अब अगर कोई Animal किसी के घर मे देखने मिलते है तो वह डॉग होता है।
दूध को खराब होने से बचाने के लिए किया जाता है पाश्चुरीकरण
आज लोग देसी शुद्ध दूध की जगह बाजार मे बिकने वाले पैकेट दुध को पसंद करते है। लोगो को बाजार में मिलने वाले पैकेट दुध (Packaged Milk) पर बहुत ज्यादा भरोसा हैं। हम यह जानते है कि पैकेट वाला दूध पाश्चुरीकृत दूध (Packaged Milk) होता है।

पाश्चुरीकृत का मतलब होता है, कि पहले दूध को बहुत तेज Temperature पर गर्म करके उसे ठंडा करके पैकेट मे भर दिया जाता है। फिर उसके बाद इस पैकेट दुध को मार्केट मे सप्लाई करते है। पाश्चुरीकरण की खोज 1862 में लुइस पाश्चर ने की थी। पाश्चुरीकरण करने से दुध 2 से 3 हफ्ते तक अच्छा रहता है। यह खराब नहीं होता।
पाश्चुरीकरण से हो जाते हैं सूक्ष्म जीव खत्म
पाश्चुरीकरण इसलिए करते है, ताकि दूध अधिक समय तक अच्छा रहे वह खराब ना हो तथा उसमें पनपने वाले सूक्ष्मजीव जेसे बैक्टीरिया मर जाए और दोबारा ना पनपें। लेकिन हमारी आदत होती है कि मार्केट में मिलने वाले दुध को भी हम खरीदने के बाद देसी दुध की तरह उबालते है।
उसके बाद ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी यह विचार किया है कि क्या पैकेट वाले दुध को उबालना (Boil) जरूरी है या नहीं। अगर यह विचार आपके मन मे भी आता है, तो आज इस पोस्ट से हम पैकेट वाले दूध के सही इस्तेमाल करने के तरीके को जानेंगे।
आवश्यक नहीं है पैकेट वाले दुध को उबालना
अक्सर ही हम पैकेट वाले दुध को भी उबालकर Use करते है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पैकेड वाला जो दुध होता है वह पहले से ही पाश्चुरीकृत होता है। इस दूध को उबालकर उपयोग करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। दरअसल जब इस दूध को पैक किया जाता है।
उसके पहले ही इसे पास्चुरीकृत कर देते है। जिस वजह से इसमें मौजूद सभी बैक्टीरिया मर जाते है और दूध अधिक समय तक उपयोग करने योग्य रहता है। जब पैकेट वाला दूध लाके उसे फिर से उबालते हैं। तो उसके आवश्यकता पोषक तत्व मर जाते हैं। हालाकि पोषक तत्व खत्म हो जान से दुध पहले जैसा हमे फायदा नहीं पहुंचाता है।
Expire date निकल जाने पर ना करे दुध का ईस्तेमाल
दूध को अधिक समय तक प्रयोग करने के लिए इसे पास्चुरीकृत करने के बाद 4 डिग्री तापमान पर फ्रिज पर रखा जाता है। ऐसा करने से घर मे दुध खरीदने के बाद भी एक हफ्ते तक उपयोग किया जा सकता है।
दूध को खरीदते समय हमेशा ध्यान दे की पैकेट में लिखी एक्सपायरी डेट निकल ना गई हो। क्योंकि अगर डेट निकल जाने के बाद इसका इस्तेमाल किया जाता है तो यह हमारे शरीर को काफी नुकसान पहुंचाता है। अतः Expire Date वाला दुध लेने से हमे हमेशा बचना चाहिए।



