यहाँ के पूर्व सरपंच का अनोखा प्रयास, अपनी 30 बीघा ज़मीं में खड़ी बाजरे की फसल गायों को दे दी

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Cows Eating Crops
Cows Eating Crops.

Barmer: गाय (Cow) हमारी माता है और हम उसकी संतान। यह लाइन बचपन से आज तक हम सुनते आये है। यह लाइन सिर्फ लिखी नहीं जाती वास्‍तव में गाय को माता का दर्जा हमारे देश में दिया जाता है। गाय कि सेवा करना सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। अक्‍सर ही धार्मिक आयोजन में गाय की सेवा की जाती है। गाय कि सेवा में कभी कोई भारतीय पीछे नहीं रहता।

लम्‍पी वायरस ले रहा प्रतिदिन सैकडो गायो कि जान

आज हम देख रहे है कि लम्‍पी वायरस के कहर से सभी गाय की स्थिति दयनीय हो गई है। हर दिन लम्‍पी वायरस सैकड़ो गायों की जान ले रहा है। ताजा आकड़ो के अनुसार देश में हर दिन हजारों गाय संक्रमित हो रही है।

Photo Credits: Pixabay

हर राज्‍य अपने अपने स्‍तर पर गाऊ माता कि सेवा करने में लगा हुआ है। लम्‍पी वायरस से गायों की रक्षा करने के लिये टीकाकरण भी किया जा रहा है। परन्‍तु सभी गायो का टीकाकरण नही हो पाया है। हालांकि बहुत सी गाय उपचार की सहायता से हर दिन ठीक भी हो रही है।

राजस्‍थान सिलोर के सरपंच ने गायो के लिये छोड़ी बाजरे की फसल

हम देख रहे है कि देश में हर राज्‍य इस समस्‍या का सामना कर रहा है। जहॉं सरकार अपने स्‍तर पर प्रयास कर रही है। वही आम जनता भी अपने स्‍तर पर गाय कि सेवा करने का प्रयास कर रही है।

इसी बीच राज्‍य राजस्‍थान से गाय कि सेवा करने की ऐसी खबर सामने आई है। जिसने सभी का मन जीत लिया। यह खबर राजस्‍थान के बाड़मेर (Barmer Rajasthan) से निकलकर आ रही है। बाड़मेर समदड़ी के गांव सिलोर के सरपंच जिनका नाम माधुसिंह राजपुरोहित (Madhu Singh Rajpurohit) है।

उन्‍होंने गाय कि सेवा के लिये अपनी तीस बीघा जमीन (30 Begha Land) पर उगी बाजरे की फसल को गाय के चारे के लिये छोड़ दिया। सरपंच माधुसिंह ने यह फसल अपने ही क्षेत्र की गौशाला जिसका नाम नागदेश गोशाला (Naagdesh Gaushala) है। उसमें पलने वाली गायों के लिये छोड़ी है। सरपंज ने अपनी फसल को नागदेव गोशाल के जो अध्‍यक्ष है उनकी मौजूदगी में छोड़ा। नागदेव गोशाला के अध्‍यक्ष का नाम श्री टीकमपुर राजपुरोहित है।

बाजरा बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

बाजरा (Bajara) एक बहुत ही अच्‍छा रोग प्रतिरोधक होता है। लम्‍पी वायरस हर जगह फैल रहा है कई गाय इसकी चपेट में प्रतिदिन आ रही है। जिसे देखते हुये सरपंच जी ने यह फेसला लिया है। वह चाहते है कि गाय इसे खाकर अपना पेट भरे और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से लम्‍पी वायरस से होने वाले रोग से लड़ सके।

Farmers Farm in India

सरपंच माधुसिंह जी ने अपनी फसल दान करके एक अनूठा उदाहरण लोगो के सामने पेश कर दिया है। आज उनकी जमीन पर सैकड़ो गाय (Cows) खड़ी बाजरे की फसल को भोजन के रूप में ग्रहण करके अपना पेट भर रही है।

फायदे के बारे में ना सोचकर कि गऊ सेवा

इस वर्ष चूँकि बर्षा ज्‍यादा हुई है ऐसे में बाजरे की फसल बहुत ही अच्‍छी हुई है। माधुसिंह के खेत में बाजरे की फसल हर साल से ज्‍यादा अच्‍छी हुई है। अभी की बात करें तो यह फसल पकने की स्थिति मे आ चुकी है।

इसके बाद भी माधुसिंह जी ने इसे गायों के लिये छोड़ दिया। माधुसिंह जी ने अपने फायदे के बारे में सोचे बगैर यह कार्य किया। यह करके माधुसिंह जी लोगो के बीच एक अनूठे उदाहरण के रूप में पेश हो रहे है।

11000 की राशि दान की अनूठा उदाहरण पेश किया

यही नहीं माधुसिंह जी ने गायों की सेवा हो सके उनके रोग का उपचार हो सके इसलिए गोशाला में 11000 रूपये कि राशि भी दान में दी है। माधुसिंह ने गायों की दवाईया खरीदी जा सके इसलिए यह नगद राशि जमा कराई। चाहे गाय के लिये अपनी जमीन की बाजरे की फसल छोड़नी हो या फिर 11000 रूपये कि राशि दान करना।

यह दोनों ही कार्य माधुसिंह के सराहनीय है। उनकी यह नेकी हमारे लिये ओर करोड़ो भारतीय के लिये सीख है कि हमें भी गायो की मदद के लिये आगे आना होगा। इस भयंकर संकट में गायों की सेवा करना ही हमारा परम कर्तव्‍य होना चाहिए।

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