भारत को गौरवान्वित करने वाला ISRO पहली बार ही चांद पर पहुँचने में कामयाब, रूस और अमेरिका जाने कितनी बार फेल हुए

0
432
ISRO News Hindi
India’s ISRO first attempt to reach to the moon was successful but India’s first attempt to land on the moon appears to end in failure. how many times America and Russia failed to reach moon? Ek Number News

Photo Credits: DD Exclusive

भारत का मिशन चंद्रयान-1 पूरी तरह कामयाब होने की ओर है। विक्रम लैंडर से संपर्क जुड़ते ही मिशन पूरी तरह सफल हो जाएगा। खबरो के मुताविक भारत के मिशन चंद्रयान-1 जिसके तहत भारत ने पहली बार में ही चंद्रमा पर अपना कदम रख दिया था। जबकि रूस और अमेरिका जैसे देश ऐसे मिशन में कई बार असफल हुए।

पहली बार भारत ने 2008 में अपने पहले चंद्र मिशन के रूप में “चंद्रयान-1” (Chandrayaan 1) लॉन्च किया था। संस्कृत व हिंदी के व्यरण माला से जोड़कर इस मिशन का नामकरण किया गया था, जिसमें “चंद्र” का अर्थ चंद्रमा और “यान” का अर्थ वाहन है। चंद्रयान-1 अंतरिक्ष यान, एम. अन्नादुरई के नेतृत्व में तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि उपग्रहों से संचार स्थापित करना बहुत कठिन काम है।

अन्नादुरई ने बताया कि चंद्रमा, पृथ्वी से तीन लाख 86 हजार KM की दूरी पर परिक्रमा करता है, जोकि संचार उपग्रहों की कक्षा से 10 गुना ज्यादा दूरी है। परिणामस्वरूप, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO ने संकेतों को हासिल करने और संचारित करने के लिए कहीं ज्यादा उन्नत सेंसर को विकसित किए।

Photo Credits: ISRO

अन्नादुरई ने कहा, ISRO के ट्रैकिंग अफसरो को अंतरिक्ष यान नजर नही आ रहा था। लेकिन आखिरकार चंद्रयान-1 को बिना नजर आए ही यह प्रयोग सफलतापूर्वक किया गया। मंगल मिशन के दौरान इस अनुभव ने हमारी सहायता की। 22 अक्टूबर, 2008 को 1,380 कि. ग्रा. वजनी चंद्रयान-1 अंतरिक्ष यान को भारतीय रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च वीइकल PSLV द्वारा बिना किसी रुकावट के सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में भेजा गया था।

अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के चारों ओर 3,400 से अधिक परिक्रमाएं कीं थी। यह 29 अगस्त, 2009 तक 312 दिनों तक चालू कंडीशन में था। इसके बाद इसके स्टार सेंसर गर्मी के कारण से अस्त व्यस्त हो गए थे। उन्होंने जानकारी दी यह अंतरिक्ष यान अपने साथ कुल 11 प्रायोगिक पेलोड को ले गया था।

इसमें पांच भारतीय और छह विदेशी पेलोड सम्लित थे। इसमें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के तीन, अमेरिका के दो और बल्गेरियाई अकैडमी ऑफ साइंसेज का एक पेलोड सम्लित था। इसके साथ ही भारत चंद्रमा की कक्षा में कदम रखने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया था।

चंद्रयान-1 ने निर्णायक रूप पर चंद्रमा पर पानी के निशान भी Search किये, जोकि इससे पहले कभी सम्भव नहीं हुआ था। इसके साथ ही चंद्रयान-1 ने चांद के उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में पानी से बनी बर्फ का की भी जानकारी एकत्रित की। इसने चंद्रमा की सतह पर मैग्नीशियम, ऐल्यूमीनियम और सिलिकॉन का की इन्फॉर्मेशन निकली।

India’s ISRO first attempt to reach to the moon was successful but India’s first attempt to land on the moon appears to end in failure.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here