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Delhi: मेहनत करने की आदत हो। लगन और जुनून हो तो सफलता प्राप्त होती है, ये साबित कर दिखाया अलवर की ऋषिता ने। 12वीं में नंबर कम होने से उनको मर्जी के सब्जेक्ट पढ़ने के लिए चॉइस के कॉलेज में दाखिला तो नहीं मिला, लेकिन ऋषिता (Rishita Gupta) ने साबित कर दिखाया कि सब्जेक्ट से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन आपकी सोच से बहुत फर्क पड़ता है।
ऋषिता (Rishita Gupta IAS) जीवन को अनिश्चित्ता का दूसरा नाम मानती हैं। शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ भी सोचा। हुआ उससे बहुत अलग। पर संघर्षों से न घबराने वाली ऋषिता ने जीवन के हर पड़ाव को बांहें फैलाकर स्वीकारा। कभी शिकायत करने का मौका नहीं दिया कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों।
कैसे ऋषिता की राशि ने ऐसे तैयारी
कारोबारी परिवार में पली बढ़ी ऋषिता को घर में शुरू से ही पढ़ाई लिखाई का माहौल मिला हुआ था। ऋषिता हमेशा से पढ़ने में काफ़ी अच्छी थी। डॉक्टर (Doctor) भी बनना चाहती थी। खुद पर भरोसा ऐसा कि दसवीं के बाद जब विषय चुनने की बात आई, तो उन्होंने बहुत कठिन माने जाने वाले कांबिनेशन फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथ्स विषयों को सेलेक्ट किया। इसी दौरान पिता की कैंसर के कारण मृत्यु हो गई। इसका असर पढ़ाई और नंबरों पर बहुत पड़ा।
नहीं मिला कोई भी मनचाहे विषय में दाखिला
दिल्ली के अच्छे कॉलेजों में आसानी से दाखिला कभी नहीं मिलता। कटऑफ बहुत ज्यादा हाई जाता है। उस साल की मेरिट लिस्ट के हिसाब से ऋषिता के नंबर कुछ खास नहीं आए। तो ऋषिता को मजबूरी में इंग्लिश लिट्रेचर से ग्रेजुएशन करना पड़ा। उन्होंने तय किया कि वह सिविल सर्विसेस के क्षेत्र में अपना करियर बनाएंगी।
लक्ष्य तय कर लेने के बाद उन्होंने तैयारी पर पूरा फोकस किया। वह साल 2015 था। जब ऋषिता ने तय किया कि वह यूपीएससी की कड़िं परीक्षा देंगी। ऋषिता की खूबी है कि वह पहली बार में ही टार्गेट अचीव करने में यकीन मानती हैं, एक इंटरव्यू में ऋषिता ने कहा कि मैंने अपने आप से यह कभी कहा नहीं कि मुझे और मौके मिल जाएंगे, बल्कि मैं ठान चुकी थी कि सेलेक्ट होना है, तो पहली बार में ही होना है।
IAS success strategy of Rishita
ऋषिता ने कोचिंग की। नोट्स बनाए, मॉक टेस्ट दिए, ओर खूब रिवीज़न किया। रिसोर्सेस जैसे इंटरनेट का भरपूर इस्तेमाल किया। ऋषिता ने हर ऐंगल को लेकर तैयारी की। किताबें सीमित रखीं। बार-बार उन्हें दोहराया भी। कांसेप्ट्स हमेशा क्लियर रखे। बेस मजबूत करने के लिए सबसे पहले NCERT की बहुत सारी किताबें पढ़ीं।
पढ़ाई के लिये संसाधन कहा से जुटाए
ऋषिता (IAS Rishita Gupta) मानती हैं कि इस परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत पैसे की जरूरत बिल्कुल नहीं है। एक लैपटॉप, बढ़िया नेट कनेक्शन, कुछ किताबें, प्रिंटर और संभव हो, तो कोचिंग के एनुअल नोट्स। बस इतना ही तैयारी के लिए काफी है। आजकल ऑनलाइन लगभग सारी (Online Study Material) चीजें मिल ही जाती हैं।
ऑप्शन चुनते समय केवल अपने दिल की सुनें। पूरी तैयारी स्ट्रेटजी बनाकर करें। नोट्स बनाते चलें। उतना ही पढ़ें जितने को रिवाइज़ कर सकें। ऐसे टॉपिक्स या किताबें पढ़ने से कोई फायदा नहीं जिन्हें रिवाइज़ न कर सकें। लगातार न्यूज़पेपर पढ़ते रहें और मंथ्ली मैगज़ीन जरूर पढ़ें।
प्रैक्टिस नहीं की तो कोई भी तैयारी काम की नहीं
ऋषिता लिखने के अभ्यास पर बहुत जोर देती हैं। उन्होंने ‘UPSC Mains Paper’ के पहले 15 दिन तक लगभग रोज़ टेस्ट दिए, जिससे उनकी स्पीड बहुत सुधरी। इसके साथ ही मॉक टेस्ट ने भी काफी फायदा पहुंचाया। ऋषिता कहती हैं कि रिजल्ट पर फोकस न करने की जगह केवल तैयारियों पर ध्यान दें। अगर तैयारियां अच्छी होंगी तो रिजल्ट अच्छा आना स्वाभाविक है।



