पिता का सपना था की बेटा IAS बने, बेटा UPSC परीक्षा क्रैक कर 6वीं रैंक ले आया और अफसर बन गया

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IAS Shubham Gupta
IAS Officer Shubham Gupta Success Story in Hindi. UPSC Topper IAS Shubham Gupta, who once worked in a shoe shop to earn his livelihood.

Photo Credits: Instagram

Mumbai: अगर किसी चीज़ को करके की ठान लो और पूरे कॉन्फिडेंस से मेहनत करो, तो उस चीज़ को पा ही लोगे। बस जरुरत है, तो पॉजिटिव रहकर अपने लक्ष्य की तरफ देखने की और कामयाबी कदम चूमने लगती हैं। आज हम आपको एक ऐसे शख्स ही कहानी बताएंगे, जो की एक गरीब परिवार का बेटा है।

कम संसाधनों में ही उसने कड़ी मेहनत के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC में टॉप किया और IAS अफसर बन गया। इस बेटे का नाम शुभम गुप्ता (IAS Shubham Gupta) है। शुभम गुप्ता की कहानी आपको प्रेरित करने के लिए काफी है। राजस्थान के जयपुर से आने वाले शुभम गुप्ता एक गरीब परिवार से नाता रखते हैं। उनके पिता की जयपुर में ही जूते की दुकान थी।

अपने परिवार में वो (Shubham Gupta) माता पिता के अलावा अपने तीन भाई-बहनों के साथ रहते थे। जयपुर में पिता की दुकान से पर्याप्त इनकम भी नहीं हो पा रही थी। गरीबी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे शुभम के पिता ने महाराष्ट्र में दुकान खोलने का फैसला किया।

उन्होंने महाराष्ट्र में अपनी दुकान (Shoe Shop) तो खोल ली थी, परन्तु मुश्किलें कम नहीं हुई। शुभम की बहन का स्कूल घर से बहुत दूर था और दोनों को हर रोज़ ट्रेन से स्कूल जाना पड़ता था। वही, उनके बड़े भाई दूसरे शहर से आईआईटी की तैयारी कर रहे थे। भाइ तो बाहर पढ़ाई करने चले गए थे, तो ऐसे में शुभम को उन दिनों अपने पिता की जूतों की दुकान पर बैठना होता था। वही वे अपने पिता का काम में हाँथ बटाते थे।

शुभम की प्रारंभिक पढ़ाई राजस्थान से ही हुई और फिर बाकी पढाई महाराष्ट्र से हुई। शुभम जब 8वीं क्लास में थे, तब वह अपने पिता के साथ महाराष्ट्र गए थे। वो बचपन से ही समझदार और मेहनती थे। उन्होंने कॉमर्स से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। शुभम ने एक अख़बार को बताया कि जब वह 10वीं में पढ़ाई कर रहे थे। तब उन्हें लोगों ने साइंस सब्जेक्ट लेने की सलाह दी। लेकिन शुभम शुरुआत से ही कॉमर्स सब्जेक्ट से अपनी पढ़ाई करना चाहते थे और उन्होंने आगे यही सब्जेक्ट लिया।

शुभम ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे अंको से पास की। आगे की पढाई के लिए उन्होंने दिल्ली आकर श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स मेंं दाखिला लेने का प्रयास किया। लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। जिसके चलते उन्होंने किसी दूसरे कॉलेज से ग्रेजुएशन और एमकॉम की पढ़ाई पूरी करि।

उन्होंने हिंदी अख़बार के पत्रकार को बताया की जब वह छोटे थे, तब उनके पिता ने उनसे कहा था कि मैं चाहता हूं कि तुम एक दिन बड़े अधिकारी बन जाओ। अपने पापा की ये बात शुभम के मन में समा गई थी। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। अब वे केवल अफसर बनने के बारे में सोचते थे।

शुभम कहते हैं कि जब वो एमकॉम की पढ़ाई कर रहे थे। उस वक़्त भी उनके पिता ने कलेक्टर बनने के लिए फिरसे कहा था। पिता की ये बात उनके दिल को छू गई। उन्होंने UPSC की तैयारी करना शुरू कर दिया। शुभम अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए साल 2015 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा में सम्मिलित हुए। एग्जाम की तैयारी पर्याप्त ना होने के चलते उन्हें सफलता नहीं मिली। इस परीक्षा में वो प्री की परीक्षा भी पास नहीं कर सके थे, तो मैन्स एग्जाम तो दूर की बात थी।

फिर उन्होंने साल 2016 में दूसरा प्रयास किया। इस बार उन्होंने UPSC के प्री, मेन्स और इंटरव्यू को पास कर लिया। उन्हें इस परीक्षा में 366वीं रैंक हासिल हुई। इससे उनको भारतीय ऑडिट एंड अकाउंट विभाग में नौकरी का अवसर मिला। परन्तु शुभम इस पोस्ट से और भी बड़ी पोस्ट पाना चाहते थे। वो आईएएस अधिकारी बनना चाहते थे।

उन्होंने पूरी लगन से कड़ी मेहनत की। फिर से उन्होंने साल 2017 में यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) दी। तीसरी बार यूपीएससी की परीक्षा में उन्होंने बहुत पूरा स्कोर किया। इस बार वो तो वो प्रीलिम्स की परीक्षा भी नहीं निकल पाए। इस तरह शुभम को यूपीएससी परीक्षा में लगातार 3 सालों तक अच्छी रैंक हासिल नहीं हुई।

अपने पापा के आदेश और सपनों को पूरा करने के लिए साल 2018 में उन्होंने आईएएस (IAS Officer) बनने के लिए एक बार फिर टॉय किया। उन्होंने इस बार कोई कसार नहीं छोड़ी। उन्होंने पिछली 3 बार की गलतियों को इस बार सुधारा। अपने चौथे प्रयास में शुभम ने ना केवल UPSC Exam पास किया, बल्कि अच्छी रैंक भी प्राप्त की। साल 2018 की यूपीएससी की परीक्षा में उन्हें 6वीं रैंक हासिल हुई।

इस कामयाबी से सबसे ज्यादा खुशी शुभम के पिता को हुई। यूपीएससी में 6वीं रैंक (6th Rank in UPSC) लाकर बेटे ने टॉप किया था और अब बेटा आईएएस अधिकारी बन रहा था। बनने का मौका मिल गया। हालिया समय में वे महाराष्ट्र कैडर से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वो असिसटेंट कलेक्टर के पद पर पोस्टेड हैं। यह सफलता सच्ची लगन और मेहनत की मिसाल है।

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