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Delhi: किसी ने ठीक ही कहा है की काम करने की कोई उम्र नहीं होती है। अगर कोई काम सही दिशा में और लगन से किया जाये, तो सफलता तो निश्चित है। यहाँ बात हो रही है 94 साल की हरभजन कौर की। इन दादी के अपने हाथों से बनाई बेसन बर्फी चंडीगढ़ के साप्ताहिक ऑर्गेनिक मार्केट में खूब बिक रही हैं। करीब तीन साल पहले उन्होंने बर्फी बेचकर अपनी जिंदगी की पहली कमाई की थी, जो आज लाखों में हो रही है।
हरभजन कौर पंजाब में अमृतसर के के पास तरन-तारन में जन्मी थी। फिर शादी के बाद अमृतसर, लुधियाना रही और लगभग 10 साल पहले पति की मृत्यु के बाद वे कुछ समय से अपनी बेटी के साथ चंडीगढ़ में रहने लगी। एक दिन बेटी ने बांटों ही बांटों में उनके दिल की थाह लेनी चाही और पूछ लिया “कोई मलाल तो नहीं न है आपको, कोई चाहत तो बाकी नहीं, कहीं आने-जाने या कुछ करने-देखने की इच्छा बाकी हो तो बताओ।” बस यही वो दिन था।
Meet Harbhajan Kaur, the 94 year old entrepreneur.
Her business started only years ago and is now spreading across the country. Incredible! https://t.co/ikjSll7gfJ pic.twitter.com/uWPTrSfZ2H
— SikhNet (@SikhNet) May 10, 2021
वे इस सवाल का इंतज़ार ही कर रही थी। उन्होंने कहा की मैंने इतनी लंबी उम्र गुज़ार दी और एक पैसा भी नहीं कमाया। माँ की बात पर बेटी ने सवाल किया की आप क्या कर सकती हो, कैसे कमाना चाहोगी वो पहला रूपया। इस सवाल का उत्तर मां ने कहा की ”मैं बेसन की बर्फी बना सकती हूँ। घर में धीमी आंच पर भुने बेसन की मेरे हाथ की बर्फी को कोई तो ख़रीददार मिल ही जायेगा।” बस फिर शुरूआत हुई एक बड़े व्यापर की।
Meet Harbhajan Kaur, the 94-years-old 'Young Entrepreneur' 😍
Age is just a number proved by a grandmother from Chandigarh who began her journey of becoming an entrepreneur four years ago at the age of 90, she sells homemade besan ki barfi and pickles.Huge Respect 👏 pic.twitter.com/SCJXHFouzZ
— Bingage (@GetBingage) September 7, 2020
वही के नज़दीकी सैक्टर 18 के ऑर्गेनिक मार्किट से परिवार वालों ने संपर्क किया और वहां से मिला 5 किलो बेसन बर्फी का पहला ऑर्डर। परिवार वालों ने सोचा की माँ को कुछ अच्छा लगा होगा। लेकिन वो तो अब अपने इस काम को आगे बढ़ाने की मन बना बैठी थी। कुछ ही समय में मुहल्ले-पड़ोस, परिचितों तक बर्फी की मिठास पहुंचने लगी और हरभजन कौर ऑर्डर पर अपने घर की रसोई में और कई चीज़ें भी बनाने लगी, जैसे मिठाई, बादाम का शरबत, लौकी की आइसक्रीम, दाल का हलवा, टमाटर चटनी, अचार और अन्न। अब माँ की ऑर्डर लिस्टऔर भी लम्बी हो गई।
94-year-old, Harbhajan Kaur, from #Chandigarh who started making sweets four years back wanted to fulfill her long-term dream of earning by herself. Here is her story, full of hope and motivation pic.twitter.com/bA95lZowTA
— GoNewsIndia (@GoNews_India) January 4, 2020
अब बुढ़ापे के इस दौर में ऑर्डर पूरा करने की रफ्तार धीमी होती है, मगर इस ज़ायके का लाज़वाब स्वाद हर कोई चखना चाहता है और लाइन लगी रहती है। दादी सारा काम खुद ही करती है। घर में काम के लिए आने वाली सहायिका या बेटियों-नातिन को कुछ भी छूने या हाथ बंटाने की भी छूट नहीं होती।
जिस बेसन बर्फी के दम पर हरभजन कौर ने इस उम्र में यह काम शुरू किया है उसे बनाना उन्होंने अपने पिता से सीखा था, मतलब करीब सौ साल पुरानी रेसिपी का स्वाद आज भी कायम है। अपनी कुछ रेसिपी वे अपने शैफ नाती को सौंप चुकी है, जो अपने रेस्टॉरेंट में पंजाब की इस खान-पीन विरासत को हमेशा के लिए सुरक्षित कर चुका है।



